बजट के चक्कर में बिगड़ा प्लान

बजट के चक्कर में बिगड़ा प्लान
बजट के चक्कर में बिगड़ा प्लान

Purushotam Jha | Updated: 18 Sep 2019, 10:34:26 AM (IST) Hanumangarh, Hanumangarh, Rajasthan, India

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हनुमानगढ़. बजट के अभाव में मनरेगा कार्यों की प्लानिंग बिगडऩे लगी है। हालात ऐसे हैं कि श्रम और सामग्री के अनुपात में फासला लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले की स्थिति यह है कि सामग्री और श्रम का अनुपात क्रमश: १४ और ८६ प्रतिशत हो गया है।

 


-पक्के काम से परहेज, इसलिए नहीं सुधर रहा गांवों का स्वरूप
-मनरेगा में श्रम और सामग्री का अनुपात बिगडऩे से पक्के काम नहीं हो रहे स्वीकृत

हनुमानगढ़. बजट के अभाव में मनरेगा कार्यों की प्लानिंग बिगडऩे लगी है। हालात ऐसे हैं कि श्रम और सामग्री के अनुपात में फासला लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले की स्थिति यह है कि सामग्री और श्रम का अनुपात क्रमश: १४ और ८६ प्रतिशत हो गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में पक्के काम कितने हो रहे हैं। श्रम मद में अधिक भुगतान होने के कारण कच्चे काम ही ज्यादातर स्वीकृत किए जा रहे हैं। इसके कारण गांवों का स्वरूप भी निखर नहीं पा रहा है।
सामग्री मद के बजट पर कैंची चलाने से मनरेगा का वर्क प्लानिंग पूरी तरह से अस्तव्यस्त हो रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो सामग्री मद में चालू वर्ष २०१९-२० में साढ़े तीन करोड़ रुपए का बकाया चल रहा है। इसी तरह २०१८-१९ व इससे पहले के वर्षों के साढ़े नौ करोड़ रुपए बकाया चल रहे हैं। इसके भुगतान में सरकार स्तर पर काफी सुस्ती बरती जा रही है। इसके कारण तय नियमों के तहत मनरेगा के काम नहीं हो पा रहे हैं।
जिले की स्थिति यह है कि जेटीए व मेट आदि मिलीभगत करके ज्यादातर कच्चे काम ही स्वीकृत करवा रहे हैं। जिससे श्रम मद में अधिक से अधिक भुगतान उठाया जा सके। वहीं जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक सरकार पक्के काम करवाने के प्रति गंभीर नहीं होगी, तब तक इस योजना की सार्थकता साबित नहीं हो सकती। पहले जो पक्के काम हुए हैं, उसमें सामग्री मद के बजट का भुगतान करने के प्रति सरकार गंभीरता नहीं बरत रही है। इस स्थिति में अफसर नए पक्के कार्य करवाने से परहेज कर रहे हैं।

ऊंट के मुंह में जीरा
चालू वर्ष में जिले में मनरेगा के तहत अभी तक कुल ११०७८.४५ लाख रुपए का भुगतान किया गया है। श्रम और सामग्री मद में किए गए भुगतान पर नजर डालें तो लगता है कि सामग्री मद में किया गया भुगतान ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। वर्ष २०१९-२० में श्रम मद में जिले में ८८१६.६६ लाख रुपए का भुगतान किया गया है। जबकि सामग्री मद में महज ६३२.८३ लाख रुपए का भुगतान ही अभी तक हो सका है।

गड़बड़ी रोकने को खानाूपर्ति
जिले में कच्चे काम ज्यादा स्वीकृत होने से गड़बड़ी की आशंका भी उतनी ही अधिक रहती है। गांवों में श्रमिकों को रोजगार देने वाली टीम की श्रमिकों के साथ मिलीभगत करके मनरेगा बजट का गलत उपयोग करने की बातें अक्सर सामने आती रही हैं। शिकायत के बाद अब कुछ जगह निरीक्षण करवाकर मिलीभगत करने वाले मेट को ब्लेक लिस्ट भी किया जा रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर तो मनरेगा में गड़बड़ी तभी रुकेगी, जब कच्चे और पक्के कार्य का अनुपात सुधरेगा।

.......फैक्ट फाइल......
-मनरेगा में जिले में चालू वर्ष में कुल ११०७८.४५ लाख रुपए का भुगतान किया गया।
-जिले में कुल ०२ लाख ८२ हजार ५३३ जॉबकार्ड बने हुए हैं।
- जिले में करीब ६० हजार के करीब श्रमिकों को रोजगार दिया जा रहा है।
-जिले में सामग्री और श्रम का अनुपात क्रमश: १४ और ८६ प्रतिशत है।

.......वर्जन.......
समझ से परे है कहानी
गांवों का स्वरूप निखारने में मनरेगा के वर्क प्लान अहम साबित हो सकते हैं। गांव की सडक़ों को पक्का करने के अलावा सभी सरकारी योजनाओं में होने वाले निर्माण कार्य मनरेगा के तहत करवाने से वित्तीय प्रबंधन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा। सबसे बड़ी दिक्कत काम होने के बाद समय पर बजट भुगतान की आ रही है। मेरी ग्राम पंचायत अमरपुरा जालू का उदाहरण ही लेंगे तो करीब बीस लाख का भुगतान अटका हुआ है। ऐसे में नए वर्ष में कौन से काम स्वीकृत करवाएं, यह समझ से परे है।
-राजेंद्र मूंड, प्रवक्ता, राजस्थान सरपंच एसोसिएशन

बजट भुगतान का इंतजार
मनरेगा में गत वर्षों का काफी भुगतान बकाया पड़ा है। जिसके भुगतान का इंतजार हम कर रहे हैं। जिले में मनरेगा कार्यों में श्रम और सामग्री मद के अनुपात में काफी बड़ा अंतर आ रहा है। इसे खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। अधिक से अधिक पक्के काम स्वीकृत होने की स्थिति में ही सामग्री मद के अनुपात में बढ़ोतरी संभव है।
-मदन गोदारा, सहायक अभियंता, जिला परिषद हनुमानगढ़

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