जल संसद में गिरते भू-जल स्तर पर किया चिंतन

पेयजल की किल्लत होने पर निजी जलस्रोत भी अधिग्रहित किए जाएंगे

By: sandeep nayak

Published: 13 Mar 2018, 05:44 PM IST

हरदा। अल्पवर्षा के कारण जिले में तेजी से घटते भूजल स्तर पर सोमवार को जल संसद का आयोजन कर चिंतन किया गया। इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि भूमिगत पानी पर सभी का समान अधिकार है। पेयजल की किल्लत होने पर निजी जलस्रोत भी अधिग्रहित किए जाएंगे। अत: किसान तीसरी फसल मूंग की बुवाई से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि सिंचाई के लिए दोहन से उस क्षेत्र में पानी की किल्लत तो नहीं होगी।
जिला पंचायत सभाकक्ष में जलाभिषेक अभियान के तहत आयोजित जल संसद की अध्यक्षता करते हुए कलेक्टर अनय द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि कई क्षेत्रों में अभी से पेयजल की समस्या आ रही है। एक क्षेत्र में भूमिगत जल का स्रोत समान होता है। यह न सोचा जाए कि मेरा ट्यूबवेल या कुआं है तो बेतहाशा पानी लेने का अधिकार मिल गया। आसपास के जलस्रोतों पर इसका असर पड़ा और पेयजल की समस्या हुई तो प्रशासन इसे तत्काल अधिग्रहित करेगा।

बैकवाटर से सटे गांवों में चिंताजनक हालात
जिले में पेयजल संकट की शुरुआत हो चुकी है। जल संसद में बताया गया कि इंदिरा सागर बांध के बैकवाटर से सटे करनपुरा, लोटिया आदि गांवों में हैंडपंप दम तोडऩे लगे हैं। वहीं खिरकिया के भी कई गांवों में अभी से हालात बिगडऩे लगे हैं।
किसान फसल सूखने पर नहीं मांगे पानी
पेयजल सबसे पहली जरुरत है। अत: फसल सूखने की स्थिति में यह नहीं कहा जाए कि सिंचाई के लिए पानी दिया जाए। इसलिए किसान तीसरी फसल मूंग की बुवाई से पहले इन सब बातों पर विचार कर लें। इस दौरान अपर कलेक्टर बाबूलाल कोचले ने शासन के नियमों का हवाला देते हुए बताया कि सभी भूमि पर पहला अधिकार सरकार का है। यह लीज पर दी जाती है। यानी इसके जलस्रोतों पर भी शासन का पूर्ण अधिकार है और जरुरत पडऩे पर इसे अधिग्रहित किया जाएगा।

भूमिगत जलस्तर तथा दोहन की स्थिति बताई
जल उपभोक्ता संथा अध्यक्षों, सरपंच आदि से प्रशासन ने अपेक्षा की कि वे जरुरत पडऩे पर आगे आकर अपने जलस्रोतों से पेयजल उपलब्ध कराएं। इस दौरान तीनों अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों की ओर से भूमिगत जलस्तर तथा इसके दोहन की स्थिति बताई। जल संसद में एसपी राजेश कुमार सिंह, जिपं सीईओ केडी त्रिपाठी, एएसपी हेमलता कुरील सहित विभागीय अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
अजनाल नदी पर बने बोरी बंधान सख्ती से तोड़े जाएंगे
इस दौरान नपा सीएमओ दिनेश मिश्रा ने बताया कि अजनाल नदी से शहर को प्रतिदिन एक एमएलडी पानी दिया जाता है। नदी के ऊपरी हिस्से में किसानों ने मूंग में सिंचाई के लिए बोरी बंधान बांधे हैं। इससे भविष्य में पेयजल की दिक्कत हो सकती है। इस पर कलेक्टर द्विवेदी व एसपी सिंह ने नपा को राजस्व अमला व पुलिस बल उपलब्ध कराने की बात कही। इनके साथ नपाकर्मी सख्ती से बोरी बंधान तोड़ेंगे।
पंचायत में तय हो पानी का उपयोग
जल संसद में किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि राजस्व अमला मौके पर जाकर उन्हें मूंग की बुवाई से ही रोक रहा है। इस पर कलेक्टर द्विवेदी ने कहा कि पेयजल को लेकर हर गांव की परिस्थिति अलग है। अत: ग्राम पंचायत में अधिकारी, जनप्रतिनिधि व ग्रामीण मिलकर तय करें कि संबंधित क्षेत्र में पानी की उपलब्धता कैसी है। मूंग फसल में सिंचाई से इस पर कितना असर पड़ेगा। तभी पानी का सही दोहन संभव रहेगा।
मूंग व सब्जी में सिंचाई की छूट मिले
इस दौरान किसानों की ओर से कहा गया कि मूंग और सब्जियों की सिंचाई की छूट मिलना चाहिए। इस पर कलेक्टर ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि यह आपको ही तय करना है कि संबंधित क्षेत्र में पेयजल संकट तो नहीं रहेगा। प्रशासन किसानों का हाथ पकडऩे नहीं जाएगा। स्थिति बिगडऩे पर ही जलस्रोत अधिग्रहित किए जाएंगे। मार्च में ही जलस्तर कम होने की स्थिति देखते हुए इसकी संभावना ज्यादा रहेगी। इसलिए बुवाई से पहले विचार करें कि सिंचाई कर पाएंगे या नहीं।

घटेगा मूंग का रकबा
बीते साल जिले में 7000 हेक्टेयर में मूंग की बुवाई हुई थी। इस साल नहर का पानी न मिलने तथा जलस्तर गिरने से करीब 2500 हेक्टेयर में इसकी बुवाई की संभावना है।
906 बसाहटों में बीते साल थी समस्या
पीएचई के मुताबिक बीते साल जिले की 906 बसाहटों में पेयजल समस्या थी। इनमें खिरकिया ब्लाक की 8 7 में जलस्तर गिरा था व 17 में स्थिति गंभीर रही। टिमरनी ब्लाक की 90 बसाहटों में जलस्तर गिरा व 24 में गंभीर स्थिति रही। हरदा ब्लाक की 15 बसाहटों में जलस्तर कम हुआ तथा 4 में स्थिति ज्यादा बिगड़ी थी।

sandeep nayak Desk/Reporting
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