'लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं एकतांत्रिक हुईं, मनमर्जी चला रहे अधिकारी

पंचायतीराज को सशक्त बनाने की मांग दोहराई

By: poonam soni

Published: 25 Apr 2018, 08:17 PM IST

हरदा. हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं एकतांत्रिक हो गई हैं। संविधान में बिना संशोधन किए अधिकारी अपनी मनमर्जी से परिपत्र जारी कर रहे हैं। इससे ग्राम सभा एवं पंचायतराज खत्म सा हो गया है। कांग्रेस ने यह आरोप लगाते हुए पंचायतीराज को सशक्तबनाने की मांग दोहराई। संगठन की ओर से मंगलवार को पंचायतीराज दिवस के अवसर पर राज्यपाल के नाम संबोधित इस आशय की मांग संबंधी ज्ञापन नायब तहसीलदार को दिया गया। 1994 के पंचायतराज को जस का तस लागू करने की मांग संबंधी ज्ञापन में कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संविधान में 73 वां व 74 वां संशोधन कर सत्ता का विकेंद्रीकरण किया था। इससे अंतिम व्यक्ति सत्ता का भागीदार बना।

1994 में मप्र देश का पहला राज्य बना जिसमें पंचायत राज्य जस का तस लागू हुआ था। 2003 में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा ने चुने हुए जनप्रतिनिधियों के अधिकार धीरे-धीरे कम किए। फिलहाल स्थिति यह है कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को नस्तियों पर हस्ताक्षर करने का अधिकार भी छीन लिए गए। ग्राम सभा अस्तित्वहीन हो गई। ज्ञापन में पंचायत राज अधिनियम 1994 जस का तस पालन कराया जाना सुनिश्चित करने की मांग की गई है। ज्ञापन देने के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पंवार, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के प्रदेश संयोजक हेमंत टाले, किसान कांग्रेस प्रदेश सचिव मोहन बिश्नोई, पार्षद मुन्ना पटेल, हबीब समीर, पीसीसी सदस्य दिनेश यादव, मनीष बाबूजी, सुरेंद्र सराफ, सुखराम बामने, अनिल सूरमा, लखन बामने, संजय पांडेय, अलकेश शर्मा, लोकेश मालवीया, अबदुल सलाम आदि मौजूद रहे।
भाजपा पर गुमराह करने का आरोप
मंडला में आयोजित पंचायत प्रतिनिधियों सम्मेलन में पीएम द्वारा उन्हें सफलता का मंत्र देने को कांग्रेस ने ढोंग बताया। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के प्रदेश संयोजक हेमंत टाले ने कहा कि एक तरफ भाजपा सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार समाप्त कर अपने हाथ में ले लिए, दूसरी ओर पंचायत राज दिवस मनाने के नाम पर मोटी रकम खर्च कर पंचायत से जुड़े जनप्रतिनिधियों को गुमराह किया जा रहा है।
पूरा चना खरीदा जाए समर्थन मूल्य पर
एक अन्य ज्ञापन में कांग्रेस ने मांग की है कि किसानों का पूरा चना समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि किसान जल्द उपज बेच सकें। गेहूं बेच चुके किसानों को तत्काल भुगतान हो। सहकारी बैंक द्वारा की जा रही संपूर्ण कर्ज राशि की वसूली को रोका जाए। सीएम की घोषणा अनुसार पिछले साल की बोनस राशि का भुगतान किया जाए। भावांतर भुगतान योजना के तहत अक्टूबर नवंबर में उड़द बेचने वाले जिले के 2052 किसानों का भुगतान तत्काल कराया जाए।

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