लॉकडाउन के कारण शहरों में फंसे बच्चे, माता-पिता की चिंता बड़ी

लॉकडाउन होने से जो जहां था वहीं का हो गया, चिंतित हो रहे परिजन

खिरकिया। कोरोना वायरस के कारण सरकार द्वारा विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों को तो देश लाया जा चुका है, लेकिन देश के विभिन्न शहरों में फंसे बच्चे अपने शहर एवं गांव नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में 21 दिन का लॉकडाउन होने से उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। वे अपने बच्चों को बुलाने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हंै। जानकारी के मुताबिक नगर सहित विकासखंड के गांवों में रहने वाले कई नागरिक एवं बच्चे दूसरे प्रदेश व शहरों में फंसे हैं। नगर के संतोष कलम की दो बेटियां बाहर हैं, जो आवागमन के साधन नहीं होने से घर नहीं लौट पा रही हैं। उनकी एक पुत्री गांधीनगर एवं दूसरी इंदौर में है।

अभिभावकों का कहना
इब्राहीम खान के पुत्र राजगढ़ में शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में वोकेशनल टे्रनर हंै, लेकिन वह भी नहीं आ सके। इसी तरह ग्राम पंचायत रामटेक रैयत की घोंघराघाट, टेमलावाड़ी सहित ग्रामों के करीब 15 लोग भोपाल में फंसे हैं। वे भी अपने गांव लौटना चाहते है, लेकिन कोई साधन नहीं होने से हीं आ पा रहे। नागरिकों द्वारा अपने बच्चे व परिवारजनों को वापस बुलाने के लिए एसडीएम को आवेदन देने की बात भी कही जा रही है। एसडीएम वीपी यादव का कहना है कि इस संबंध में सूचनाएं मिल रही हैं। अनावश्यक रूप से कोई यहां से बाहर या बाहर से यहां नहीं आएगा। विषम परिस्थितियों में ही अनुमति दी जा सकेगी।

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