जिले में 17 अरब का हो रहा कपास उत्पादन

जिले में 17 अरब का हो रहा कपास उत्पादन

Purushotam Jha | Publish: Apr, 19 2019 09:07:39 PM (IST) | Updated: Apr, 19 2019 09:07:40 PM (IST) Hanumangarh, Hanumangarh, Rajasthan, India


-उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने को लेकर किसानों को करेंगे जागरूक
-कृषि अधिकारियों व वैज्ञानिकों की हुई कार्यशाला
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हनुमानगढ़. खरीफ की प्रमुख फसल बीटी कपास की बिजाई को लेकर कृषि विभाग ने मुस्तैदी बढ़ा दी है। इसके तहत किसान गोष्ठियां करवाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। कृषि विभाग हनुमानगढ़ की ओर से आत्मा कार्यालय सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया। बीटी कपास उत्पादन तकनीक को किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से कार्यशाला आयोजित करवाई जा रही है। हनुमानगढ़ में आयोजित कार्यशाला में कृषि अधिकारी, वैज्ञानिक सहित प्रगतिशील किसान शामिल हुए। इस मौके पर जिला कलक्टर जाकिर हुसैन ने विभागीय अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों को बीटी कपास की उन्नत तकनीक कृषकों तक हस्तांतरण कर उत्पादन को बढ़ाने के लिए निर्देशित किया। साथ ही कार्यशाला में दी गई तकनीकी जानकारी को काफी उपयोगी बताया। जिले में कुल 170000 हैक्टेयर में कपास की बुवाई होती है। जिसमें से 160000 हैक्टेयर क्षेत्रफल बीटी कपास का है। इसकी गत तीन वर्षों की उत्पादकता 6 क्विंटल प्रति बीघा रही है। जो बीटी कपास की अधिकतम उत्पादन क्षमता 10 क्विंटल प्रति बीघा की तुलना में 4 क्टिवंल प्रति बीघा कम है। इसके कारण जिले में 2603700 क्विंटल उत्पादन कम हो रहा है। वर्तमान में लगभग इस जिले में 17 अरब रुपए के कपास का उत्पादन हो रहा है। यदि कृषक बीटी कपास की उन्नत तकनीक अपनाते हुए समन्वित पोषक तत्व प्रबन्धन एवं कीट/रोग प्रबन्धन कर लेता है तो इस राशि 1.25 से 1.50 गुणा किया जा सकता है एवं उत्पादकता को 8 क्विंटल प्रति बीघा किया जा सकता है। गुरुवार को संपन्न हुई कार्यशाला में कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के कृषि वैज्ञानिकों, जिले के प्रगतिशील कृषकों, बी.टी. कपास बीज उत्पादक कम्पनियों के प्रतिनिधियों, बी.टी. कपास बीज विक्रेता तथा कृषि विभाग के सहायक कृषि अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षकों ने भाग लिया। उप निदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद, हनुमानगढ़ दानाराम गोदारा ने जिले के कपास उत्पादन परिदृश्य के बारे में विस्तृत जानकारी दी। बीटी कपास के बीज की जिले में उपलब्धता एवं सुचारू रूप से बीज वितरण व्यवस्था संबंधी जानकारी दी। स्वामी केशवानन्द कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के पूर्व निदेशक (अनुसंधान) डॉ. पी एल नेहरा ने बी.टी. कपास के बुवाई पूर्व की जाने वाली उन्नत शस्य क्रियाओं यथा गर्मियों की जुताई, समय पर निराई-गुडाई एवं बुवाई के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर के डॉ. विजय प्रकाश आर्य, (पादप प्रजनक) ने बीटी कपास की विभिन्न उन्नत किस्मों की जानकारी दी। डॉ. रूप सिंह मीणा, (कीट वैज्ञानिक) ने बीटी कपास में लगने वाले हानिकारक कीट सफेद मक्खी के नियंत्रण हेतु उपाय बताए। जयनारायण बेनीवाल, उप निदेशक कृषि (आत्मा) हनुमानगढ़ ने बीटी कॉटन के उत्पादन को उसकी उत्पादन क्षमता तक लाने के लिए बुवाई पूर्व एवं बुवाई के समय की जाने वाली शस्य क्रियाओं तथा समन्वित पोषक तत्व प्रबन्धन के बारे में जानकारी दी। सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) नोहर बलवीर सिंह खाती ने जैव उर्वरकों का बीटी कपास में महत्व के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में उप निदेशक कृषि (शस्य) डॉ. रंगपाल सिंह डांगी, कृषि अधिकारी, सुरेन्द्र जाखड़, बलकरण सिंहह, बीआर बाकोलिया, सुभाषचन्द्र सर्वा, स्वर्ण सिंह अराई, सहायक कृषि अधिकारी कुलवंत सिंह बराड़, कृषि पर्यवेक्षक जगदीश दूधवाल व व्यापारी बालकृष्ण गोल्याण आदि उपस्थित रहे।

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