लॉकडाउन में किसानों ने तैयार किया 857 करोड़ का आर्थिक चक्र, समर्थन मूल्य न मिलने से घाटा भी उठाया

- ग्रीष्मकालीन मूंग एमएसपी 7050 पर बिकता तो मिलते 663 करोड़, औसत 6000 के भाव से उठाना पड़ रहा 130 करोड़ का नुकसान

- जिले में पहली बार 82500 हेक्टेयर में बोई गई थी फसल

By: gurudatt rajvaidya

Published: 20 Jul 2020, 08:03 AM IST

गुरुदत्त राजवैद्य, हरदा। कोरोना वायरस के कोहराम के बीच लगे लॉकडाउन में जिले के किसानों ने 857 करोड़ 58 लाख रुपए का इकानॉमिक सर्कल (आर्थिक चक्र) तैयार किया। हालांकि सरकारी नीतियों का खामियाजा सहते हुए उन्हें उतना फायदा नहीं पहुंचा। ग्रीष्मकालीन मूंग समर्थन मूल्य 7050 रुपए प्रति क्विंटल पर नहीं बिकने से किसानों को इसमें से महज 663 करोड़ 5 लाख रुपस ही मिलेंगे। मंडियों में औसत भाव 6000 रुपए प्रति क्विंटल मिलने से इस सीजन में उन्हें 130 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। कृषि विभाग के मुताबिक वर्ष 2013-14 में 54 हजार हेक्टेयर से शुरू हुई मूंग की खेती का रकबा बाद के दो साल में घटा। तवा नहर का पानी नहीं मिलने से बीते तीन वर्षों में तो यह साढ़े 8 हजार से 12 हजार हेक्टेयर में सिमट गया था। ग्रीष्मकाल में नहर का पानी एक बार फिर मिलने से पहली बार रिकार्ड 82 हजार 500 हेक्टेयर (अनुमानित) रकबे में ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई हुई थी। इसका उत्पादन भी इस बार सर्वश्रेष्ठ 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहा।
ऐसे समझें हरियाले मोती का इकानॉमिक सर्कल
लागत : खेत की तैयारी, बुवाई, बीज, खाद, दवाई, मजदूर (39 कार्यदिवस/250 रुपए प्रतिदिन) - 25 हजार 380 रुपए प्रति हेक्टेयर
उत्पादकता आय : मंडी में औसत 6000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से औसत उत्पादन 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर - 1 लाख 5 हजार 750 रुपए।
लागत काटकर शुद्ध आय : 64 हजार 620 रुपए प्रति हेक्टेयर। जिले के अनुमानित रकबे 82 हजार 500 के अनुसार यह 663 करोड़ 5 लाख रुपए होती है।
कृषि श्रम का सृजन : प्रति हेक्टेयर 9750 रुपए श्रम लागत अनुसार यह राशि 80 करोड़ रुपए।
खाद, बीज व कीटनाशक व्यवसाय : कृषि आदान का खर्च 13580 रुपए प्रति हेक्टेयर आता है। इस अनुसार यह 112 करोड़ रुपए। इसी के साथ कृषि आदान श्रमिक के 45 दिन के श्रम सृजन पर 1 करोड़ 19 लाख रुपए खर्च हुए। कृषि मंडी के हम्मालों के इस चक्र में 1 करोड़ 34 लाख रुपए शामिल हैं।
समर्थन मूल्य पर खरीदी के पंजीयन ही शुरू नहीं हो सके
कमल पटेल ने विधायक रहते तवा कमांड की नहरों से ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए सिंचाई का पानी तो दिला दिया लेकिन कृषि मंत्री बनने के बावजूद किसानों को इसका समर्थन मूल्य नहीं दिला सके। कृषि मंत्रालय का दायित्व मिलने के बाद उन्होंने 2 जून को घोषणा की थी कि मूंग की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाएगी। इसके पंजीयन 4 से 15 जून तक होना थे, लेकिन आदेश ही जारी नहीं हुए। कृषि मंत्री पटेल ने एक पखवाड़ा पहले कहा था कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मूंग खरीदी के निर्णय के लिए तीन मंत्रियों की समिति बनाई थी। इसकी रिपोर्ट उन्हें दी जा चुकी है। इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय हो पाता इसके पहले सरकार मंत्रीमंडल विस्तार में व्यस्त हो गई और मामला अटक गया।
इनका कहना है
जिले में पहली बार इतने बड़े रकबे में मूंग की बुवाई हुई थी। किसानों की मेहनत से इसका उत्पादन भी बेहतर हुआ है। लॉकडाउन में अर्थव्यवस्था को इससे संबल मिला है।
- एमपीएस चंद्रावत, उप संचालक, कृषि, हरदा

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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