पयुर्षण पर्व के समापन पर एक दूसरे से की क्षमायाचना

दिगंबर जैन समाज के पयुर्षण पर्व हुए प्रारंभ

By: gurudatt rajvaidya

Published: 24 Aug 2020, 08:03 AM IST

खिरकिया. श्री जैन श्वेताम्बर समाज के पयुर्षण पर्व के समापन पर समाजजनों द्वारा एक दूसरे, स्नेहीजन, परिजन व रिश्तेदारों से खमत खामणा (क्षमापना) की गई। विगत वर्ष जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की। भगवान से क्षमापना के बाद प्रभु महावीर के संदेश क्षमा वीरस्य भूषणम का पालना करते हुए मन वचन काया से मिच्छामि दुक्कड़म के भाव से खमत खामणा की गई। क्षमापना पर बड़े छोटे का भेद नहीं रखते हुए पिता ने बेटे से तो सास ने बहु से क्षमापना करने से परहेज नहीं किया। कोरोना संक्रमण के चलते यह कार्यक्रम सामूहिक रूप से नहीं हो सका। ऐसे में समाजनों ने एक दूसरे से सोशल डिस्टेंसिंग बनाते हुए क्षमा याचना की, तो कुछ ने मोबाइल के माध्यम से ही संपर्क कर क्षमायाचना की।
क्षमा का महत्व बताते हुए जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ के अध्यक्ष चंपालाल भंडारी एवं नवयुवक मंडल के अध्यक्ष विक्रम नागड़ा ने कहा कि क्षमा महज दो शब्द नहीं, बल्कि जीवन की समस्याओं का शाश्वत समाधान हैं। ये शब्द वेद है, पुराण और तीर्थंकर अवतारों, साधु और संतों की पहचान हैं। क्षमा वीरो का भूषण है। इसके विपरीत क्रोध जीवन का दूषण हैं, मन का प्रदूषण हैं। जिसमें क्षमा भाव हैं वही संपन्न हैं, शेष तो विपन्न है। क्षमा जीवन का शृंगार और सुख शांति का आधार है। इससे बढ़कर इस संसार में कोई नहीं है। पयुर्षण पर्व के दौरान प्रतिदिन जैन श्वेताम्बर मंदिर में भगवान नमिनाथ की अलग अलग अंगी (शृंगार) की गई।
दिगंबर जैन समाज के पयुर्षण पर्व हुए प्रारंभ, दस दिन होंगी धर्म अराधना
दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण महापर्व रविवार से शुरू हो गए हैं। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पंचमी से चतुर्दशी (अनंत चतुर्दशी) तक 10 दिन दशलक्षण महापर्व चलेंगे। पर्व के पहले दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम क्षमा धर्म की पूजा की। कोरोना के चलते इस बार सामूहिक आयोजन नहीं किया जा रहा है। मंदिर में सीमित समय के लिए ही श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान व व्रत घर पर ही रहकर करने को कहा गया है। महापर्व में दिगंबर जैन धर्मावलंबी दस दिन तक उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम अकिचन्य, उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का पूजन आत्म शुद्धि की भावना के साथ करेंगे। यह पर्व समाज को 'जियो और जीने दो' का संदेश देता है। भगवान महावीर के मूल सिद्धांत अहिसा परमो धर्म, जियो और जीने दो की राह पर चलना सिखाता है तथा मोक्ष प्राप्ति के द्वार खोलता है। समाज के शैलेश जैन ने बताया कि रविवार को शांतिधारा करने का सौभाग्य आशीष पिंकू जैन को मिला। अभिषेक जिम्मी जैन ने बताया कि रविवार को पर्व का पहला दिन श्रद्धालुओं ने घरों में रहकर उत्तम क्षमा के रूप में मनाया है। उत्तम क्षमा धर्म में हम उनसे क्षमा मांगते हैं, जिनके साथ हमारे मतभेद हों और उन्हें क्षमा करते हैं, जिन्होंने हमारे साथ गलत व्यवहार किया हो। उन्होंने बताया कि इस बार मंदिर में कोई भी सामूहिक, धार्मिक कार्यक्रम नहीं रखा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील है कि कोरोना से बचाव के लिए घरों में रहकर ही पूजा पाठ करें। इस दौरान मंदिर खुला रहेगा। सीमित समय के लिए ही श्रद्धालुओं को आने की अनुमति है। मंदिर में मास्क पहनकर ही आएं।

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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