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त्योहारी सीजन में इनकी जेब खाली, जिले में पंचायत सहायकों को पांच से आठ माह से नहीं मिल रहा भुगतान

locationहनुमानगढ़Published: Oct 13, 2019 11:47:27 am

Submitted by:

Purushottam Jha

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त्योहारी सीजन में इनकी जेब खाली, जिले में पंचायत सहायकों को पांच से आठ माह से नहीं मिल रहा भुगतानहनुमानगढ़. त्योहारी सीजन में पंचायत सहायकों की जेब पूरी तरह से खाली है। यह भी तय नहीं है कि दिवाली तक इनकी जेब भरेगी या फिर खाली ही रहेगी। जिम्मेदार अफसर इनके भुगतान को लेकर टालमटोल कर रहे हैं।
 

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त्योहारी सीजन में इनकी जेब खाली, जिले में पंचायत सहायकों को पांच से आठ माह से नहीं मिल रहा भुगतान
हनुमानगढ़. त्योहारी सीजन में पंचायत सहायकों की जेब पूरी तरह से खाली है। यह भी तय नहीं है कि दिवाली तक इनकी जेब भरेगी या फिर खाली ही रहेगी। जिम्मेदार अफसर इनके भुगतान को लेकर टालमटोल कर रहे हैं। इसके कारण पंचायत सहायकों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो रही है। जिले में कई पंचायत सहायक तो ऐसे हैं कि जिनको आठ माह से भुगतान नहीं किया गया है। इस स्थिति में उनके लिए परिवार का पेट पालना भी दुभर हो रहा है। जिला परिषद में भर्ती प्रकोष्ठ अधिकारी विनोद कुमार गोदारा ने बताया कि जिला परिषद की तरफ से सभी बीडीओ को बजट आवंटित होने तथा पंचायत सहायकों को भुगतान करने को लेकर निर्देशित कर दिया गया है। भुगतान पंचायत समिति स्तर पर होना है। इसलिए पंचायत सहायकों को वस्तुस्थिति से अवगत करवाने के लिए जिला परिषद में बुलाया गया है। प्रयास है कि जल्द इनका भुगतान हो जाए। गौरतलब है कि जिले में करीब पांच सौ पंचायत सहायक लगे हैं। एक ग्राम पंचायत में दो-दो पंचायत सहायकों की नियुक्ति की गई है। जो पंचायतों से संबंधित सभी तरह के कार्य करवाने में पंचायतों का सहयोग कर रहे हैं। लंबे समय से भुगतान अटकने के बाद कुछ पंचायत सहायक गत दिनों जिला परिषद सीईओ परशुराम धानका से भी मिले थे। सीईओ ने नियमानुसार भुगतान करवाने का आश्वासन पंचायत सहायकों को दिया था।
पर्याप्त बजट लेकिन फंसा रहे पेच
जिला परिषद सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायतों में लगे पंचायत सहायकों को मानदेय का भुगतान करने के लिए सरकार स्तर पर २०० करोड़ का बजट जारी कर दिया गया है। लेकिन पंचायत समितियों में विकास अधिकारी भुगतान में पेच फंसा रहे हैं। इसके कारण पंचायत सहायकों को आठ माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है।
उल्टी गंगा बह रही
जिले में काफी संघर्ष के बाद करीब दो वर्ष पहले ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों की नियुक्ति की गई थी। होना तो यह चाहिए था कि अब इनको स्थाई नियुक्ति देने को लेकर अफसर किसी तरह का प्रस्ताव बनाकर सरकार को मंजूरी के लिए भिजवाते। ज्यादातर पंचायत सहायक तो स्थाई नियुक्ति मिलने का ख्वाब भी देख रहे हैं। लेकिन यहां तो उल्टी गंगा बह रही है। स्थाई नियुक्ति दिलाने के प्रयास तो दूर इनका अफसरों ने वेतन ही अटका रखा है। पंचायत सहायक यूनियन के जिला उपाध्यक्ष महावीर भादू ने बताया कि भुगतान को लेकर कलक्टर से मिले थे। लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ है।
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