जिले के 10300 परिवार छह महीने से नहीं ले रहे राशन, फर्जी थे या बाहर चले गए, जांच होगी


- जल्द ही सूची से नाम कटेंगे, जिन गरीब परिवारों को सस्ता अनाज नहीं मिल रहा उनकी राह आसान होगी

By: gurudatt rajvaidya

Published: 27 Jul 2020, 08:03 AM IST

हरदा। जिले के करीब 10 हजार 300 परिवार छह महीने से शासकीय उचित मूल्य दुकानों से राशन नहीं ले रहे हैं। इनके नाम फर्जी तरीके से सूची में शामिल थे या यह लोग बाहर चले गए, इसकी जांच होगी। खाद्य विभाग कलेक्टर के निर्देशानुसार जल्द ही इस दिशा में कार्रवाई करेगा।
उल्लेखनीय है कि जिले की 261 दुकानों से जिले के करीब 75089 परिवारों को सस्ता अनाज मिलता है। इसमें से करीब 10300 लोग छह महीने से खाद्यान्न नहीं लेकर गए। खाद्य विभाग का अनुमान है कि यह नाम या तो फर्जी हो सकते हैं या यह परिवार जिले से बाहर चले गए। वार्डवार और पंचायतवार इनकी जांच कराने से ही स्थिति स्पष्ट होगी। छंटनी होने से उन परिवारों को फायदा मिलेगा जिन्हें पात्रता पर्ची नहीं मिलती। पुराने नाम काटकर इन परिवारों के नाम जोड़े जाने से उन्हें सस्ता अनाज मिलने लगेगा। फिलहाल ऐसे करीब 5500 परिवार बताए जा रहे हैं जिन्हें पात्रता पर्ची नहीं मिल पाती।
एक महीने ही मिला था सस्ता अनाज
पात्रता पर्ची के अभाव में जिले के जिन 5500 परिवारों को राशन नहीं मिलता उन्हें सरकार ने लॉकडाउन के दौरान अप्रैल में एक महीने अनाज दिया था। इसके बाद से इनका आबंटन नहीं आया। लिहाजा इन्हें दोबारा अनाज नहीं मिल सका।
145 अप्रवासी परिवारों को मिला राशन
कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के बाद से अन्य जिलों से अपने गृहनगर या ग्राम आए लोगों को भी सरकार की ओर से राशन दिया गया था। ऐसे 145 परिवारों को खाद्य विभाग की ओर से गेहूं व चावल दिए गए।
अब तक 80 प्रतिशत हुई आधार सीडिंग
ज्ञात हो कि खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अंतर्गत वन नेशन वन राशन कार्ड व्यवस्था प्रारंभ की गई है। इसके समुचित क्रियान्वयन के लिए लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना से लाभान्वित समस्त पात्र हितग्राहियों के डाटाबेस में आधार सीडिंग का कार्य पूर्ण किया जाना है। ऐसे हितग्राही जिनके डाटाबेस में आधार सीडिंग नहीं है, उन्हें अपने क्षेत्र की शासकीय उचित मूल्य दुकान पर विके्रता से संपर्क कर पीओएस मशीन में 31 जुलाई तक आधार नंबर की सीडिंग पूर्ण कराना है। बताया जाता है कि यह कार्य फिलहाल 80 प्रतिशत हो चुका है। आधार सीडिंग नहीं होने की स्थिति में हितग्राही को राशन न मिलने की स्थिति बन सकती है।
सालभर में 92 प्रतिशत ही हो सकी पिछली जांच
शासन ने राशन वितरण में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बीते साल अगस्त में परिवारों का सत्यापन कराने के आदेश दिए थे। जिले के करीब 75 हजार परिवारों का सत्यापन होना था। शासन की ओर से कई बार इसकी तिथि बढ़ाई गई। इसके बावजूद यह कार्य 92 प्रतिशत ही पूर्ण हो सका। बाद में लॉकडाउन लागू होने से यह पूरा नहीं हुआ। इसके तहत पता किया गया था कि जिन्हें खाद्यान्न वितरण पर्ची दी जा रही है वे पात्र हैं या नहीं। दरअसल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम २०१३ के तहत शामिल पात्र परिवारों को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बेहद कम दर (१ रुपए प्रतिकलो) पर खाद्यान्न व अन्य सामग्रियों का हर महीने वितरण होता है। इसमें केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संचित निधि से अनुदान दिया जाता है। सरकार की मंशा थी कि अनुदान का लाभ पात्र परिवारों को मिले इसके लिए यह देखना जरूरी है कि अपात्र परिवार तो इसमें शामिल नहीं हैं।
25 श्रेणी में होता है राशन वितरण
जिले में बीपीएल, अंत्योदय परिवार, अजा, अजजा, कामवाली बाई, हाथ ठेला श्रमिक, कर्मकार मंडल में पंजीकृत श्रमिक, मजदूर सुरक्षा कार्डधारी आदि 25 श्रेणी के परिवारों को हर महीने एक रुपए किलो की दर से गेहूं, चावल व नमक दिया जाता हैै। अंत्योदय परिवारों को शक्कर भी दी जाती है। साथ ही उन परिवारों को केरोसीन दिया जाता है जिनके पास गैस कनेक्शन नहीं हैं। ऐसे सभी परिवारों की संख्या जिले में करीब ७५ हजार बताई जा रही है।
सबसे ज्यादा हैं बीपीएल परिवार
खाद्यान्न वितरण पर्ची २५ श्रेणी के परिवारों को दी जाती है। इनमें जिले में सबसे ज्यादा बीपीएल परिवार हैं। इनकी संख्या करीब २५ हजार बताई जाती है। इसके बाद अजा व अजजा वर्ग के परिवार हैं। इनकी संख्या करीब 11 हजार बताई जा रही है। इसके अलावा मजदूर सुरक्षा कार्डधारी 5 हजार परिवारों को भी इसका लाभ मिलता है।
इनका कहना है
जिले में करीब 10300 परिवार ऐसे हैं जिन्होंने छह महीने से राशन नहीं लिया है। ऐसे परिवारों की जांच कर नाम काटे जाएंगे। इससे उन लोगों को फायदा मिलेगा जिन्हें पात्र होते हुए भी सस्ता अनाज नहीं मिलता। पिछली जांच का कार्य भी 92 प्रतिशत हो चुका है। यह भी जल्द पूर्ण होगी।
- केएस पेन्ड्रो, जिला आपूर्ति अधिकारी, हरदा

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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