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जिला अस्पताल प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सकों पर निर्भर

जिला अस्पताल प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सकों पर निर्भर
- सरकार चाहे तो विशेष आर्डर से जिला अस्पताल में लगा सकती है एमएस गायनी
- व्यवस्था सुचारू रखने के लिए प्राइवेट अस्पताल की एमएस गायनी से ले रहे सेवाएं।
हनुमानगढ़. राज्य सरकार की अनदेखी के कारण टाउन का जिला अस्पताल इन दिनों प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सकों पर निर्भर है।

हनुमानगढ़

Published: April 18, 2022 10:00:19 pm


जिला अस्पताल प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सकों पर निर्भर
- सरकार चाहे तो विशेष आर्डर से जिला अस्पताल में लगा सकती है एमएस गायनी
- व्यवस्था सुचारू रखने के लिए प्राइवेट अस्पताल की एमएस गायनी से ले रहे सेवाएं।
हनुमानगढ़. राज्य सरकार की अनदेखी के कारण टाउन का जिला अस्पताल इन दिनों प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सकों पर निर्भर है। दरअसल जिला अस्पताल में एक ही एमएस गायनी होने की वजह से आउट सोर्स के जरिए प्राइवेट अस्पतालों के एमएस गायनी बुलाकर सेवाएं ली जा रही हैं। जबकि राज्य सरकार विशेष आर्डर के तहत जिला अस्पताल में एमएस गायनी लगा सकती है। हैरत की बात है कि एक तरह राज्य सरकार चिरंजीवी योजना में 10 लाख रुपए तक का निशुल्क इलाज करने की योजना शुरू कर अपनी पीठ थपथपा रही है। उसी का चिकित्सा विभाग जिला अस्पताल में एमएस गायनी तक नहीं लगा पा रहा है। जिला अस्पताल में सुचारू रूप से एमएस गायनी की सेवाएं मिलने पर ही व्यवस्था को बेहतर किया जा सकता है और राज्य सरकार के लक्ष्य के अनुरूप सजेरियन व साधारण प्रसव किए जा सकते हैं। लेकिन चिकित्सकों के अभाव के कारण इन लक्ष्य तक पहुंचना भी मुश्किल है। उधर, जिला अस्पताल में हाल ही में तीन एमएस गायनी छोड़कर जा चुकी है यानि सरकारी नौकरी बीच में छोड़कर प्राइवेट अस्पताल में जुड़ चुकी हैं। जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से इन चिकित्सकों को नोटिस भी जारी किया जा चुका है। लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने के कारण ज्वाइंट डायरेक्टर को अवगत करवाया गया।
जिला अस्पताल प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सकों पर निर्भर
जिला अस्पताल प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सकों पर निर्भर
एक अप्रेल से यह की व्यवस्था
जिला अस्पताल में एक ही एमएस गायनी के रहने से व्यवस्था नहीं बिगड़े, इसके लिए प्राइवेट अस्पताल की तीन एमएस गायनी का एक पैनल बनाया गया है। सरकारी अस्पताल में एक मात्र सेवाएं दे रही एमएस गायनी के छुट्टी पर जाने या फिर डेऑफ के दिन अस्पताल प्रशासन पैनल में शामिल तीन चिकित्सकों में एक को बुलाया जा रहा है। पैनल में सेवानिवृत एमएस गायनी डॉ. ओला, डॉ. सीमा खीचड़ व डॉ. प्रेरणा राठौड़ को शामिल किया गया है। इनकी सेवाएं के बदले जिला अस्पताल प्रशासन प्रति सर्जरी तीन हजार रुपए शुल्क देगा। गौरतलब है कि 2020 में भी जिला अस्पताल प्रशासन ने आउट सोर्स के जरिए यह व्यवस्था की थी। लेकिन ज्यादा दिन तक चल नहीं पाई थी। इन आउट सोर्सेज के पैनल में शामिल चिकित्सकों का भुगतान भी अटक गया था। जिला अस्पताल में तीन माह में तीन एमएस गायनी सरकारी सेवाएं छोड़कर जा चुकी है। दो एसएस गायनी पूर्व में अपनी सेवाएं छोड़कर गई थी तो हाल ही में एक एमएस गायनी जिला अस्पताल छोड़कर चली गई हैं।
अनुबंध पर नहीं हुई व्यवस्था
गत माह में जिला अस्पताल प्रशासन ने सीएमएचओ को पत्र लिखकर अनुबंध पर एमएस गायनी लगाने की मांग की थी। 2020 में जिला अस्पताल की एमसीएच यूनिट में एक भी एमएस गायनी नहीं होने के कारण करीब 46 दिन तक ताला लटका रहा था। एमएस गायनी नहीं होने के कारण परिजन साधारण प्रसव करवाने के लिए भी गर्भवती को जिला अस्पताल में लाने से कतराते थे। गर्भवती की तबीयत खराब होने पर सर्जरी की आवश्यकता होती है।
125 से अधिक होती है सर्जरी
एमसीएच यूनिट में एक माह में 125 से अधिक सर्जरी होती है। कई बार यह आंकड़ा 150 से अधिक भी पहुंच जाता है। हालांकि मार्च में केवल 77 सजेरियन ही हुए।
वहीं 400 से अधिक साधारण प्रसव होते हैं। वर्तमान में जिला अस्पताल में सात एनस्थेसिया चिकित्सक है और छह पीडियाट्रिशन हैं। चार एमएस गायनी में एक ही रह गई हैं। नियमों के अनुसार सौ बेड के एमसीएच यूनिट के लिए चार एमएस गायनी होना आवश्यक है।
प्रसव की संख्या हो रही कम
जिला अस्पताल को लेबर रूम व जेएसएसवाई वार्ड में बेहतर व्यवस्था होने पर राज्य स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन अब एक ही एमएस गायनी होने के कारण प्रसव की संख्या में भी कमी आ रही है। आउट सोर्स के जरिए एमएस गायनी सर्जरी के लिए जिला अस्पताल तो आएंगी। लेकिन वार्ड में भर्ती प्रसूता के सार संभाल के लिए बार-बार आना मुश्किल है।

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