जानिए क्यों कोरोना काल में प्रवासियों को चबाने पड़ेंगे चने

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हनुमानगढ़. लॉकडाउन के दौरान मुसीबतों से दो-चार होने के बाद प्रवासी लोगों की मुसीबतें निकट भविष्य में कम होती नजर नहीं आ रही। क्योंकि गांवों और शहरों में इन श्रमिकों व अन्य लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने को लेकर ठोस नीति नहीं बनाई गई है।

 

By: Purushottam Jha

Updated: 05 Jun 2020, 07:58 AM IST

प्रवासियों को चबाने पड़ेंगे चने, रोजगार छिनने पर घर वापसी करने वालों को सरकार गेहूं के साथ प्रतिमाह एक किलो देगी साबुत चने
-स्थानीय स्तर पर गठित कोर कमेटी परखेगी घर लौटने वालों की आंखें
हनुमानगढ़. लॉकडाउन के दौरान मुसीबतों से दो-चार होने के बाद प्रवासी लोगों की मुसीबतें निकट भविष्य में कम होती नजर नहीं आ रही। क्योंकि गांवों और शहरों में इन श्रमिकों व अन्य लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने को लेकर ठोस नीति नहीं बनाई गई है। इस बीच केंद्र सरकार ने प्रवासी लोगों का पेट भरने के लिए पांच किलो प्रति यूनिट के हिसाब से नि:शुल्क गेहूं व एक-एक किलो प्रति परिवार साबुत चने का वितरण करने की तैयारी पूरी कर ली है। इस स्थिति में जीवन की गाड़ी को पटरी पर लाने का ख्वाब देख रहे प्रवासी लोगों को अब चने चबाकर ही कुछ दिन व्यतीत करने पड़ेंगे। हनुमानगढ़ जिला प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा सूची से वंचित ग्रामीण क्षेत्र के 156071 व शहरी क्षेत्र में 34446 लोगों को जरूरतमंद मानते हुए इन्हें नि:शुल्क राशन उपलब्ध करवाने की कवायद तेज कर दी है। लेकिन केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार पहले चरण में तीन जून तक केवल प्रवासी लोगों को ही गेहूं व चने का वितरण किया जाएगा। हालांकि सर्वे की अंतिम तिथि अब पांच जून तक बढ़ा दी गई है।
इसलिए प्रवासियों की संख्या में कुछ और बढ़ोतरी हो सकती है। नि:शुल्क राशन वितरण को लेकर जिला प्रशासन स्तर पर उचित मूल्य दुकानों पर दो-दो कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी। जिससे पात्र प्रवासी लोगों को ही राशन दिया जा सके। वहीं किसी प्रवासी नागरिक के सर्वे में वंचित रहने पर उसका तत्काल उचित मूल्य पर भौतिक सत्यापन कर उसे राशन वितरित किया जाएगा। जून में प्रवासियों को मई व जून दोनों माह का राशन वितरित किया जाएगा। जिला रसद विभाग कार्यालय के प्रवर्तन अधिकारी विनोद कुमार ढ़ाल ने बताया कि प्रवासी लोगों को प्राथमिकता से राशन वितरित करने को लेकर सभी तरह की तैयारी पूरी करने में लगे हैं। अगले सप्ताह तक राशन वितरण का काम शुरू करेंगे। प्रवासी लोगों के चयन को लेकर ग्राम पंचायत व शहरों में वार्ड स्तर पर कोर कमेटी गठित होगी। जो यह तय करेगी कि कौन प्रवासी है या नहीं। राशन वितरण के लिए जिला प्रशासन जल्द एक तारीख निर्धारित कर उचित मूल्य दुकानों पर प्रवासियों को राशन वितरित करेगा। इसके लिए हर उचित मूल्य दुकान पर एक ईमित्र को अटैच किया जा रहा है। जिससे प्रवासियों का भौतिक सत्यापन करने के बाद ही उन्हें राशन दिया जा सके।

जिले पर नजर
हनुमानगढ़ जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में 156071 लोगों के लॉकडाउन से प्रभावित होने का अनुमान लगाया है। इसी तरह शहरी क्षेत्र मेें 34446 परिवारों को शामिल किया है। इनको चरणबद्ध तरीके से राशन वितरण को लेकर सरकार स्तर पर प्लानिंग की जा रही है। इसमें तीन जून तक जिले में ग्रामीण क्षेत्र के 1307 व शहरी क्षेत्र के 495 प्रवासी लोगों चयन किया गया है। इनको राशन वितरित करने की तैयारी तेज कर दी गई है।

.....फैक्ट फाइल....
-जिले में खाद्य सुरक्षा सूची से वंचित पौने दो लाख लोगों के लॉकडाउन प्रभावित होने का अनुमान है।
-हनुमानगढ़ जिले में कुल 681 राशन डिपो संचालित हैं।
-02 लाख 64 हजार परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े हैं।
-हनुमानगढ़ जिले में कुल 5 लाख 20 हजार परिवारों के राशन कार्ड बने हैं।
-लॉकडाउन में पीएम गरीब कल्याण योजना में करीब 5000 एमटी का विशेष आवंटन हो रहा है।
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...पत्रिका व्यू.....
पवित्र प्रयासों की जरूरत
बाहरी राज्यों व जिलों से हनुमानगढ़ आने के लिए करीब बारह हजार लोगों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया है। वहीं स्थानीय स्तर पर हजारों परिवार लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए हैं। इन परिवारों की जिंदगी को पटरी पर लाना सरकार का दायित्व ही नहीं इस वक्त बड़ी प्राथमिकता भी होनी चाहिए। इन परिवारों का भौतिक सत्यापन कर इन्हें नि:शुल्क राशन उपलब्ध करवाने का निर्णय सराहनीय है। इसमें प्रति परिवार पांच किलो गेहूं व एक किलो साबुत चने का वितरण सरकार जल्द करने जा रही है। मगर बेहतर होता कि सरकार दाल मिलों से अनुबंध करवाकर इसे पिसवा कर वितरित करवाती। इससे मुसीबत में फंसे लोगों को कम से कम दाल-रोटी तो नसीब होती। साथ ही दाल मिलो में इसी बहाने कुछ श्रमिकों को रोजगार भी मिल जाता। प्रवासियों की इतनी फिक्र जब सरकार कर ही रही है तो उसे नि:शुल्क राशन में गेहूं, चना के साथ चीनी व मसाले को भी शामिल करना चाहिए। संकट की घड़ी में उम्मीद कर सकते हैं कि राहत के नाम पर किसी तरह की खानापूर्ति नहीं हो। कृषि प्रधान राष्ट्र में इस वक्त इतना खाद्यान तो उत्पन्न हो रहा है कि पूरे देश का पेट भरा जा सके। हां इसके लिए सरकार को पवित्र प्रयास करने होंगे।

Purushottam Jha Reporting
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