गड्ढों में फंस रहे वाहन, सड़कों पर आवारा मवेशियों से हो रहे हादसे

लोक निर्माण विभाग को 223.९६ लाख मिलने पर भी नहीं बनाईसड़क, सड़कों पर सैकड़ों आवारा पशुओं का जमघट

By: sanjeev dubey

Published: 20 Jul 2018, 12:37 PM IST

हरदा. प्रदेश सरकार ने नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग को करोड़ों रुपए सड़क बनाने के लिए दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों को बदहाल सड़कों पर आवागमन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। सड़कों में एक-एक फीट के गहरे गड्ढे हो जाने से आए दिन बसें व अन्य वाहन फंस रहे हैं, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करनाा पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ मुख्य सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमघट लगने से यातायात प्रभावित हो रहा हैऔर वाहन दुर्घटनाएं हो रही हैं। नगर पालिका द्वारा इनके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से आए दिन हादसे हो रहे हैं और मवेशियों की जान जा रही है। गत महीनों में नगर पालिका ने आवारा पशुओं का धरपकड़ अभियान चलाया था, जिसे कुछ ही दिनों में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। शहर की मुख्य सड़कों पर दिन-रात मवेशियों का जमघट लगा रहता है। इसके अलावा नगर पालिका ने नलों के सुधार के लिए खोदे गए गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं, जिससे लोगों को आवागमन में दिक्कतें हो रही हैं।
आठ महीने पहले मिली राशि का उपयोग नहीं
गत वर्ष २०१७ दिसंबर माह में प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री ने हरदा-छीपानेर मार्ग का शहरी भाग 1.26 किमी को बनाने के लिए 223.96 लाख रुपए दिए थे। लोक निर्माण विभाग को सड़क का निर्माण करवाना था, लेकिन आठ महीने बीतने के बाद भी मार्गनहीं बनवाया गया। इस मार्ग से गांव छीपानेर, अबगांवखुर्द, करताना, भुन्नास सहित सैकड़ों गांवों के लोगों का हरदा आना-जाना होता है। बदहाल सड़क की वजह से लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

यात्रियों ने धक्का लगाकर गड्ढे से निकाली बस
वर्तमान में सरकारी अस्पताल के गेट से लेकर कलेक्ट्रेट चौराहे तक यह सड़क इतनी खराब हो गई है कि उस पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। गड्ढों की वजह से आए दिन हादसे हो रहे हंै।गुरुवार को इसी मार्गपर सरकारी अस्पताल के गेट के सामने से निकल रही एक प्राइवेट बस का पहिया गड्ढे में फंस गया। ड्राईवर ने उसे निकालने की काफी कोशिश की, लेकिन वह नहीं निकला। बस में बैठे यात्रियों ने नीचे उतरकर बस को धक्का लगाकर गड्ढे से बाहर निकाला। इसी तरह उक्त सड़क पर स्थित उत्कृष्ट विद्यालय के गेटपर एक ट्रैक्टर ट्राली का पहिया गड्ढे में धंस गया। उसमें भरी गिट्टी को दूसरी ट्राली में डालकर ट्राली को बाहर किया गया। इसी तरह नगर पालिका के क्षेत्र में आने वाली बस स्टैंड रोड, इसी तरह छीपानेर मार्ग से कलेक्ट्रेट कार्यालय जाने वाली सड़क, स्टेट बैंक तिराहे पर गड्ढे हो गए हैं, जिसकी मरम्मत नहीं कराईजा रही है।

टेंडर प्रक्रिया में गुजार दिए महीनों
लोक निर्माण विभाग को शासन से राशि मिले महीनो हो गए हैं, किंतु अब तक इसका निर्माण नहीं किया गया। विभाग ने फरवरी माह में सड़क बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया की थी, किंतु वह निरस्त हो गई। इसके बाद फिर से विभाग टेंडर प्रक्रिया में ही उलझा हुआ है। विभाग ने बारिश के पहले सड़क बनाने की बात कही थी, ताकि आवागमन सुगम हो सके। किंतु विभाग ने टेंडर करने के नाम पर महीनों गुजार दिए हैं।लोगों को गड्ढों में से आना-जाना पड़ रहा है।

मवेशियों के कारण हो रहे हादसे
शहर के मुख्य मार्गों पर स्थित प्रत्येक चौराहे पर 50-५० आवारा मवेशियों का जमघट लगा रहता है। इनकी वजह से मोटर साइकिल चालक दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, वहीं बड़े वाहनों में दबकर मवेशियों की मौत हो रही है, लेकिन नगर पालिका इन मवेशियों को कांजी हाउस में बंद नहीं कर रही है। चार दिन पहले बंगाली कॉलोनी के सामने एक ट्रक की चपेट में आने से तीन आवारा मवेशियों की मौत हो गईथी। वहीं हंडिया रोडपर बीच सड़क पर बैठे मवेशियों को बचाने के चक्कर में ट्रक पलट गया था।

नपा २८६ रुपए लेकर छोड़ देती है मवेशी
कभी-कभार नगर पालिका आवारा मवेशियों का धरपकड़ अभियान चलाती है। किंतु पशु पालकों के पहुंचने पर केवल २८६ रुपए लेकर छोड़ देती है, जिससे ये मवेशी फिर से सड़कों पर जमा हो जाते हैं। नपा द्वारा पशु पालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं किए जाने से शहर की मुख्य सड़कें आवारा मवेशियों का अड्डा बन गईहैं।

इनका कहना है
टीकमगढ़ की एजेंसी को छीपानेर मार्गके शहरी हिस्से की सड़क निर्माण का ठेका मिला है। ठेकेदार को कार्यशुरू करने के लिए कहा जा रहा है। संभवत: एक हफ्ते में काम शुरू होने की उम्मीद है।
एसके गुप्ता, एसडीओ, लोक निर्माण विभाग, हरदा
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शहर में घूमने वाले आवारा मवेशियों का धरपकड़ अभियान शुरू किया जा रहा है। सड़क पर पशुओं को छोडऩे वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर की जाएगी। आवारा मवेशियों को कांजीहाउस से अब नहीं छोड़ा जाएगा।
दिनेश मिश्रा, सीएमओ, नगर पालिका, हरदा

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