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सरकार का मन देखा, अब बाजार का मन टटोल रहे धरतीपुत्र

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हनुमानगढ़. गेहूं खरीद के शुरुआती दिनों में ही बाजार भाव ऊंचे जाने की वजह से इस बार खरीद का सारा गणित ऊपर-नीचे हो गया है। स्थिति यह है कि सरकार ने किसानों को राहत देते हुए सरकारी खरीद की सीमा दस जून से बढ़ाकर तीस जून कर दी है। इसके बाद एफसीआई अधिकारी भी मंडियों में खरीद के लिए उतरने को तैयार हो रहे हैं।

 

हनुमानगढ़

Updated: June 20, 2022 12:21:59 pm

सरकार का मन देखा, अब बाजार का मन टटोल रहे धरतीपुत्र
-गेहूं के भाव ऊंचे-नीचे होने के क्रम में अबकी बार मंडी में आवक घटी
-फसल बेचने को अच्छे दिनों का इंतजार कर रहे किसान

हनुमानगढ़. गेहूं खरीद के शुरुआती दिनों में ही बाजार भाव ऊंचे जाने की वजह से इस बार खरीद का सारा गणित ऊपर-नीचे हो गया है। स्थिति यह है कि सरकार ने किसानों को राहत देते हुए सरकारी खरीद की सीमा दस जून से बढ़ाकर तीस जून कर दी है। इसके बाद एफसीआई अधिकारी भी मंडियों में खरीद के लिए उतरने को तैयार हो रहे हैं। मगर किसान भविष्य में भाव ऊंचे जाने की उम्मीद में न्यूनतम समर्थन मूल्य २०१५ रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से एफसीआई को फसल देने से बच रहे हैं। इस वजह से चालू सीजन में अभी तीस प्रतिशत जिंस मंडियों में आना बाकी है। कम आवक की वजह से बीते दो वर्षों की बात करें तो १५ जून तक सबसे कम टैक्स मंडी समिति को गेहूं पेटे अभी तक प्राप्त हुआ है। इस स्थिति में मंडी समिति के अधिकारी भी गेहूं की आवक बढऩे के इंतजार में हैं। जिले की मंडियों में चालू वर्ष में मंडी टैक्स वसूली में तीस प्रतिशत तक गिरावट आने की सूचना है। वहीं सरकारी खरीद की बात करें तो इस बार नामात्र हो पाई है। इस तरह सरकार का मन टटोलने के बाद फिलहाल जिले के किसान अब बाजार का मन टटोलने में लगे हैं। बाजार का मिजाज जिस तरह से रहेगा, किसान फसल भी उसी गति से बाजार में लेकर आएंगे। वर्ष २०१९-२० की बात करें तो हनुमानगढ़ खंड की मंडियों में ५६६८८४.८० एमटी गेहूं की आवक हुई थी।
इसी तरह वर्ष २०२०-२१ में ६६५५३१.१५ एमटी, वर्ष २०२१-२२ में ७२५१४५.०० एमटी गेहूं की आवक हुई। जबकि चालू वर्ष २०२२-२३ में २७७९२४.६५ एमटी गेहूं की आवक ही अभी तक जिले की मंडियों में हो पाई है। इस दौरान अब सीजन खत्म होने को जा रहा है। गत बरसों के मुकाबले आधा गेहूं भी अभी तक मंडियों में नहीं पहुंचने से मंडी टैक्स का नुकसान भी मंडी समिति को रहा है। मंडी समिति हनुमानगढ़ के सचिव सीएल वर्मा के अनुसार गेहूं फसल के पकाव के समय मौसम ने साथ नहीं दिया। इससे उत्पादन में गिरावट आई है। इसके अलावा कुछ किसान अभी भाव बढऩे के इंतजार में फसल बाहर नहीं निकाल रहे। परंतु जल्द मौसम ठीक होने पर मंडियों में आवक बढऩे के आसार हैं। क्योंकि सरकारी खरीद करने को लेकर भी अधिकारी मंडी में उतर रहे हैं।
सरकार का मन देखा, अब बाजार का मन टटोल रहे धरतीपुत्र
सरकार का मन देखा, अब बाजार का मन टटोल रहे धरतीपुत्र
मौसम ने नहीं दिया साथ
इस बार जिले में गेहूं के पकाव के वक्त तापमान में अचानक बढ़ोतरी होने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। मगर बाजार भाव ऊंचे रहने से किसानों को काफी मदद मिली। परंतु अब केंद्र सरकार स्तर पर निर्यात पर रोक लगाने से फिर से इसके भाव नीचे जा रहे हैं। ऐसे में किसान अब फिर सरकार की अगली नीति की तरफ नजरें लगाए बैठे हैं। अब तक की बात करें तो कनक की चमक फीकी ही रही है।
कई मंडियों में एक दाना भी नहीं आया
जिले की कुछ मंडियों में अभी तक गेहूं का एक दाना भी बिकने को नहीं आया है। जबकि यहां पर सरकार ने खरीद केंद्र स्वीकृत किया हुआ है। इसमें पक्कासारणा, तलवाड़ा झील, लखासर, पल्लू, भादरा, चक जहाना, अमरपुरा राठान आदि खरीद केंद्रों पर गेहूं की आवक नहीं हुई है। जिले की तलवाड़ा मंडी कभी गेहूं से अटी पड़ी होती थी। लेकिन इस बार इस मंडी में गेहूं की आवक शून्य रही है। क्योंकि कुछ किसानों ने सीधे व्यापारियों को फसल बेच दी तो कुछ ने पड़ौसी मंडियों में जाकर फसल दे दी। जानकारों का कहना है कि कुछ किसानों ने भाव बढऩे की उम्मीद में अभी गेहूं बाहर नहीं निकाला है।
इस तरह ऊंचे-नीचे जा रहे रेट
जिले की मंडियों में इस रबी सीजन में गेहूं के शुरुआती भाव २३०० रुपए प्रति क्विंटल तक रहे हैं। वहीं सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य २०१५ रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया हुआ है। बीते माहों में विदेशों में गेहूं की मांग बढऩे की वजह से किसानों को अच्छे रेट मिल गए। लेकिन अब सरकार स्तर पर निर्यात पर रोक लगाने की वजह से रेट नीचे की तरफ जा रहे हैं। इस स्थिति में सरकारी खरीद की मियाद भी बढ़ा दी गई है।
....फैक्ट फाइल.....
-वर्ष २०२१-२२ में ७२५१४५.०० एमटी गेहूं की आवक हुई। चालू वर्ष २०२२-२३ में २७७९२४.६५ एमटी गेहूं की आवक ही जिले की मंडियों में हो पाई है।
-जिले की मंडियों में इस समय करीब २० से ३० प्रतिशक गेहूं की आवक शेष है। इसकी खरीद होनी बाकी है।
-बीते बरसों में दोनों जिलों में गेहूं की सरकारी खरीद से २५०० से ३००० करोड़ रुपए किसानों को मिलते रहे हैं।
-जिले की मंडियों में चालू सीजन में पूर्व में गेहूं २३०० रुपए तक बिका है। जबकि इसका समर्थन मूल्य २०१५ रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है।

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