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सॉयल हेल्थ कार्ड की रिपोर्ट देखने पर खेती को लेकर हैरान करने वाली तस्वीरें आई सामने

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हनुमानगढ़. जिले के मिट्टी की सेहत दिनोंदिन बिगड़ रही है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि जब तक हमारी जमीन की सेहत दुरुस्त नहीं होगी, तब तक मानव के सेहत को दुरुस्त रखना संभव नहीं होगा। इसलिए जरूरी है कि भूमि को भी निर्धारित मात्रा में उसकी खुराक मिलती रहे। हनुमानगढ़ जिले की बात करें तो विद्युत चालकता और पीएच मान में बढ़ोतरी होने से भविष्य में उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगा है।

 

हनुमानगढ़

Published: January 09, 2022 08:13:43 pm

सॉयल हेल्थ कार्ड की रिपोर्ट देखने पर खेती को लेकर हैरान करने वाली तस्वीरें आई सामने
-जिले में जैविक कार्बन की कमी के कारण दिनोंदिन खेती में बढ़ रही है लागत

हनुमानगढ़. जिले के मिट्टी की सेहत दिनोंदिन बिगड़ रही है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि जब तक हमारी जमीन की सेहत दुरुस्त नहीं होगी, तब तक मानव के सेहत को दुरुस्त रखना संभव नहीं होगा। इसलिए जरूरी है कि भूमि को भी निर्धारित मात्रा में उसकी खुराक मिलती रहे। हनुमानगढ़ जिले की बात करें तो विद्युत चालकता और पीएच मान में बढ़ोतरी होने से भविष्य में उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगा है। स्थिति यह है कि धरती की क्षमता से अधिक फसल लेने की जिद से सोना उगलने वाली जमीनें बंजर होने की कगार पर पहुंच गई है। हैरानी इस बात की है कि खेती करने वाले किसान भी मिट्टी की सेहत को नजर अंदाज कर रहे हैं। हालांकि इसका तात्कालिक खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ रहा है। कृषि अधिकारियों का मानना है कि भूमि में जैविक कार्बन की कमी की वजह से खेती में लागत बढ़ रही है। इसलिए लागत कम करने के लिए जरूरी है कि किसान मिट्टी के मर्म को समझें। अधिकारियों का मानना है कि जैविक खाद की बजाय रासायनिक खाद का अधिक उपयोग करने से इस तरह के हालात बन रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष २०१५-१६ से २०२०-२१ तक जिले में कुल आठ लाख से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं। इन नमूनों का विश्लेषण करने के बाद जो स्थिति सामने आई है, वह काफी चिंताजनक लग रही है। पृथ्वी की उपजाऊ क्षमता की बात करें तो हनुमानगढ़ की मिट्टी की उर्वरा शक्ति 9. 2 स्केल पर पहुंच गई है। जो हमारे लिए खतरे की तरफ इशारा कर रही है। सामान्य तौर पर मिट्टी का पीएच मान ८.५ से कम होना चाहिए। जिले के घटते-बढ़ते पीएच मान का एक बड़ा कारण बारिश का कम होना बताया जा रहा है। इसके अलावा रासायनिक खाद का अधिकाधिक उपयोग भी दूसरा कारण माना जा रहा है। कृषि के जानकार कहते हैं कि समय रहते यदि हम पृथ्वी को बचाने के लिए आगे नहीं आए तो वह दिन दूर नहीं जब हमारी धरती बंजर हो जाएगी। भूमि में विद्युत चालकता ०.५ मिली म्हौज प्रति सेमी होने पर बीज का अंकुरण तीव्र से गति से होता है। इस मात्रा के कम ज्याद होने पर जमीन की अंकुरण क्षमता क्षीण यानि खत्म होने लगती है। वर्तमान में हनुमानगढ़ की जमीन में विद्युत चालकता 1.० से ५.० मिली म्हौज प्रति सेमी है। जो भविष्य में आने वाली खतरनाक स्थिति की आहट देता है। जिले में सेमग्रस्त क्षेत्र पीलीबंगा में बड़ोपल, जाखड़ावाली व गोलूवाला के आसपास में भूमि की विद्युत चालकता चार से पांच मिली म्हौज तक पहुंच गई है।
सॉयल हेल्थ कार्ड की रिपोर्ट देखने पर खेती को लेकर हैरान करने वाली तस्वीरें आई सामने
सॉयल हेल्थ कार्ड की रिपोर्ट देखने पर खेती को लेकर हैरान करने वाली तस्वीरें आई सामने
गोबर खाद का उपयोग जरूरी
क्षेत्र में गोबर खाद का उपयोग किसान अब ज्यादा नहीं कर रहे हैं। किसानों का पशुपालन से इतना वास्ता नहीं रहा है। हनुमानगढ़ जिले की मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा औसतन ०.२५ प्रतिशत रही है। जबकि ०.५ प्रतिशत तक होना चाहिए। खेती में जैविक व गोबर खाद का उपयोग कम होने तथा रासायनिक खाद का अधिक उपयोग करने के कारण ऐसी स्थिति बन रही है। जैविक खाद का अधिकाधिक उपयोग करके मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।
अच्छी नहीं स्थिति
कृषि विभाग की ओर से संचालित मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला हनुमानगढ़ के प्रभारी गुरसेवक सिंह तूर के अनुसार बीते दिनों लगे प्रशासन गांवों के संग अभियान में कुल ९००० सॉयल हेल्थ कार्ड बांटे गए। इसमें सभी में नाइट्रोजन व जैविक कार्बन की कमी पाई गई है। बीते छह वर्षों में जिले में आठ लाख से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं। इनके नमूने जांचने पर जो स्थिति सामने आई है, वह खेती के लिहाज से ठीक नहीं है। इन नमूनों में जैविक कार्बन, पीएच मान, विद्युत चालकता आदि की मात्रा स्थिर नहीं है। जैविक खाद का अधिकतम उपयोग करके ही भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। लेकिन किसान इसे समझ नहीं रहे। वह लगातार रासायनिक खाद के उपयोग पर जोर दे रहे हैं। जो खेती के लिहाज से भविष्य के लिए काफी चिंताजनक है।

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