नहर के हैड पर सेंसर लगे तब पता चले प्रदूषण का स्तर

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/

हनुमानगढ़. राजस्थान की नहरों में पंजाब की तरफ से प्रवाहित किए जा रहे प्रदूषित पानी की समस्या विकराल हो रही है। इसकी रोकथाम को लेकर अब तक ठोस प्रयास नहीं हुए।

 

By: Purushottam Jha

Updated: 13 Jun 2021, 12:19 PM IST

नहर के हैड पर सेंसर लगे तब पता चले प्रदूषण का स्तर
-इंदिरागांधी फीडर में आरडी 558 व गंगकैनाल में खखा हैड की आरडी 368 पर लगने हैं रियल टाइम वॉटर क्वालिटी मॉनटरिंग सिस्टम
-उपकरण लगाने को लेकर डेढ़ वर्ष पहले स्वीकृत हुआ था 77 लाख का बजट, अब तक अधरझूल में प्रोजेक्ट
हनुमानगढ़. राजस्थान की नहरों में पंजाब की तरफ से प्रवाहित किए जा रहे प्रदूषित पानी की समस्या विकराल हो रही है। इसकी रोकथाम को लेकर अब तक ठोस प्रयास नहीं हुए। इतना जरूर है कि इस जहरीले पानी की गुणवत्ता जांचने को इंदिरागांधी फीडर के अंतरराज्यीय बिंदुओं पर रियल टाइम वॉटर क्वालिटी मॉनटरिंग सिस्टम लगाने के प्रति राजस्थान सरकार अब गंभीर होती नजर आ रही है। इसके लिए सोलह सितम्बर २०२० को ७७ लाख रुपए का बजट भी स्वीकृत हो चुका है। प्रोजेक्ट के अनुसार निर्धारित हैडों पर १४ मार्च २०२१ तक रियल टाइम वॉटर क्वालिटी मॉनटरिंग सिस्टम लगाने का काम पूरा होना था। लेकिन अचानक कोविड संक्रमण के चलते विदेशों से उपकरणों की आवक बंद होने के कारण इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में देरी हो रही है। लेकिन राहत की बात है कि अब कंपनी स्तर पर सेंसर मंगवा लिए गए हैं। इसके बाद डाटा फीडिंग करने में अनुबंधित कंपनी के अभियंता लगे हुए हैं। विभागीय अधिकारी पंद्रह-बीस दिन में उपकरणों के इंस्टालेशन का काम पूरा होने की बात कह रहे हैं। जल संसाधन विभाग क्वालिटी कंट्रोल जयपुर अमरजीत मेहरड़ा ने इसे लेकर स्थानीय अधिकारियों को तत्परता से कार्य करने को लेकर निर्देशित किया है।

एनजीटी का बड़ा योगदान
इंदिरागांधी नहर में प्रदूषित पानी की आवक को रोकने के लिए वर्ष २०१४ में पूर्व जिला प्रमुख शोभा डूडी, पूर्व उप जिला प्रमुख शबनम गोदारा व पूर्व उप प्रधान राजेंद्र प्रसाद ने एनजीटी में याचिका दायर कर लंबी लड़ाई लड़ी। एनजीटी के निर्देशों का असर अब संबंधित राज्यों की सरकारों पर नजर आ रहा है। सभी अंतरराज्यीय नहरी सीमाओं पर ऑटोमैटिक सेंसर सिस्टम लगाने की प्रक्रिया प्रगति पर है।

एक दर्जन प्वाइंट चिन्हित
बीबीएमबी की टीम ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में करीब बारह प्वाइंट चिन्हित किए हैं, जहां से इन राज्यों में नहरी पानी का प्रवेश होता है। बताया जा रहा है कि सेंसर सिस्टम लगने के बाद यह हैडों पर आपूर्ति होने वाले पानी की हर स्तर पर जांच करके इसकी रिपोर्ट तत्काल ऑनलाइन तरीके से संबंधित राज्यों के अधिकृत अफसरों के पास पहुंच जाएगी। इस तरह नहरी पानी में प्रदूषण की मात्रा कितनी है, इसकी हर पल की रिपोर्ट भेजकर सेंसर सिस्टम सरकारी तंत्र को अपडेट रखेगा।

ऑक्सीजन डिमांड की मिलेगी जानकारी
सेंसर सिस्टम लगने के बाद नहरों में प्रवाहित होने वाले पानी का पीएच, टर्बिडिटी, वॉटर टेम्परेचर, ऑक्सीजन मात्रा, बायो केमिकल्स, ऑक्सीजन डिमांड, अमोनिया, नाइट्रेट, क्लोराइड आदि तत्वों की जांच हो सकेगी। पीएचईडी की जो वर्तमान में लैब है, उसमें केमिकल्स आदि की ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाती है। इसलिए जयपुर सेंपल भेजे जा रहे हैं।

इन जिलों को लाभ
प्रदेश में इंदिरा गांधी नहर का पानी राजस्थान के दस जिलों के करीब दो करोड़ नागरिकों की प्यास बुझा रहा है। मगर इस पानी के प्रदूषित होने से नागरिकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इंदिरागांधी नहर से हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, झुुंझुंनू, सीकर आदि जिले जुड़े हैं। भविष्य में सेंसर सिस्टम लगने पर प्रदूषण का स्तर तत्काल पता चलने पर पानी का प्रवाह रोका जा सकेगा।

.....फैक्ट फाइल....
-सेंसर लगाने के लिए तीनों राज्यों के करीब १२ नहरी प्वाइंट चिन्हित।
-इंदिरागांधी नहर से प्रदेश के करीब दो करोड़ लोगों की बुझ रही प्यास।
-नहरी क्षेत्रों से राज्य में ५००० करोड़ से अधिक का फसल उत्पादन हो रहा है।
-सेंसर सिस्टम लगाने के लिए ७७ लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है।

.....वर्जन....
इंदिरागांधी फीडर व गंगकैनाल में
रियल टाइम वॉटर क्वालिटी मॉनटरिंग सिस्टम लगाने का काम प्रगति पर है। सेंसर की आपूर्ति कार्यालय स्तर पर हो गई है। अभियंता डाटा इंस्टोल करने में लगे हैं। विदेशों से सामान आने के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई है। जल्द उपकरण लगाने का काम पूरा करने का प्रयास है।
-सुरेश कुमार सुथार, एक्सईएन, भाखड़ा रेग्यूलेशन खंड हनुमानगढ़

Purushottam Jha Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned