रेलवे की भूमि बताने वाली राजस्व रिपोर्ट में नप ने भी लगाई थी मुहर

रेलवे की भूमि बताने वाली राजस्व रिपोर्ट में नप ने भी लगाई थी मुहर
नप ने भी माना कि भूमि उनकी नहीं रेलवे की है
- उठाया सवाल, फिर नप ने पट्टे क्यों किए जारी
- गांधीनगर व भट्टा बस्ती में हुई संयुक्त बैठक में बोले पार्षद

By: Anurag thareja

Published: 06 Jan 2020, 10:07 PM IST

हनुमानगढ़. जंक्शन स्थित गांधीनगर व भट्टा बस्ती की 183 बीघा भूमि के सर्वे के बाद इलाके में हडकंप मचा हुआ है। वो इसलिए क्योंकि राजस्व विभाग की जिस रिपोर्ट में यह भूमि रेलवे की बताई जा चुकी है। उसमें नप के भी अधिकारियों के भी हस्ताक्षर है। इसके चलते इलाके के नागरिकों को उनके सिर से छत खिसकने का डर अब सता रहा है। इस संबंध में रविवार को स्वामी विवेकानंद पार्क में नागरिकों को सयुंक्त बैठक हुई। बैठक में मौजूद पार्षदों ने नप पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब भूमि रेलवे की है तो नगर परिषद ने पट्टे क्यों जारी किए। बैठक में मौजूद नप के अधिकारी ने तर्क दिया कि उन्हें यह भूमि मंडी समिति से हैंडओवर हुई थी और बकायदा इसका गेजेट नोटिफिकेशन भी हुआ था। इसी के आधार पर पट्टे जारी किए गए थे। इस पर पार्षद बोले कि नागरिकों के पास महाराजा गंगा सिंह के समय के भी पट्टे हैं। इसके बावजूद यह भूमि रेलवे की कैसे हो सकती है। बैठक के अंत में पार्षदों ने वस्तुस्थिति को लेकर हाइकोर्ट में मुकदमा लडऩे की बात कही।

नगर परिषद ने नहीं की पैरवी
पार्षद तरुण विजय, गुरदीप सिंह व नगीना बाई ने आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर नगर परिषद ने हाइकोर्ट में अच्छी तरह पैरवी नहीं की। राजस्व विभाग की सयुंक्त रिपोर्ट देेने से पहले कोर्ट को वस्तुस्थिति के बारे में अवगत कराया जा सकता था। लेकिन इस मामले पर नप कई वर्षों से ढिलाई बरत रही है। जबकि यह मामला कई वर्षों से कोर्ट में चल रहा है।

करोड़ों के विकास कार्य करवाए
पार्षद तरुण विजय ने कहा इलाके में विद्युत, पेयजल कनेक्शन आदि के लिए नप ने एनओसी भी जारी की और विकास कार्यों पर करोड़ो रुपए खर्च कर चुकी है। गांधीनगर व भट्टा बस्ती का मामला कई वर्षों से हाइकोर्ट में है। इलाके की वस्तुस्थिति के बारे में कोर्ट को पहले ही अवगत करवा दिया होता तो आज यह नौबत नहीं आती। बैठक में पूर्व पार्षद राम सिंह सिद्धू, वली मोहम्मद, भाजपा नेता विजय कौशिक, अमित तिवाडी, महेंद्र यादव, गुरदीप सिंह, नगर परिषद एटीपी रामनिवास, सहायक नगर नियोजक सुनील कुमार, विजय राव, सोहन सिंह, अनिल शर्मा, मनीष शर्मा, डूंगरराम, मनोज शर्मा, शिवशंकर शर्मा आदि मौजूद रहे।

183 बीघा भूमि पर 645 से अधिक घर
हाइकोर्ट में यूनियन ऑफ इण्डिया बनाम नगर परिषद के बीच चल रहे मामले को लेकर नगर परिषद गांधीनगर व भट्टा बस्ती की कुल 38 हैक्टेयर भूमि का सर्वे करवा चुकी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर 20 जनवरी को हाइकोर्ट की अग्रिम सुनवाई में नगर परिषद अपना पक्ष रखेगी। जानकारी के अनुसार सर्वे में गांधीनगर व भट्टा बस्ती में 645 से अधिक मकान है। इसके अलावा कई भूखंड रिक्त है और कई भूखडों में पशु रखने के लिए कच्चे मकान बना रखे हैं। 645 घरों में से 60 प्रतिशत लोगों के पास उनके भूखंड के पट्टे भी हैं और कईयों के पास तो महाराजा गंगासिंह की रियासत के समय के भी पट्टे हैं। सर्वे में गांधीनगर में 330 मकान व भट्टा बस्ती में 315 मकान है। इनमें से अभी तक 60 प्रतिशत लोगों ने अपने मकानों के पट्टे की प्रतिलिपि जमा करवाई है।

राजस्व विभाग बता चुका है रेलवे की भूमि
विधानसभा चुनाव से पहले मई 2018 में राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ रेलवे व नगर परिषद के अधिकारियों ने गांधीनगर व भट्टा बस्ती इलाके का संयुक्त सर्वे किया था। संयुक्त रिपोर्ट में राजस्व विभाग ने रिकार्ड के मुताबिक 183 बीघा भूमि रेलवे की बताई थी। इस रिपोर्ट में नगर परिषद अधिकारियों के हस्ताक्षर होने की भी बात कही जा रही है। इसी के आधार पर रेलवे ने हाइकोर्ट की सुनवाई में अपना पक्ष रख चुका है। इधर, नगर परिषद का दावा है कि 1997 में मंडी समिति से यह भूमि हैंडओवर की गई थी। इसका नियमिन कर व गेजेट नोटिफिकेशन होने के पश्चात काफी लोगों को मकानों के पट्टे दिए जा चुके हैं और इस इलाके में भूखंडों का आवंटन भी नगर परिषद की ओर से किया जा चुका है। इस भूमि पर कुल आबादी क्षेत्र, पट्टे आदि की रिपोर्ट तैयार कर हाइकोर्ट के समक्ष अग्रिम सुनवाई में रखेगी। इसके अलावा रेलवे को अन्य जगह पर भूमि देने का प्रस्ताव भी नप की ओर से रखा जा सकता है।

पट्टे नहीं बनने पर उठाए थे सवाल
जानकारी के अनुसार पूर्व की भाजपा सरकार ने मकानों के पट्टे बनाने के लिए अभियान चलाया था। गांधीनगर व भट्टा बस्ती के मामले की सुनवाई हाइकोर्ट में होने के कारण व रेलवे को इन कॉलोनियों पर मिल चुके स्टे के कारण उस समय नप ने पट्टे जारी करने से इंकार कर दिया था। इस पर कई नागरिकों ने फिर से इस भूमि का सर्वे कराने की मांग की थी। संयुक्त रूप से रिकार्ड के मुताबिक किए गए सर्वे भूमि रेलवे की निकली थी।

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