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चिरंजीवी योजना में सजेरियन को शामिल किया तो जिला अस्पताल में न के बराबर होने लगेगी सर्जरी

चिरंजीवी योजना में सजेरियन को शामिल किया तो जिला अस्पताल में न के बराबर होने लगेगी सर्जरी
- जिला अस्पताल की एमसीएच में एक ही एमएस गायनी होने से 65 के करीब पहुंची सर्जरी
हनुमानगढ़. जिला अस्पताल के एमसीएच यूनिट के ऑपरेशन थियेटर में सर्जरी की संख्या 65 तक सिमट कर ही रह गई है।

हनुमानगढ़

Published: May 02, 2022 10:27:40 pm

चिरंजीवी योजना में सजेरियन को शामिल किया तो जिला अस्पताल में न के बराबर होने लगेगी सर्जरी
- जिला अस्पताल की एमसीएच में एक ही एमएस गायनी होने से 65 के करीब पहुंची सर्जरी
हनुमानगढ़. जिला अस्पताल के एमसीएच यूनिट के ऑपरेशन थियेटर में सर्जरी की संख्या 65 तक सिमट कर ही रह गई है। एक ही एमएस गायनी होने के कारण प्रतिदिन दो से तीन ही सर्जरी हो रही है। आपातकाल स्थिति में सर्जरी का संदेह होने पर गर्भवती के परिजनों को प्राइवेट अस्पताल में लेजाने की सलाह दी जाती है। जानकारों की माने तो राज्य सरकार सजेरियन को भी चिरंजीवी योजना शामिल कर लेती है तो सरकारी अस्पताल में गर्भवती की सर्जरी का आंकड़ा और गिर जाएगा। जिला अस्पताल में चार एमएस गायनी कार्यरत थे। उस वक्त प्रतिमाह 180 से 200 सजेरियन होती थी। जिला अस्पताल से जैसे-जैसे एमएस गायनी छोड़ते गए, सजेरियन के आंकड़े गिरते रहे। वर्तमान में जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक से दो सर्जरी और प्रतिमाह 65 से 70 सर्जरी हो रही है।
चिरंजीवी योजना में सजेरियन को शामिल किया तो जिला अस्पताल में न के बराबर होने लगेगी सर्जरी
चिरंजीवी योजना में सजेरियन को शामिल किया तो जिला अस्पताल में न के बराबर होने लगेगी सर्जरी
चिरंजीवी में सरकारी अस्पताल फिसड्डी
चिरंजीवी योजना लागू होने के बाद से सरकारी अस्पताल में सर्जरी न के बराबर हो रही है। रोगी व परिजन प्राइवेट अस्पतालों में योजना का लाभ लेते हुए सर्जरी करवा रहे हैं। वहीं रोगी व परिजनों के आग्रह पर और प्राइवेट अस्पतालों में सुविधा होने के कारण सरकारी अस्पताल के चिकित्सक इन अस्पतालों में जाकर चिरंजीवी योजना के तहत ऑपरेशन कर रहे हैं। इसकी वजह से सरकारी अस्पतालों में सर्जरी के आंकड़े न के बराबर हो गए। स्वास्थ्य विभाग के 1 मई 2021 से 31 मार्च 2022 तक के आंकड़ों के अनुसार रावतसर के सरकारी अस्पताल में केवल 11.57 प्रतिशत रोगी भर्ती हुए। हनुमानगढ़ टाउन के जिला अस्पताल में 15.71 प्रतिशत, डबलीराठान में 17.29 प्रतिशत, टिब्बी में 17.59 प्रतिशत, पल्लू में 18.40 प्रतिशत, गोलूवाला में 19.66 प्रतिशत, ढाबां में 20.18 प्रतिशत व पीलीबंगा में 20.18 प्रतिशत, भादरा में 27.09 प्रतिशत व नोहर में सर्वाधिक 84.18 प्रतिशत रोगियों को भर्ती किया गया है।
दो दिन आउटसोर्स
जिला अस्पताल में एक ही एमएस गायनी के रहने से व्यवस्था नहीं बिगड़े, इसके लिए प्राइवेट अस्पताल की तीन एमएस गायनी का एक पैनल बनाया गया है। सरकारी अस्पताल में एक मात्र सेवाएं दे रही एमएस गायनी के छुट्टी पर जाने या फिर डेऑफ के दिन अस्पताल प्रशासन पैनल में शामिल तीन चिकित्सकों में एक को बुलाया जा रहा है। पैनल में सेवानिवृत एमएस गायनी डॉ. ओला, डॉ. सीमा खीचड़ व डॉ. प्रेरणा राठौड़ को शामिल किया गया है। इनकी सेवाएं के बदले जिला अस्पताल प्रशासन प्रति सर्जरी तीन हजार रुपए शुल्क देगा। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में प्रत्येक गुरुवार व रविवार को उक्त तीनों चिकित्सकों में से एक को बुलाकर सर्जरी करवाई जाती है। गौरतलब है कि 2020 में भी जिला अस्पताल प्रशासन ने आउट सोर्स के जरिए यह व्यवस्था की थी। लेकिन ज्यादा दिन तक चल नहीं पाई थी। इन आउट सोर्सेज के पैनल में शामिल चिकित्सकों का भुगतान भी अटक गया था। जिला अस्पताल में तीन माह में तीन एमएस गायनी सरकारी सेवाएं छोड़कर जा चुकी है। दो एसएस गायनी पूर्व में अपनी सेवाएं छोड़कर गई थी तो हाल ही में एक एमएस गायनी जिला अस्पताल छोड़कर चली गई हैं।
अनुबंध पर नहीं हुई व्यवस्था
गत माह में जिला अस्पताल प्रशासन ने सीएमएचओ को पत्र लिखकर अनुबंध पर एमएस गायनी लगाने की मांग की थी। 2020 में जिला अस्पताल की एमसीएच यूनिट में एक भी एमएस गायनी नहीं होने के कारण करीब 46 दिन तक ताला लटका रहा था। एमएस गायनी नहीं होने के कारण परिजन साधारण प्रसव करवाने के लिए भी गर्भवती को जिला अस्पताल में लाने से कतराते थे। गर्भवती की तबीयत खराब होने पर सर्जरी की आवश्यकता होती है।
180 से अधिक होती है सर्जरी
एमसीएच यूनिट में एक माह में 180 से अधिक सर्जरी होती है। कई बार यह आंकड़ा 200 से अधिक भी पहुंच जाता है। हालांकि मार्च 2022 में केवल 77 सजेरियन ही हुए और अप्रेल में 65 सर्जरी हुई है। वर्तमान में जिला अस्पताल में सात एनस्थेसिया चिकित्सक है और छह पीडियाट्रिशन हैं। चार एमएस गायनी में एक ही रह गई हैं। नियमों के अनुसार सौ बेड के एमसीएच यूनिट के लिए चार एमएस गायनी होना आवश्यक है।
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