हमारे शेयर पर पंजाब बरसों से कर रहा हुकुमत

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पौंग बांध में सर्वाधिक शेयर राजस्थान का निर्धारित है। जल समझौते के तहत इस बांध में रावी व्यास नदी से भंडारित कुल पानी में से राजस्थान को ४९ प्रतिशत पानी देने का करार है।

 

By: Purushottam Jha

Published: 01 Jul 2019, 06:31 PM IST

हमारे शेयर पर पंजाब बरसों से कर रहा हुकुमत
-जल समझौते के तहत पौंग बांध में सर्वाधिक ४९ प्रतिशत शेयर राजस्थान का निर्धारित
-बीबीएमबी में सदस्यता नहीं होने से राजस्थान के हक पर कुंडली मारे बैठा है पंजाब
हनुमानगढ़. पौंग बांध में सर्वाधिक शेयर राजस्थान का निर्धारित है। जल समझौते के तहत इस बांध में रावी व्यास नदी से भंडारित कुल पानी में से राजस्थान को ४९ प्रतिशत पानी देने का करार है। मगर विडम्बना है कि सर्वाधिक शेयर हमारे प्रदेश का निर्धारित होने के बावजूद आज तक राजस्थान को बीबीएमबी में सदस्यता नहीं दी गई है। इसके कारण हमारे शेयर पर पंजाब बरसों से हुकुमत करता चला आ रहा है। स्थिति यह है कि पौंग, भाखड़ा और रणजीत सागर बांध में राजस्थान का अनुपातिक हिस्सा निर्धारित है। इसी अनुपात में राजस्थान सरकार बीबीएमबी और पंजाब सरकार को बांधों के रख-रखाव सहित अन्य मदों में बजट आवंटित करता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन तीनों बांधों के प्रबंधन को लेकर गठित भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में राजस्थान को अभी तक सदस्यता नहीं दी गई है। केंद्र सरकार से बार-बार पत्राचार करने के बावजूद आज तक राजस्थान को बीबीएमबी में सदस्यता नहीं दी गई है। इससे पंजाब राजस्थान के हकों पर कुंडली मारे बैठा है। हालात ऐसे हैं कि नहरों की मरम्मत को लेकर राजस्थान ने गत वर्ष जो प्रोजेक्ट बनाया था, उसके तहत पंजाब भाग में भी काम होने थे। लेकिन पंजाब ने इसमें गंभीरता नहीं दिखाई। इसके चलते गत बंदी में कोई काम नहीं हो सका। राजस्थान ने पंजाब के इस लापरवाही को केंद्र के समक्ष रखा तो वहां से उसे अब फटकार मिली है। इसके तहत आगामी बंदी में सरहिंद फीडर तथा इंदिरागांधी मुख्य नहर पंजाब भाग में मरम्मत कार्य शुरू करने को लेकर अभी से टेंडर आदि की प्रक्रिया शुरू करने को लेकर केंद्र सरकार ने पंजाब के अधिकारियों को निर्देशित किया है। देखना यह है कि केंद्र सरकार की फटकार का असर पंजाब पर पड़ता है या फिर पंजाब की मनमानी पहले की तरह जारी रहती है। जल संसाधन विभाग के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बीबीएमबी में राजस्थान का प्रतिनिधित्व नहीं होने से बांधों के संचालन और पानी छोडऩे सहित अन्य अधिकार पंजाब के पास ही है। इस स्थिति में वर्तमान में पंजाब के इशारे पर ही सबकुछ हो रहा है। ऐसे में राजस्थान के अधिकारी उचित तरीके से अपनी बात भी नहीं रख पाते। बीबीएमबी में रोटेशन के हिसाब से यदि राजस्थान को सदस्यता दी जाती है तो निश्चित तौर पर प्रदेश के हकों को लेकर आवाज बुलंद होगी। जल संसाधन उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता विनोद कुमार मित्तल ने बताया कि बीबीएमबी में राजस्थान को सदस्यता देने को लेकर विभाग के शासन सचिव नवीन महाजन ने केंद्र सरकार और बीबीएमबी चैयरमेन को पत्र भेजा है। समय-समय पर राज्यपालों के होने वाले सम्मेलनों में भी राजस्थान इस मांग को उठाता रहा है। लेकिन अभी तक किसी स्तर पर सुनवाई नहीं होने के कारण राजस्थान अपने हक से वंचित है। इसका खामियाजा प्रदेश के दस जिलों के लोगों को उठाना पड़ रहा है।

मनमानी की हदें पार
अंतरराज्यीय जल समझौते के तहत रावी व्यास के शेयर में राजस्थान का हिस्सा ८.६ एमएफ निर्धारित किया गया था। जल समझौते के तहत यह तय किया गया था कि रावी व्यास के पानी में से राजस्थान को ८.६ एमएफ पानी मिलेगा। जिस समय समझौता हुआ, उस समय राजस्थान में नहरों को पक्का करने का कार्य चल रहा था। इसलिए नहरों की क्षमता इतनी नहीं थी कि वह इतना पानी ले सके। इसलिए समझौते के तहत यह तय किया गया कि जब तक राजस्थान की नहर पक्की नहीं हो जाती तब तक ०.६ एमएफ पानी का उपयोग पंजाब कर सकता है। कुछ वर्ष बाद नहरों को पक्का करने का कार्य जब पूरा हो गया और राजस्थान ने अपने हिस्से के ०.६ एमएफ पानी पंजाब से मांगा तो पंजाब ने देने से इनकार कर दिया। कुछ समय बाद पंजाब ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर समस्त अंतरराज्यीय जल समझौतों को निरस्त कर दिया। राजस्थान इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट गया तो कोर्ट ने पंजाब की इस हरकत को असंवैधानिक करार देकर मामले को रेफरेंस के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया। अब गेंद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पाले में है।

ंयूं समझें पानी का गणित
1981 में पांच राज्यों के बीच हुए जल समझौते के तहत राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली तथा जम्मू-कश्मीर में पेयजल तथा सिंचाई पानी उपलब्ध करवाने के लिए पांचों राज्यों के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक चंडीगढ़ में होती है। बीबीएमबी की बैठक में सभी सदस्यों की उपस्थिति में डैम के जल स्तर के अनुपात में राज्यों को पानी वितरित किया जाता है। 21 मई से 21 सितंबर तथा फिलिंग अवधि तथा 21 सितंबर से 20 मई तक डिप्लिशन अवधि के हिसाब से विभिन्न राज्यों को वितरित होने वाले पानी के हिस्से का निर्धारण होता है। पौंग बांध में रावी व्यास का पानी आता है। जबकि भाखड़ा में सतलुज का पानी आता है। इन नदियों से भंडारित पानी का कॉमन पूल बनाकर विभिन्न प्रदेशों का शेयर निर्धारित किया जाता है।

.......फैक्ट फाइल.........
-जल समझौते के तहत इस बांध में रावी व्यास नदी से भंडारित कुल पानी में से राजस्थान को ४९ प्रतिशत पानी देने का करार है।
-राजस्थान क्षेत्र में इंदिरागांधी नहर की लंबाई ४४५ किमी है।
-इंदिरागंाधी नहर से प्रदेश के १० जिलों को जलापूर्ति हो रही है।
-बीबीएमबी में सदस्यता को लेकर राजस्थान सरकार करीब ०३ दशक से प्रयासरत है।

Purushottam Jha Reporting
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