बारिश से 44 एकड़ रकबे में फैला अटल तालाब हुआ लबालब, अब सौंदर्यीकरण की दरकार

नपं को हुआ हस्तांतरण फिर भी जर्जर पाल की नहीं की जा रही मरम्मत
सौदर्यीकरण के लिए परिषद में प्रस्ताव पारित होने के बाद भी नहीं दिया जा रहा ध्यान

By: gurudatt rajvaidya

Published: 07 Sep 2020, 08:01 AM IST

खिरकिया. हाल ही में हुई बारिश से चारूवा मार्ग स्थित अटल तालाब करीब 44 एकड़ में फैला अटल तालाब लबालब हो चुका है। ऐसे में तालाब के रखरखाव और सौंदर्यीकरण पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। तालाब के हस्तांतरण को लेकर भी मामला सुलझ चुका है। तालाब पर नगर परिषद का आधिपत्य दिया जा चुका है। नगर परिषद द्वारा भी पूर्व में कई बार तालाब के सौंदर्यीकरण को लेकर प्रस्ताव लिया जा चुका है। लेकिन वह प्रस्ताव तक ही सीमित होकर रह गया है। वर्तमान में नपं परिषद विहीन है। नपं का दायित्व प्रशासक एसडीएम के पास है। ऐसे में शासकीय प्रक्रियाओं और गतिविधियों को आगे बढ़ाकर सौंदर्यीकरण पर ध्यान दिया जा सकता है। लेकिन तालाब का सौंदर्यीकरण एवं विकास केवल फाइलो में ही अटककर रहा गया है। पूर्व में नगर परिषद द्वारा आधिपत्य के अभाव में सौंदर्यीकरण नहीं किए जाने की बात कही जाती थी, लेकिन अब इसका आधिपत्य नपं को दिया जा चुका है। यदि परिषद तालाब को सौंदर्यीकरण करती है, तो नगर को बड़ी सौगात मिल सकती है।
जर्जर व अव्यवस्थित हो रही तालाब की पाल-
वर्तमान में तालाब पानी से अधिकांश भर चुका है। कई लाख गैलन क्षमता वाले इस तालाब को नगर का प्रमुख जल संग्रहण माना जाता है, लेकिन इसमें जल का भराव पूरे वर्ष भर नहीं रह पाता है। इसका प्रमुख कारण तालाब की पाल व्यस्थित नहीं होना है। कई स्थानों पर पाल जर्जर हो रही है। जहां से धीरे धीरे पानी का रिसाव होता रहता है। इसके अलावा पाल की उपरी सतह समतल नहीं है। तालाब की पाल के किनारे खरपतवार, घास उग रही है। इसकी भी साफ सफाई नहीं कराई जा रही है। तालाब की पाल से चारूवा मुख्य मार्ग लगा है। जहां से गुजरने वाले राहगीर पेड़ों के नीचे कुछ देर विश्राम रहते है, लेकिन वर्तमान में खरपतवार के चलते जीव जंतुओं के भय से नहीं रूकते है। नगर परिषद को पाल व्यवस्थित करना चाहिए। साथ ही साफ सफाई का ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे तालाब का सौंदर्य बढ़ सके।
एक वर्ष पूर्व नपं को हस्तांतरित हो चुका है तालाब-
नगर परिषद द्वारा लंबे समय से तालाब का आधिपत्य दिए जाने की मांग की की जा रही थी। इसके बाद जून 2019 में हस्तांतरण की प्रक्रिया पूर्ण कर नगर परिषद को तालाब का आधिपत्य दिए जाने के आदेश जारी किए गए थे। इससे पहले भी तालाब की देखरेख और रखरखाव की व्यवस्था अनौपचारिक तौर पर नगर परिषद द्वारा ही जा रही थी, लेकिन कागजी तौर पर हस्तांतरण नहीं होने से तालाब को विकसित नहीं कर पा रहे थे। जनपद पंचायत द्वारा हस्तांतरण की स्वीकृति दिए जाने के बाद राजस्व विभाग के माध्यम से तालाब का आधिपत्य नपं को दे दिया गया। इसके बाद से अब तक एक वर्ष से अधिक समय बीतने को है, लेकिन नगर परिषद द्वारा तालाब की सुध नहीं ली जा रही है। पूर्व में लिए गए प्रस्तावों पर भी तालाब के सौंदर्यीकरण को संज्ञान में नहीं लिया जा रहा है।
सौंदर्यीकरण हो तो मिल सकता है अच्छा पिकनिक स्पॉट
तालाब का सौंदर्यीकरण किया जाता है, तो नागरिकों को एक अच्छा पिकनिक स्पॉट मिल सकता है। पार्क की कमी को भी दूर किया जा सकता है। तालाब पर प्राचीन चांद शाह वली बाबा की मजार भी है। इसका भी जीर्णोद्धार किया गया है। ऐसे में तालाब विकसित होता तो तालाब पर पहुंचने वाले नागरिकों की संख्या भी बढ़ेगी। नगर परिषद को मत्स्य पालन एवं वोटिंग व्यवस्था से आय प्राप्त होगी। व्यायाम, भ्रमण, टहलने के लिए एक व्यवस्थित स्थान मिलेगा। इसके अलावा तालाब की पालोंं का सीमेंटीकरण कराकर कुर्सी, लाइटिंग, रैलिंग सहित अन्य व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है।
इनका कहना
तालाब के सौंदर्यीकरण को लेकर पूर्व में प्रस्ताव लिए गए है। बेहतर सौंदर्यीकरण के लिए विकल्प खोजे जाएंगे।
एआर सांवरे, सीएमओ, नपं खिरकिया

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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