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किसी वक्त सहकारी स्पिनिंग मिल की इस आवाज से जागता था पूरा शहर, अब लंबे समय से छा रही खामोशी

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हनुमानगढ़. जिला मुख्यालय पर किसी वक्त हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार बांटने वाले सहकारी स्पिनिंग मिल पर अब करीब छह वर्ष से ताला लटका हुआ है। ऐसा भी वक्त था जब मिल का हुटर (सायरन) बजता था तो पूरा शहर जाग जाता था। इस हुटर के बजने का मकसद वैसे केवल मजदूरों को जगाने तथा शिप्ट बदलने का संकेत देना मात्र था।

 

हनुमानगढ़

Published: December 23, 2021 07:55:39 pm

किसी वक्त सहकारी स्पिनिंग मिल की इस आवाज से जागता था पूरा शहर, अब लंबे समय से छा रही खामोशी
-कोई सरकार नहीं खोज रही इस मिल के ताले की चाबी, मिल मुद्दे पर सबका जवाब गोलमाल
-मिल चलने पर फिर हजारों लोगों को मिल सकता है रोजगार, आज होने जा रहे जिला स्तरीय इन्वेस्टर समिट में मिल चलाने के मुद्दे पर चर्चा करने की जरूरत
किसी वक्त सहकारी स्पिनिंग मिल की इस आवाज से जागता था पूरा शहर, अब लंबे समय से छा रही खामोशी
किसी वक्त सहकारी स्पिनिंग मिल की इस आवाज से जागता था पूरा शहर, अब लंबे समय से छा रही खामोशी
हनुमानगढ़. जिला मुख्यालय पर किसी वक्त हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार बांटने वाले सहकारी स्पिनिंग मिल पर अब करीब छह वर्ष से ताला लटका हुआ है। ऐसा भी वक्त था जब मिल का हुटर (सायरन) बजता था तो पूरा शहर जाग जाता था। इस हुटर के बजने का मकसद वैसे केवल मजदूरों को जगाने तथा शिप्ट बदलने का संकेत देना मात्र था। परंतु इसके बजने का इंतजार मानो सबको रहता था। जैसे ही हुटर की आवाज गूंजती थी, पूरे शहर को वक्त का पता चल जाता था। लेकिन अब राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना इस मिल पर लंबे समय से ताला लटका हुआ है। वर्ष २०१५-१६ में जिस वक्त मिल पर तालाबंदी की गई थी, उस समय कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार के उक्त निर्णय का काफी विरोध किया था। साथ ही कांग्रेस की सरकार बनाने पर मिल चलाने का दावा भी चुनावों के वक्त किया गया था। मगर अब सरकार बनने पर कांग्रेस इस मुद्दे को गोलमोल करने में लगी हुई है। राज्य सरकार के तीन वर्ष पूरे करने का जश्न मना रहे क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर ठोस जवाब देने से बच रहे हैं। इस स्थिति में आखिर मिल का ताला कब खुलेगा, यह छह बरस बाद भी सवाल ही बना हुआ है।
ऐसे हालात में आज टाउन के राजवी पैलेस में होने जा रहे जिला स्तरीय इन्वेस्टर समिट में इस मुद्दे पर चर्चा करना बेहद जरूरी है। इस कार्यक्रम में नए उद्योग स्थापित करने के इच्छुक इकाईयों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। वहीं करोड़ों की लागत से तैयार सहकारी स्पिनिंग मिल को चलाने के मुद्दे पर भी यदि सरकार और उद्योगपति चर्चा करते हैं तो निश्चित तौर पर इसके सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। इस सहकारी मिल में बनने वाले धागे की चमक पूरे एशिया में फैल चुकी है। गुणवत्ता के मामले में कई अहम पुरस्कार भी यह मिल प्राप्त कर चुका है। बाद में सरकार की उदासीनता के चलते फैडरेशन बनाने के बाद यहां से आईएएस अफसर की जगह आरएएस अफसरों की नियुक्ति की जाने लगी। धीरे-धीरे मिल कुप्रबंधन का शिकार बनती चली गई। बाद में राजनीति की ऐसी भेंट चढ़ी कि आज तक मिल का ताला खोलने को लेकर किसी सरकार ने इस ताले की चाबी खोजने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
सुबह ५.३० बजे से बजने लगता था सायरन
हर दिन सुबह ५.३० बजे हुटर (सायरन) बजना शुरू होता था। ताकि सुबह की शिफ्ट में आने वाले श्रमिक व स्टॉफ सचेत हो जाएं। इसके बाद रात दस बजे तक यह सायरन अपने निर्धारित समय तक बजता रहता था। इसका मकसद मिल में कार्यरत स्टॉफ को समय की पाबंदी का संदेश देना था।
ऐसे बनी थी मिल
१९७० के दशक में स्पिनिंग मिल की स्थापना कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। इसके बाद १९८५ में मिल में उत्पादन शुरू हुआ। उस समय करीब १७ टन धागा हर दिन तैयार होता था। इस धागे की चमक देश व विदेशों में थी। श्रमिक और प्रबंधन दोनों खुश थे। लेकिन जैसे ही १९९२-९३ में सरकार ने प्रदेश की तीनों सहकारी स्पिनिंग मिलों की फैडरेशन बनाई, तब से मिल की बर्बादी का मंजर शुरू हो गया।
कबाड़ हो रही करोड़ों की मशीनें
वर्ष २०१५-१६ में जिस समय मिल में तालाबंदी की गई थी, उस समय हनुमानगढ़ के स्पिनिंग मिल इकाई के पूरे सेटअप का बाजार मूल्य करीब ८३ करोड़ अनुमानित माना गया था। उत्पादन शुरू होने के बाद से इस मिल ने सरकार के खजाने में करीब ७२ करोड़ का टैक्स जमा करवा दिया है। लेकिन अब करीब छह वर्ष से तालाबंदी के चलते करोड़ों की मशीनें कबाड़ हो रही है।
....मिल पर नजर....
-मिल संचालन के शुरुआती दौर में २००० श्रमिक मि में कार्यरत थे।
-वर्ष १९८५ में मिल में शुरू हुआ था धागे का उत्पादन।
-उस समय हर दिन १७ टन धागा होता था उत्पादन।
-मिल से जुड़े हैं ५०० से अधिक शेयर होल्डर।
-१९९२-९३ में सरकार ने तीन मिलों की फैडरेशन बना दी थी। इसके बाद से मिल के बर्बादी का दौर शुरू हो गया।
.......वर्जन.....
जिले की जरूरत है मिल
जिला प्रभारी मंत्री के सामने हाल ही में स्पिनिंग मिल को चलाने का मुद्दा रखा गया था। अभी तक प्रशासनिक स्तर पर मिल संचालन को लेकर मेरे पास किसी तरह की सूचना नहीं है। वैसे यह मिल जिले की बड़ी जरूरत है। कपास पट्टी के नाम से चर्चित इस जिले में इसके संचालन पर कईयों को रोजगार मिल सकता है।
-नथमल डिडेल, कलक्टर, हनुमानगढ़
सरकार तलाश रही संभावना
जिला मुख्यालय पर बंद पड़ी सहकारी स्पिनिंग मिल को चलाने को लेकर सरकार को पत्र लिखा गया है। सरकार ने मिल संचालन को लेकर संभावना तलाशने के लिए सहकारिता विभाग के अधिकारियों को पत्र भिजवाया है। विभागीय रिपोर्ट के बाद ही आगे की स्थिति का पता चल सकेगा।
-चौधरी विनोद कुमार , विधायक, हनुमानगढ़
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