मंडी में हो रही मंूग की बंपर आवक, विगत चार वर्षों का रिकार्ड तोड़ा

सोयाबीन व गेहूं के बाद अब मूंग से मिल रही मंडी को पहचान

By: gurudatt rajvaidya

Published: 10 May 2020, 08:03 AM IST

खिरकिया. खरीफ एवं रबी की फसल की पैदावार करने वाले किसानों को अब ग्रीष्मकालीन फसल के उत्पादन में भी सफलता मिल रही है। यही कारण है कि कृषि उपज मंडी में मूंग की बंपर आवक हो रही है। प्राकृतिक आपदा एवं बारिश की कमी के कारण विगत वर्षों में मूंग की पैदावार में गिरावट भी आई थी, लेकिन इस वर्ष मूंग किसानों को मालामाल कर रही है। मूंग की आवक एवं भावों ने पिछले कई सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है। अतिवृष्टि से इस वर्ष किसानों को खरीफ फसलों में काफी नुकसान झेलना पड़ा। इसके बाद गेहूं, चना एवं मूंग की फसलों से किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरी है।
मूंग दे रही मंडी को अलग पहचान-
पूर्व में सोयाबीन एवं गेहूं की पैदावार एवं भाव में प्रदेश की श्रेष्ठ मंडियों में खिरकिया मंडी पहचाने जाने लगी है। मूंग की आवक के चलते मंडी को अब मूंग की मंडी भी कहा जाने लगा है। यहां के मूंग की चमक व अच्छी गुणवत्ता के लिए भी जाना जाता है। मंडी में अधिकांश कृषक मूंग की उपज को ग्रेेडिंग करके लाते है। जिसे बाहर के व्यापारियों द्वारा पसंद किया जाता है। मूंग का दाना बोल्ड होने से दाल बनाने के बजाए दाने की पालिस कर सीधा बेचा दिया जाता है।
नर्मदा कछार एवं अच्छी बारिश से मिला रहा फायदा-
इंदिरा सागर बैक वाटर के कारण क्षेत्र का बड़ा रकबा नर्मदा कछार से लगा है। इसमें किसान ग्रीष्मकाल में खेत खाली होने पर मूंग की खेती करते है। इस वर्ष हुई अच्छी बारिश का किसानों को फायदा मिल रहा है। मूंग की बुआई के प्रति कृषकों का लगाव बढ़ता जा रहा है। पहले कृषक दो फसल तक ही सीमित रहते थे। किसानों द्वारा खरीफ के सीजन में कपास, सोयाबीन, तुअर आदि फसलें बोई जाती थी। इसके बाद नहर एवं कुंआ बाबडिय़ों के माध्यम से रबी के सीजन में गेहूं, चना, अलसी, सरसों आदि की खेती मुश्किल से की जाती थी। लेकिन अब किसानों द्वारा गर्मी के सीजन में तीसरी फसल मूंग की पैदावार भी ली जा रही है।
मूंग की आवक ने पिछले चार वर्षों का रिकार्ड तोड़ा-
वर्तमान में किसानों द्वारा मूंग की कटाई के बाद उपज विक्रय के लिए मंडी में पहुंच रहे है। इस वर्ष अब तक रिकार्ड आवक मंडी में हो चुकी है। आवक के मामले में मूंग ने पिछले चार साल के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। वर्तमान में 81 हजार बोरे मूंग की आवक मंडी में हो चुकी है। इसके बाद भी मूंग की आवक लगातार बढ़ती जा रही है। जबकि पिछले चार वर्षों में पूरे वर्ष भर में इतनी आवक नहीं हुई है। 2015-16 में मूंग की आवक 1 लाख 18 हजार 562 क्विंटल हुई थी। इसके बाद से लगातार इसके उत्पादन में कमी आई। लेकिन इस वर्ष अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।
मंडी में मूंग के मिल रहे ऊंचे दाम-
इस वर्ष उत्पादन के साथ किसानों को मंडी में मूंग के ऊंचे दाम भी मिल रहे हंै। इससे किसान बिना देर किए अपनी उपज बेचने मंडी पहुंच रहे हैं। स्थानीय मंडी में खिरकिया के अलावा हरसूद एवं किल्लौद तहसील के किसान भी अपनी उपज बेचने के लिए पहुंचते है। वर्तमान में किसानों को मूंग का 5500 से 9000 रुपए प्रति क्विंटल भाव मिल रहा है। इतना अधिक भाव किसानों को पूर्व में नहीं मिला। यह मूल्य समर्थन मूल्य से भी अधिक है।
एक नजर मूंग की आंकड़ों पर
वर्ष आवक भाव
2015-16 1 लाख 8 हजार 562 5200 से 8500
2016-17 77 हजार 674 5400 से 7200
2017-18 51 हजार 3500 से 5100

2018-19 60 हजार 4500 से 7100

2019-20 78 हजार 5400-8900

2020-21 81 हजार (अब तक) 5500-9000
इनका कहना है-
मंडी में मूंग की बंपर आवक हो रही है। उपज का मूल्य भी किसानों को अच्छा मिल रहा है। आने वाले दिनों में भी आवक और अधिक बढऩे की संभाना है।
के डी अग्निहोत्री, सचिव, कृषि उपज मंडी खिरकिया

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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