आरोपी को जांच समिति के सामने बैठाकर पूछताछ की, समिति प्रबंधक और दूसरा पुत्र भी गिरफ्त में आया

- सहकारी समिति चौकड़ी में 5183 क्विंटल चना की हेराफेरी का मामला

By: gurudatt rajvaidya

Published: 04 Oct 2020, 08:02 AM IST

खिरकिया। सेवा सहकारी समिति चौकड़ी में समर्थन मूल्य पर चना खरीदी के दौरान फर्जी बिल बनाकर गबन करने वाले समिति प्रबंधक दिनेश बघेला एवं उसके दूसरे पुत्र गब्बर उर्फ सुमित बघेला को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया। हालांकि उनके समर्पण करने की बात भी सामने आई है। एक दिन पहले पुलिस ने समिति प्रबंधक के पुत्र बंटी उर्फ रोहित बघेला को भी गिरफ्तार किया था। यह सभी मामला उजागर होने के बाद से फरार थे। पुलिस द्वारा आरोपी समिति प्रबंधक से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने सहकारिता विभाग की जांच के आधार पर शासकीय राशि का गबन करना सिद्ध पाया। इस मामले में दिनेश पिता जगन्नाथ बघेला, पुत्र बंटी उर्फ रोहित बघेला एवं गब्बर उर्फ सुमित बघेला पर भादंवि की धारा 276, 420 एवं 406 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा आरोपियों की तलाश इंदौर, हरदा, खंडवा, पाहनपाट, कड़ोलाराघौ, खोकरिया, आशापुर सहित अन्य जगह की गई थी, लेकिन वे नहीं मिले थे। एसपी ने उनकी गिरफ्तारी पर इनाम भी घोषित किया था। पुलिस के अनुसार आरोपी दिनेश बघेला एवं छोटे पुत्र गब्बर को सिंगाजी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी में टीआई ज्ञानू जायसवाल, एसआई महेंद्र उइके व मनीष चौधरी, आरक्षक राकेश कुमरे, रविन्द्र एवं मनोज की अहम भूमिका बताई जा रही है।
समिति प्रबंधक का पुत्र 10 तक रिमांड पर
शुक्रवार को पुलिस की गिरफ्त में आए समिति प्रबंधक के पुत्र बंटी को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया। जहां पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए न्यायालय से रिमांड की मांग की गई। न्यायालय द्वारा बंटी को 10 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर दिया गया। अब आरोपी से फर्जीवाड़े को लेकर पूछताछ की जाएगी। जिसमें कई नाम सामने आ सकते हंै।
पूछताछ में कबूली फर्जी बिलों की बात
शुक्रवार को पुलिस की गिरफ्त में आए बंटी से पुलिस द्वारा पूछताछ की गई। पहले उसने फर्जी बिल नहीं बनाने की बात कही, लेकिन बाद में पुलिस ने सहकारिता विभाग की जांच कमेटी से आमना-सामना कराया तो वह सच कबूलने लगा। उससे 38 किसानों को भुगतान हो चुके 54 लाख रुपए के बारे में पूछा गया तो वह पहले केवल 21 बिल ही फर्जी होना बताने लगा। उसके अनुसार बचे बिल वास्तविक किसानों के ही थे। जांच कमेटी द्वारा समिति के रिकार्ड अनुसार जानकारी बनाई जाने की बात कही गई। वहीं रिकार्ड भी आरोपी के सामने रखे गए। जिसके बाद उसने सभी 38 बिल फर्जी होने की बात कबूली है। पूछताछ के दौरान सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी सतीष सिटोके सहित जांच समिति के छह में से चार अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने कहा कि सभी 38 किसान जिनके खातों में राशि जमा हुई है, वे रुपए वापस जमा नहीं करेंगे तो पुलिस द्वारा सहआरोपी बनाए जा सकते हैं।
कीटनाशक गटकने वाले किसान को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस
मामले में 24 सितंबर को समिति कार्यालय के सामने जहर पीकर आत्महत्या का प्रयास करने वाले किसान सूरज विश्नोई को गिरफ्तार करने छीपावड़ पुलिस का दल उसके गांव नीमगांव पहुंचा। जहां पर आरोपी नहीं मिला। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
इनका कहना है
आरोपी समिति प्रबंधक एवं उसके पुत्र को गिरफ्तार किया गया है। पूर्व में गिरफ्त में आए एक आरोपी को 10 अक्टूबर तक रिमांड पर लिया गया है। गिरफ्त में आए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की विवेचना प्रारंभ कर दी गई है। सूरज विश्नोई को गिरफ्तार करने पहुंचे थे, लेकिन वह फरार हो गया।
- ज्ञानू जायसवाल, टीआई, छीपावड़
इधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव से मिले कांग्रेसी
हरदा। कांग्रेसियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले में शनिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव से मुलाकात की। किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव मोहन विश्नोई के नेतृत्व में मुलाकात के दौरान यादह्यव को सहकारी समिति चौकड़ी में हुए फर्जीवाड़े से संबंधित दस्तावेज सौंपे गए। इस दौरान कांग्रेसियों ने यादव को बताया कि सहकारिता विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से यह सब हुआ। इन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने को लेकर भी चर्चा की गई। इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पवार, उमाशंकर विश्नोई, सेठी पटेल, अनिल सूरमा, राजनारायण स्याग, सूरज विश्नोई, सुहागमल पवार, राजेश, बृज जानी आदि उपस्थित थे।

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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