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किसानों के काम ना कलक्टरी आई और ना ही मंत्राई

अदरीस खान @ हनुमानगढ़. खेतों में महीनों की मेहनत धरतीपुत्रों के सामने खाक हो रही है। लेकिन जलती फसल पर राहत की फुहारें बरसा कर किसानों का दर्द कम करने का सामान सरकार मुहैया कराने में अब तक फेल रही है। किसानों को सुविधाएं मुहैया कराने के नाम पर सरकारें अपने गाल खुद बजाती रहती हैं। मगर जमीनी हकीकत अलग होती है। टिब्बी में बरसों की मांग के बावजूद दमकल उपलब्ध नहीं करवाना नाकारापन का सुबूत है।

हनुमानगढ़

Updated: April 04, 2022 10:38:46 am

किसानों के काम ना कलक्टरी आई और ना ही मंत्राई
- दमकल की घोषणा कर भूले मंत्री, कलक्टर का आदेश भी नहीं चला
- दमकल के अभाव में फसलें हो रही खाक
- पिछले कुछ साल में सबसे भयंकर आगजनी की घटनाओं के बावजूद टिब्बी क्षेत्र के लिए स्थाई दमकल गाड़ी नहीं उपलब्ध
अदरीस खान @ हनुमानगढ़. जब खेत में खड़ी पकी-पकाई फसल आग में जल जाती है तो उसके साथ किसानों के सपने भी स्वाह हो जाते हैं। ऐसा हर साल यहां होता है। इसे कुदरत की मार समझकर किसान पीड़ा झेल जाते हैं। मगर आग लगने के बाद उसे समय रहते दमकल की गाड़ी के अभाव में नहीं बुझा पाने का दर्द किसान भुलाए नहीं भूलता। हर साल आग लगने की दर्जनों घटनाएं होने के बावजूद टिब्बी उपखंड मुख्यालय को आज भी दमकल की गाड़ी नसीब नहीं हो सकी है।
रोचक बात यह कि किसानों के काम इस मामले में ना तो मंत्रीजी की मंत्राई आई और ना ही कलक्टर की पावर। इसके लिए मंत्री व कलक्टर ने वादे तो किए। मगर पूरे नहीं हो सके। सरकार चाहे किसी की रही हो, टिब्बी इलाका सदा ही दमकल की गाडिय़ों के सरकार का मुंह ताकता रहा है। टिब्बी में खानापूर्ति के लिए केवल सीजन में कुछ समय हनुमानगढ़ या संगरिया से दमकल की छोटी गाड़ी तैनात कर दी जाती है जो आग लगने पर ज्यादा कारगर साबित नहीं होती। टिब्बी में वर्ष 2015 में तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री निहालचंद ने दमकल मुहैया कराने की घोषणा की थी जो आज तक पूरी नहीं हो सकी है। इसके बाद कलक्टर ने प्रयास किए। लेकिन उनकी भी नहीं चली।
घोषणा है, घोषणा का क्या
जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 में टिब्बी के पंचायत भवन में जन सुनवाई के दौरान तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री निहालचंद मेघवाल ने दमकल के लिए 20 लाख रुपए देने की घोषणा की थी। मगर करीब सात साल बाद भी यह घोषणा सिरे नहीं चढ़ सकी है।
साहब का आदेश भी फेल
टिब्बी इलाके में फसलों में आग की घटनाओं में हो रहे नुकसान का दायरा कम करने के लिए इलाके में तत्काल दमकल की गाड़ी मुहैया कराने की मांग किसान संगठनों ने की। इस पर एक्शन लेते हुए वर्ष 2017 में तत्कालीन जिला कलक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने टिब्बी में दमकल तैनात करने का आदेश दिया था। लेकिन उनके आदेश को भी सरकारी तंत्र अमलीजामा नहीं पहना सका। नतीजन स्थाई रूप से टिब्बी को दमकल की गाड़ी नहीं मिल सकी।
खर्च की चिंता, किसानों की नहीं
मार्च 2017 में तत्कालीन जिला कलक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने नोहर नगर पालिका को आदेश दिया था कि उनके यहां नई दमकल आ चुकी है। लिहाजा, पुरानी दमकल टिब्बी तैनात कर दी जाए। बाद में बात दमकल कर्मचारी की पगार, भत्ते आदि के भुगतान पर अटक गई। नोहर नगर पालिका ने टिब्बी में तैनात कर्मचारी आदि का खर्च देने से इनकार कर दिया। इस संबंध में टिब्बी बीडीओ को पत्र भेजा। पंचायत समिति ने भी खर्च वहन करने से इनकार कर दिया। सरकारी सिस्टम खर्च की चिंता में रहा और किसानों की फिक्र भुला दी। इन सबके बीच किसानों की लाखों रुपए की फसल हर बार आग की भेंट चढ़ जाती है।
किसानों का दर्द कम करने में सब फेल
पत्रिका व्यू...
खेतों में महीनों की मेहनत धरतीपुत्रों के सामने खाक हो रही है। लेकिन जलती फसल पर राहत की फुहारें बरसा कर किसानों का दर्द कम करने का सामान सरकार मुहैया कराने में अब तक फेल रही है। किसानों को सुविधाएं मुहैया कराने के नाम पर सरकारें अपने गाल खुद बजाती रहती हैं। मगर जमीनी हकीकत अलग होती है। टिब्बी में बरसों की मांग के बावजूद दमकल उपलब्ध नहीं करवाना नाकारापन है। यह सुबूत है कि धरतीपुत्रों की समस्याओं के समाधान को सरकारी सिस्टम कितनी तवज्जो देता है। उपज पर लाभकारी मूल्य देने और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के लिए हल्ला मचाने वालों की नजर में यह शायद मुद्दा ही नहीं है। दमकल गाडिय़ों का मसला कोई लम्बा-चौड़ा नहीं है। इसके लिए कोई अरबों-करोड़ों का बजट नहीं चाहिए। इसके बावजूद बरसों से धरतीपुत्र दमकल के अभाव में ज्यादा नुकसान झेल रहे हैं। टिब्बी इलाके में हर साल दर्जन से ज्यादा खेतों में आग लगने की घटनाएं होती हैं। इसमें सैकड़ों बीघा में खड़ी फसल स्वाह हो जाती है। इसके साथ काश्तकारों के सपने भी जल जाते हैं।
किसानों के काम ना कलक्टरी आई और ना ही मंत्राई
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