अब आखिरी उम्मीद, 17 को साफ होगी 282 करोड़ की तस्वीर

अब आखिरी उम्मीद, 17 को साफ होगी 282 करोड़ की तस्वीर
- 30 माह में पूरा होना था काम, 22 माह में 6.5 प्रतिशत हुआ कार्य

हनुमानगढ़. शहर में 282 करोड़ के प्रोजेक्ट को बचाने के लिए अब आखिरी उम्मीद बची है। इसकी तस्वीर 17 जनवरी को साफ होगी। आरयूआईडीपी के अनुसार 17 जनवरी को होने वाली हाइकोर्ट में सुनवाई के दौरान कंपनी व अधिकारियों के बीच प्रोजेक्ट को लेकर अंतिम वार्ता होगी।


अब आखिरी उम्मीद, 17 को साफ होगी 282 करोड़ की तस्वीर
- 30 माह में पूरा होना था काम, 22 माह में 6.5 प्रतिशत हुआ कार्य

हनुमानगढ़. शहर में 282 करोड़ के प्रोजेक्ट को बचाने के लिए अब आखिरी उम्मीद बची है। इसकी तस्वीर 17 जनवरी को साफ होगी। आरयूआईडीपी के अनुसार 17 जनवरी को होने वाली हाइकोर्ट में सुनवाई के दौरान कंपनी व अधिकारियों के बीच प्रोजेक्ट को लेकर अंतिम वार्ता होगी। इस प्रोजेक्ट के डूबने पर आरयूआईडीपी की प्रदेश में हुई किरकरी के बाद जैसे-तैसे फिर से शुरू करने के प्रयास में जुटे है। अब इस कार्य को कराने के लिए कंपनी से प्रोजेक्ट टेकओवर अन्य को दिलाने की चर्चा है। इस मुद्दे पर बैंक की मध्यस्थता होना भी शेष है। बताया जा रहा है कि बैंक से अनुमति मिलते ही वर्तमान निर्माण एजेंसी व नई कंपनी के मध्य आरयूआडीपी एमओयू करवाएगी। इधर, इस प्रोजेक्ट को लेकर जोधपुर हाइकोर्ट में अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी।

यह हो चुका है कार्य
22 माह में केवल साढ़े छह प्रतिशत ही कार्य हो पाया है। जबकि तीस माह में इसे पूरा किया जाना चाहिए था। कंपनी को शहर के 60 वार्डों में 522 किलोमीटर में पेयजल पाइप लाइन डालनी है। अभी तक चार किलोमीटर लाइन ही बिछाई गई है। इसी तरह शहर के चालीस हजार घरों में पेयजल कनेक्शन किए जाने थे। खुंजा की नई सड़कों को उखाड़कर 348 पेयजल कनेक्शन के लिए ही लाइन बिछाई जा चुकी है। घरों को जाने वाली 522 किलोमीटर की मिसिंग पेयजल पाइप लाइन को जोडऩे के लिए 21 किलोमीटर की मुख्य पाइप लाइन बिछाई जानी थी। इसमें से अभी तक करीब 800 मीटर ही पाइप लाइन बिछाई गई है। आरडब्ल्यूआर, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, सीडब्ल्यूआर की खुदाई का कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है।

2018 में शुरू हुआ था निर्माण कार्य
आरयूआईडीपी ने निर्माण एंजेसी को कार्य में तेजी लाने के लिए 12.5 करोड़ रुपए एडवांस दिए थे। लेकिन कार्य धीमी गति होने के कारण आरयूआईडीपी ने एडवांस दी गई राशि में से साढ़े छह करोड़ रुपए साढ़े छह प्रतिशत हो चुके निर्माण की राशि में से कटौती कर ली। इसके अलावा निर्माण एजेंसी प्रोजेक्ट के डिजाइन में बार-बार बदलाव करने का आरोप भी आरयूआईडीपी पर लगा चुकी है। फरवरी 2018 में निर्माण शुरू हुआ और अप्रेल में पेयजल के लिए नहरी पानी की सप्लाई के लिए सर्वे हुआ। इस कार्य को पूरा करने के लिए आरयूआईडीपी ने संबंधित कंपनी को तीस माह का समय दिया था।

टाउन में नहीं होगा सीवरेज पर काम
टाउन इलाके में मेगा हाइवे पर भारत माता चौक से भटनेर दुर्ग तक 1200 मीटर में सीवरेज लाइन डालने का कार्य कई वर्षों से लंबित है। कई जगह मिसिंग लिंक का कार्य भी अधूरा पड़ा है। ऐसे में अब टाउन में सीवरेज लाइन का कार्य भी आठ वर्ष से अधर में हैं।

17 को होगी वार्ता
282 करोड़ के प्रोजेक्ट को लेकर 17 को वार्ता होगी। इसमें प्रोजेक्ट को फिर से शुरू कराने के लिए ठोस निर्णय लिया जाएगा।
राजेंद्र स्वामी, अधिशासी अभियंता, आरयूआईडीपी

Anurag thareja Reporting
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