खराब फसल दिखाने और बीमा मांगने पहुंचे किसान

खराब फसल दिखाने और बीमा मांगने पहुंचे किसान

Sanjeev Dubey | Publish: Sep, 05 2018 02:09:11 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

- कलेक्टर को ज्ञापन देकर की मांग

हरदा. जिले के किसानों को गत वर्ष खराब हुईफसल की बीमा राशि अब तक उनके खातों में नहीं आ पाईहै। वहीं दूसरी तरफ वर्तमान में सोयाबीन फसल खराब होने से किसान परेशान हैं। मंगलवार को चार गांवों के किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को समस्याएं बताकर मुआवजे की मांग की। गांव रेलवा के किसान गोविंद गौर, राहुल गौर, प्रेमनारायण दुगाया, महेश मातवा ने बताया कि पटवारी हल्का नंबर १८ में उनकी कृषि भूमि है। वर्ष २०१७ में उनकी फसल नष्टहो गई थी। किंतु अभी तक उनके खातों में बीमा राशि नहीं आईहै। केलनपुर के कृषकों ने पहतगांव पटवारी हल्का नंबर २३ में भी पिछले साल सोयाबीन फसल खराब हुईथी, जिसकी बीमा राशि नहीं मिल पाई है।

सोयाबीन और उड़द में लगी बीमारी
धनगांव और जात्राखेड़ी के किसानों ने सोयाबीन और उड़द फसल बीमारी के कारण खराब होने की शिकायत कलेक्टर से की। किसानों ने बताया कि जात्राखेड़ी की करीब ८०० एकड़ की फसल बीमारी की वजह से खराब हो गई है। उक्त दोनों गांवों के किसानों ने कलेक्टर से उनके खेतों का सर्वे कर मुआवजा राशि दिलाने की मांग की।

आलमपुर सहकारी समिति में पंजीयन कार्य शुरू
आलमपुर सहकारी समिति केंद्र पर इस वर्ष खरीफ उपज का पंजीयन नहीं किया जा रहा था। इससे इस समिति से जुड़े सैकड़ों किसानों को सोडलपुर पहुचकर रजिस्ट्रेशन कराने पड़ रहा था। मामले को लेकर ३ सितबंर को पत्रिका में समाचार में प्रकाशित कर किसानों को हो रही परेशानी से जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराया गया था। इसके बाद आलमपुर समिति में ही मंगलवार से किसानों का रजिस्ट्रेशन का कार्य शुरू किया गया। शाखा प्रबंधक मनोज शर्मा ने बताया कि पहले दिन आधा दर्जन से अधिक किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया। ऑपरेटर मनीष किरार ने बताया गया सर्वर डाउन होने के कारण पंजीयन करने में देरी लग रही है। किसान हरनारायण रानवे, डॉ एसएन चाचरे, मोहनदास चाचरे प्रकाश चाचरे, नवीन चौधरी का कहना था कि रजिस्ट्रेशन तो चालू हो गया है। लेकिन मंगलवार दोपहर से बिजली नहीं होने से लैपटॉप पर बैटरी से लगभग 2 बजे तक ही रजिस्ट्रेशन किया गया है। इसके बाद बैटरी डाउन होने से कार्य बंद हो गया। यदि यही स्थिति रही तो केंद्र से जुड़े 5 से 6 गांव के किसानों को पंजीयन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

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