भोलेनाथ ने आक्रोश में त्रिशूल से किया वार, ड्रेगन करने लगा चित्कार

चित्रकार सुभाष ने चित्रकारी से दिया संदेश

शास्त्र से मान जाओ चीन, नहीं तो शस्त्र चलाने में नहीं हिचकेंगे

By: gurudatt rajvaidya

Published: 20 Jul 2020, 08:03 AM IST

खिरकिया. भारत की यह परंपरा रही है कि वह किसी भी दुश्मन पर पहला वार नहीं करता। वह पहले शास्त्र (संवाद) के जरिए विवाद या समस्या का हल चाहता है। लेकिन यदि दुश्मन इसे हमारी कमजोरी समझे तो उसे सबक सिखाना भी जानता है। भारत का इतिहास बताता है कि जब-जब भी अधर्म ने सिर उठाया ईश्वर ने अवतार लेकर उसे परास्त किया है। ताजा उदाहरण एलएसी (भारत-चीन सीमा) पर सबने देखा है। नगर के चित्रकार सुभाष गढ़वाल भी इस मुद्दे को लेकर उद्वेलित हैं। डेढ़ माह में पांच तस्वीर बनाकर अपनी भावनाएं व अक्रोश व्यक्त कर चुके हैं। श्रावण में उन्होंने भोलेनाथ को आक्रोशित मुद्रा में पेश कर ड्रेगन पर त्रिशूल से वार करते दिखाया है। इस वार से चित्कार की मुद्रा में ड्रेगन की जीभ निकल आई है।
चित्र में रामायण, महाभारत, भगवत गीता व शिवपुराण जैसे शास्त्र रख उन्होंने दो संदेश देने का प्रयास किया है। गढ़वाल ने चित्र से चीन को चेतावनी देते हुए बताया है कि भारत का हजारों साल पुराना इतिहास इस बात का गवाह है। यहां जब-जब भी अधर्म ने पैर पसारे है, उसका नाश हुआ है। महाभारत में कौरवों व रामायण में असुरों का अंत किया गया है। उन्होंने चित्र में चीन के वुहान शहर से दुनिया में फैले कोरोना वायरस, उससे हुई लाखों लोगों की मृत्यु, एलएसी पर चीन के पैर थमने आदि को भी दर्शाया है। चित्र में सबसे ऊपर कोरोना के प्रकोप को योग से दूर करने का संदेश भी दिया गया है। योग से शारीरिक क्षमता बढ़ती है इससे कोरोना के प्रभाव या आक्रमण से लड़ा जा सकता है।

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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