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हनुमानगढ़

लड़कियों से कॉलिंग करवा ब्लैकमेल करने का चल रहा था धंधा, 12 युवतियां दस्तयाब

पुलिस ने बताया कि सी ब्लॉक में संचालित कॉल सेंटर की संचालिका माया देवी ने युवतियों और नाबालिग लड़कियों को महीने के दस हजार से लेकर बीस हजार रुपए में नौकरी देने का यह तरीका अपनाया।

हनुमानगढ़Jun 15, 2024 / 02:30 pm

Akshita Deora

पुलिस ने मोबाइल पर अश्लील वीडियो कॉलिंग और वाइस कॉलिंग के माध्यम से लोगों को ब्लेकमेल करने के गिरोह का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के तहत दो फर्जी कॉल सेंटरों की संचालिका समेत चार जनों को गिरतार किया गया है, वहीं बारह लड़कियों को भी काबू किया गया है। इनमें पांच किशोरी हैं। एक सेंटर कोतवाली क्षेत्र सी ब्लॉक में ज्वैलर्स के शोरूम के चौबारे में तो दूसरा सदर थाना क्षेत्र गांव 7 एलएनपी में एक घर में संचालित हो रहा था।
कोतवाली के एएसआई कृष्ण कुमार की अगुवाई में टीम ने मकान नबर 15 सी ब्लॉक में गणेशगढिया ज्वैलर्स के ऊपर किराए की दुकान में संचालित द् सीक्रेट कैफे की संचालिका 38 वर्षीय माया यादव पत्नी विकास को काबू किया। यह महिला गांव 7 एलएनपी की मूल निवासी है। इसके कब्जे से बिना सिम वाले एन्ड्रॉयड फोन बरामद किए। कैफे के ऊपर बनी दूसरी दुकान से 28 वर्षीय गुरदाससिंह पुत्र जीतसिंह मजबी सिख को गिरतार किया। यह समेजा कोठी रायसिंहनगर क्षेत्र चक 34 पीएस का रहने वाला है। इस कॉलिंग सेंटर से छह युवतियों एवं नाबालिग बालिकाओं को काबू किया। यहां से 13 मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने संचालिका माया और गुरदास सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 370, 384, 420,120 बी, धारा 84 जेजे एक्ट और धारा 66 सी आईटी एक्ट में दर्ज किया है।
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इस तरह बनाया कमाई का धंधा

पुलिस ने बताया कि सी ब्लॉक में संचालित कॉल सेंटर की संचालिका माया देवी ने युवतियों और नाबालिग लड़कियों को महीने के दस हजार से लेकर बीस हजार रुपए में नौकरी देने का यह तरीका अपनाया। इसके लिए बकायदा इंटरव्यू से ज्वाइनिंग कराई जाती थी। इन लड़कियों को यार एप के माध्यम से जोड़ा गया। इस एप में लड़कियों की फोटो और नाम अंकित होते हैं, जिस कॉलर को लड़की से बात करनी होती है तो वह कॉल करता है। जितनी देर ज्यादा बातें होगी तो उसका बिल ज्यादा बनेगा। बीस हजार प्वाइंट पर पन्द्रह सौ रुपए एक कॉलर से वसूल किया जाता। इसके लिए लड़कियों का बैंक खाता भी खोला गया था। वीडियो कॉल के दौरान पूरी रिकॉर्डिंग करने के बाद संबंधित कॉलर को ब्लेकमेल भी किया जाता।

गांव में स्थित घर में ही बना डाला कॉल सेंटर

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पुलिस के अभियान उमंग के तहत सदर सीआई रमेश कुमार को सूचना मिली कि गांव 7 एलएनपी में संजय यादव के मकान में अवैध रूप से कॉल सेन्टर संचालित किया जा रहा है। इस पर पुलिस ने गांव 7 एलएनपी में आरोपी संजय यादव के मकान पर दबिश दी। यहां दो बालिग व दो नाबालिग लड़कियां एक एप विशेष से वीडियोकॉल से लोगों को ब्लेकमेल कर धोखाधडी से कॉइन्स के रूप में रुपए ऐंठते हुए पाई गई। पुलिस ने आरोपी 43 वर्षीय संजय पुत्र ब्रहामाराम यादव और उसकी पत्नी 35 वर्षीय अंजू को गिरतार किया। इस घर से काबू की गई चारों लड़कियों को दस्तयाब किया गया। इस कॉल सेंन्टर का संचालन करने वाले उपकरणों को भी जब्त किया। सदर पुलिस ने इस दंपती के खिलाफ आइपीसी की धारा 384, 370, 420, 120बी, धारा 84 जेजे एक्ट में मामला दर्ज किया है।

पूरी प्रक्रिया जानी फिर दी दबिश

पुलिस अधिकारियों ने दोनों कॉल सेंटरों पर नौकरी देने की आड़ में चल रहे धंधे की पूरी जानकारी जुटाई। इन सेंटर पर शहर के आसपास ग्रामीण क्षेत्र की वे लड़कियां नौकरी पर लगी हुई थी जिनके परिवारों की आर्थिक तंगी थी या अन्य जगहों पर जॉब नहीं मिल रही थी। पुलिस के अनुसार इन दोनों सेंटरों पर बारह में से पांच किशोरी थी, जिनकी आयु करीब चौदह साल या पन्द्रह साल की थी। किशोरियों को इस धंधे में शामिल करना मानव तस्करी की श्रेणी में आता है। इसके बाद पुलिस ने पूरा जाल बिछाया और दबिश दी। सी ब्लॉक के कॉल सेंटर पर मास्टर माइंड माया देवी के पास उन कई लोगों की सूची थी, जिन्होंने इस एप के माध्यम से वीडियो कॉल या वॉइस कॉल की सेवाएं ली थी। इन लोगों से उसने रुपए भी ऐंठे थे।

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