डीएलसी दरें अधिक होने से नहीं हो रहे जमीनों के सौदे

भूखंडों के बढते दामों के मुकाबले डीएलसी दर अधिक होने के चलते खरीददारी से कतरा रहे उपभोक्ता

हनुमानगढ़. पीलीबंगा. व्यापारिक एवं कृषि की दृष्टि से विशिष्ट अ श्रेणी की मंडी में भूखंडों की कीमत से डीएलसी दरें अधिक होने के चलते खरीददार भूखंद खरीदने से कतरा रहे हैं। भूखंड की मार्केट वेल्यू से डीएलसी दर अधिक होने के चलते भूखंडों के बेचान व खरीद को लेकर सौदे नहीं हो रहे। बाजार में 15 गुणा 45 फीट की दुकान की कीमत करीब 35 लाख रूपये है जबकि उसकी डीएलसी दर 52 लाख रूपये है ऐसे में दुकान की रजिस्ट्री (पंजीकरण) के समय खरीददार को कीमत से करीब 17 लाख रूपये डीएलसी दर के अनुसार अधिक देने पड़ते हैं जो उसके लिए घाटे का सौदा है। इसी प्रकार नए मंडी यार्ड में पिड़ सहित दुकान का साईज 25 गुणा 100 है जिसकी कीमत वर्तमान में करीब 35 लाख रूपये है लेकिन यार्ड में डीएलसी दर अधिक होने के चलते उसी दुकान की कीमत रजिस्ट्री के समय करीब 45 लाख रूपये हो जाती है। ऐसे में दुकान खरीदने वाले व्यक्ति के लिए यह सौदा महंगा पड़ता है।

झेलनी पड़ती है कई पेचिदगियां
दुकान या भूखंड खरीदते समय खरीददार को कई पेचिदगियां झेलनी पड़ती है। इसमें इनकम टेक्स विभाग भी सम्पति खरीद को लेकर टेक्स वसूलेगा जिसमें 35 लाख रूपये की कीमत वाली दुकान 45 लाख रूपये में पड़ती है। ऐसे में डीएलसी दर के अनुसार करीब 10 लाख रूपये का संबंधित उपभोक्ता पर विभाग गिफ्ट टेक्स लगा देगा। इसके अलावा दस्तावेज संबंधी भी कई पेचिदगियां संबंधित उपभोक्ता को झेलनी पड़ती है।

बैंकों से हो सकती है धोखाधड़ी
भूखंड या दुकान खरीदने वाला व्यक्ति बैंक से यावसायिक सम्पति खरीदने के लिए संबंधित बैंक से ऋण ले सकता है। इसमें दुकान की कीमत 35 लाख रूपये है तो वह कीमत अनुसार दस्तावेज प्रस्तुत करेगा लेकिन डीएलसी सहित दुकान की कीमत 52 लाख रूपये है तो 17 लाख रूपये कीमत का अंतर वह बैंक में प्रस्तुत नहीं करेगा। ऋण लेने के बाद संबंधित व्यक्ति बैंक में निर्धारित किश्त का भुगतान नहीं करेगा तो बैंक उसकी खरीद की गई सम्पति की कुर्की निकालेगा। ऐसे में बैंक यदि सम्पति की कुर्की कर उस सम्पति को विक्रय करेगा तो उसे 17 लाख रूपये का घाटा उठाना पड़ेगा। इससे बैंक शाखा के साथ धोखाधड़ी होने की संभावना बन जाएगी।

डीएलसी कमेटी में हुआ तय
जिला मुख्यालय पर पूर्व में डीएलसी कमेटी की बैठक कलक्टर की अध्यक्षता में हुई जिसमें विधायक धर्मेन्द्र मोची ने यहां नए मंडी यार्ड में डीएलसी दर 15 प्रतिशत कम करने की मांग रखी। जिस पर कमेटी ने कथित सहमति भी दी लेकिन कम नहीं हुई।

प्रोपर्टी डीलरों की मजदूरी पर मार
मार्केट वेल्यू से डीएलसी दरें अधिक होने के चलते लोग भूखंडो की खरीददारी में रूचि नहीं ले रहे। इससे प्रोपर्टी डीलरों की मजदूरी पर भी मार पड़ रही है। पर्याप्त सौदे नहीं होने के चलते प्रोपर्टी डीलर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। मंदी की मार भी खरीददार व बिकवाल पर पड़ रही है। मंदी की मार ऊपर से डीएलसी की दरें अधिक होना। उनके लिए कोढ में खाज का काम कर रही है।

सचिव ने भेजे थे प्रस्ताव
नए यार्ड में डीएलसी दरें कम करने को लेकर कृषि उपज मंडी समिति सचिव ने भी पूर्व में मुख्यालय को प्रस्ताव भेजे लेकिन प्रस्ताव पर अभी तक सहमति नहीं बनी। (पसं)

इनका कहना है...
मंडी में डीएलसी दरें करीब 40 प्रतिशत कम करने की आवश्यकता है ताकि खरीददार व बिकवाल को राहत मिले तथा जो भी सौदे हो उसमें राज्य सरकार को राजस्व का लाभ मिल सके।
- पवन मित्तल, सचिव, व्यापारमंडल, पीलीबंगा
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जिला कलक्टर की अध्यक्षता में हुई डीएलसी कमेटी की बैठक में पीलीबंगा स्थित नए यार्ड में डीएलसी दरें राज्य सरकार के नियमानुसार पहले से ही कम कर दी गई। फिलहाल दरें कम होने की संभावना नहीं है। आगामी बैठक में इस संबंध में कोई निर्णय लिया जा सकता है जिसके लिए अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
- बाबूलाल, तहसीलदार, पीलीबंगा (पसं)

Manoj Bureau Incharge
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