पागल समझ पत्थर मार रहे थे लोग, फिर कारीगर ने किया यह अनूठा काम

पागल समझ पत्थर मार रहे थे लोग

By: बृजेश चौकसे

Published: 04 Apr 2019, 10:19 AM IST

टिमरनी
रेलवे स्टेशन के आसपास घूम रहा वह आदमी फटेहाल था। बच्चे पागल-पागल कहकर उसे पत्थर मार रहे थे। वहीं से गुजर रहे शहर के शैलेंद्र गौर से यह दृश्य देखा नहीं गया। वे तुरंत उस व्यक्ति के पास गए, उससे बातचीत की, भोजन करवाया और बाद में उसे सुरक्षित उसके घर बिहार छोडकऱ भी आए। पेशे से कारीगर शैलेंद्र गौर की मानवीयता की अब मिसाल प्रस्तुत की जा रही है।

आज के समय में जब कोई अपने परिवार के बारे में नहीं सोचता तो गैरों के लिए हमदर्दी तो दूर की बात है। ऐसे ही समय में शैलेंंद्र गौर जैसे लोगों की अहमियत भी बढ़ गई है जिनके लिए मानवता ही सबसे पहला और बड़ा धर्म है। टिमरनी के वार्ड नंबर 7 में रहने वाले शैलेन्द्र सिंह गौर ने एक मानसिक दिव्यांग व्यक्ति की भरपूर मदद की। मानसिक रूप से कमजोर यह व्यक्ति बिहार के गोरखपुर से भटकते-भटकते हरदा रेलवे स्टेशन पर आ पहुंचा था। उसके फटे-पुराने कपड़े और हुलिया देखकर हर कोई उसका मज़ाक उड़ा रहा था। ऐसे में किसी काम से हरदा आए शैलेन्द्र के मन में उस व्यक्ति के लिए संवेदनाएं जाग उठीं। वे उसे अपने साथ टिमरनी ले आए। रात में उसे सुरक्षित स्थान पर रुकवाकर खाना खिलाया और सुला दिया। अगले दिन सुबह शैलेन्द्र उस व्यक्ति को थाने में लेकर गए जहां पर उप निरीक्षक संदीप पवार को घटनाक्रम बताया। यहां जब उस व्यक्ति की बारीकी से तलाशी ली गई तो उसकी कमर में बंधी हुई एक डायरी मिली जिसमें कुछ मोबाइल नंबर लिखे हुए थे। इन नंबरों पर संपर्क करके उसके भाई से बात की गई।

भाई से बात हुई तो व्हाट्सएप द्वारा फोटो भेज कर यह सुनिश्चित किया गया कि यह व्यक्ति ही उनका भाई है। फोन पर ही अपने बिछुड़े भाई की जानकारी मिलने पर उसका भाई रोने लगा था लेकिन इतनी दूर आने में वह असमर्थ था । इसपर उप निरीक्षक संदीप पवार ने पैसों की व्यवस्था की और शैलेंद्र ने स्वयं ट्रेन से उस व्यक्ति को गोरखपुर ले जाकर उसे घर तक सुरक्षित छोडकऱ आया।

 

बृजेश चौकसे
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