बारिश की खेंच से चिंतित किसान, फसल बचाने खेतों में शुरू की सिंचाई

शीघ्र बारिश नहीं हुई तो खेतों में सड़ जाएंगे बीज

By: gurudatt rajvaidya

Published: 26 Jun 2020, 08:02 AM IST

खिरकिया. क्षेत्र में बारिश की खेंच ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कहीं खेतों में बीजों का अंकुरण नहीं हुआ है तो कहीं अंकुरित पौधे मुरझा रहे हैं। ऐसे में अपनी फसल बचाने के लिए कुछ किसानों ने तो खेतों में सिंचाई कार्य प्रारंभ कर दिया है। सामान्यत: खरीफ की फसलों मेें किसानों को सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश होने के बाद अब तेज धूप निकलने लगी है। किसानों द्वारा पिछले दिनों हुई बारिश के आधार पर आगामी संभावनाओं को देखते हुए बोवनी कर दी। लेकिन अब बारिश नहीं हो रही है। ऐसे में किसानों को बोवनी खराब होने का भय सता रहा है। किसान बारिश शुरू होने का का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि वर्तमान में गत वर्ष से अधिक बारिश हो चुकी है, लेकिन अब फसलों के अनुरूप बारिश की आवश्यकता है। खरीफ के इस सीजन में किसानों द्वारा सोयाबीन, मक्का, उड़द सहित अन्य फसलों की बोवनी की गई है। बीजों के अंकुरण के लिए बारिश की जरूरत है, ताकि मिट्टी में नमी आने से बीज बाहर आकर पौधों का रूप ले सकंे।
2-4 दिन बारिश नहीं हुई तो सड़ जाएंंगे बीज, मुरझाने लगें पौधे-
वर्तमान में किसानों की बोवनी आक्सीजन पर कहीं जा सकती है। इसमें समय रहते पानी नहीं मिला तो बोवनी पूरी तरह से खराब हो जाएगी। कृषक संतोष कलम दामोदरपुरा, ललित सारन सारंगपुर ने बताया कि यदि आगामी दो-चार दिनों में बारिश नहीं होती तो बीज खेतों में ही सड़ जाएंगे, वहीं अंकुरित पौधे भी मुरझा जाएंगे। बोबनी के बाद कई दिनों से बारिश नहीं होने से इस प्रकार की स्थिति बन रही है। कई स्थानों पर फसलों की नाजुक स्थिति है, तो कई स्थानों पर बीज जमीन से बाहर अंकुरण के लिए मशक्कत कर रहे हंै। ऐसे में यदि आगामी में दिनों में बारिश नहीं होती है, तो किसानों की बोबनी खराब हो सकती है। कई स्थानों पर बोबनी के बाद तुरंत बारिश होने से बीजों पर मिट्टी की परत जम गई है, जो वर्तमान में सख्त हो गई है। इसके कारण भी बीजों का अंकुरण नहीं हो रहा है। खेतों में टै्रक्टर चलने पर पहिए वाले स्थानों पर भूमि ठोस हो जाती है, ऐसे में बीज ऊपर ही रह जाता है। इनके अंकुरण के लिए भी बारिश की आवश्यकता है।
बोवनी बचाने की जुगत में लगे किसान, शुरू की सिंचाई-
बारिश की खेंच के बाद किसानों ने अपनेे साधनों से सिंचाई प्रारंभ कर दी है। कृषक विजयंत गौर ने अपने खेत में स्प्रिंकलर से सिंचाई कार्य प्रारंभ कर दिया है। कृषक ने बताया कि सोयाबीन फसल पानी की कमी से मुरझाने लगेगी, यदि इसके बाद पानी चालू करेंगे तो पीली पडऩे की आशंका रहती है। ऐसे में समय रहते सिंचाई कार्य कर रहे हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था नही हंै, वे इसके लिए संभावना तलाश रहे हंै। किसान फसलों को बचाने के लिए अच्छी बारिश के लिए इंद्रदेव से भी प्रार्थना कर रहे हंैै।
करनी पड़ सकती है दोबारा बोबनी-
बारिश के यही हालत रहे तो किसानों को दोबारा बोबनी भी करनी पड़ सकती है। इससे किसानों पर आर्थिक मार पड़ेगी। किसानों द्वारा वर्तमान में महंगे दामों पर बीज, खाद की व्यवस्था कर जैसे-तैसे बोबनी की है। ऐसे में अब यदि फसल खराब होती है, तो किसानों को कर्ज का भागीदार होने पर मजबूर होना पड़ेगा। इस वर्ष क्षेत्र में 57 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में सोयाबीन सहित अन्य उपज की बोवनी की जाना है। इसमें 40 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में बोवनी हो चुकी है। शेष बचे रकबे में बोवनी पिछडऩे को लेकर भी किसान चिंंितत है।

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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