मरुधरा की प्यास बुझाने को अब राज्य सरकार जाएगी सुप्रीम कोर्ट

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हनुमानगढ़. मरुधरा की प्यास बुझाने को लेकर अब राजस्थान सरकार ने संबंधित राज्यों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लडऩे का मन बनाया है। करीब डेढ़ दशक से संबंधित राज्यों व केंद्र सरकार के बीच समझाइश करने के बाद भी हक का पानी नहीं मिलने के कारण राजस्थान सरकार ने अब पंजाब सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शूट दायर करने का निर्णय किया है।

 

समझाइश के प्रयास नाकाम रहने पर सरकार ने शूट दायर करने का लिया निर्णय
हनुमानगढ़. मरुधरा की प्यास बुझाने को लेकर अब राजस्थान सरकार ने संबंधित राज्यों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लडऩे का मन बनाया है। करीब डेढ़ दशक से संबंधित राज्यों व केंद्र सरकार के बीच समझाइश करने के बाद भी हक का पानी नहीं मिलने के कारण राजस्थान सरकार ने अब पंजाब सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शूट दायर करने का निर्णय किया है। जल संसाधन विभाग उत्तर जोन हनुमानगढ़ कार्यालय को शूट दायर करने की अनुमति प्रदान करते हुए राजस्थान सरकार ने जल्द तथ्यात्मक रिपोर्ट बनाने की बात कही है।
हाल ही में राज्य सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर स्वीकृति जारी करने के बाद विभागीय अधिकारियों ने शूट दायर करने को लेकर कवायद तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार १९८१ में अंतरराज्यीय जल समझौते के तहत यह तय किया गया था कि रावी व्यास के पानी में से राजस्थान को ८.६ एमएफ पानी मिलेगा। जिस समय समझौता हुआ, उस समय राजस्थान में नहरों को पक्का करने का कार्य चल रहा था। इसलिए नहरों की क्षमता इतनी नहीं थी कि वह उस वक्त इतना पानी ले सके। इसलिए समझौते के तहत संबंधित राज्यों की सहमति से यह तय किया गया कि जब तक राजस्थान की नहर पक्की नहीं हो जाती तब तक ०.६ एमएफ पानी का उपयोग पंजाब कर सकता है।
इस दौरान कुछ वर्ष बाद राजस्थान में नहरों को पक्का करने का कार्य जब पूरा हो गया और राजस्थान ने अपने हिस्से के ०.६ एमएफ पानी पंजाब से मांगा तो पंजाब ने देने से इनकार कर दिया। इसके बाद से राजस्थान सरकार ने अपने हक के पानी को लेकर हर स्तर पर प्रयास किए। केंद्र सरकार, बीबीएमबी व विभिन्न स्तरों पर होने वाली अंतरराज्यीय बैठकों में राजस्थान अपने हिस्से के पानी को लेकर अपना पक्ष रख चुका है। लेकिन कहीं से राहत नहीं मिलने की स्थिति में अब राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शूट दायर करने का निर्णय लिया है।

भूमिका रही है संदिग्ध
राजस्थान को हिस्से का पानी दिलाने के मामले में पंजाब की भूमिका हमेशा से संदिग्ध रही है। इसलिए राजस्थान सरकार ने अब पंजाब के खिलाफ सीधे कानूनी लड़ाई लडऩे का मन बनाया है। बताया जा रहा है कि हक का पानी लेने के लिए राजस्थान सरकार जल्द सुप्रीम कोर्ट में शूट दायर करने जा रही है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में राज्य की तरफ से अधिकृत वकीलों के पैनल से चर्चा कर ली गई है।

हजारों हेक्टेयर में होगी हरियाली
ुसुप्रीम कोर्ट जाने के बाद राजस्थान सरकार यदि ०.६ एमएफ पानी की लड़ाई जीत जाती है तो इससे राजस्थान की हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी। वर्तमान में असिंचित भूमि को सिंचित करने पर राज्य सरकार ने वर्ष १९९६ से रोक लगा रखी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार राजस्थान में स्थिति यह है कि कुछ वर्ष पहले पानी की कमी चलते हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर व बीकानेर जिले के कुछ क्षेत्रों में भूमि को असिंचित से सिंचित क्षेत्र में बदलने की प्रक्रिया को अचानक रोक दिया गया था। राजस्थान में इंदिरागांधी नहर से हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, जैसलमेर सहित करीब दस जिलों को जलापूर्ति हो रही है। ऐसे में तय शेयर के अनुसार पानी मिलने पर इन जिलों को सीधे तौर पर फायदा होगा।

Purushottam Jha Reporting
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