खरीफ की फसलें 50 प्रतिशत से ज्यादा खराब होने की संभावना, जिला आपदा प्रभावित घोषित

- कलेक्टर ने जारी की अधिसूचना, बीमा कंपनी शुरू करेगी फसल नुकसानी का सर्वे
- जिले में अतिवृष्टि और कीट व्याधी से खराब हुई है खरीफ की फसलें
- जिले के 1 लाख 91 हजार हेक्टेयर में हुई है खरीफ की बोवनी

By: gurudatt rajvaidya

Published: 05 Sep 2020, 08:02 AM IST

हरदा। जिले में अतिवृष्टि और कीट व्याधी से खरीफ फसलों को 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने की संभावना है। जिला प्रशासन द्वारा इस तथ्य को मान्य करते हुए अधिसूचना जारी की गई है। कलेक्टर संजय गुप्ता द्वारा शुक्रवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक पटवारी हल्का स्तर पर अधिसूचित फसल सोयाबीन व मक्का तथा जिला स्तर पर अधिसूचित उड़द फसल में अतिवृष्टि, बाढ़ और कीट व्याधि के कारण 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए जिले को (छहों तहसीलों को) आपदा प्रभावित घोषित किया गया है। अधिसूचना जारी होने की जानकारी शासन के साथ ही एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रबंधक को भी दी गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बीमा कंपनी द्वारा अब खेतों में फसल नुकसानी का सर्वे किया जाएगा। ज्ञात हो कि जिले में 1 लाख 91 हजार हेक्टेयर रकबे में खरीफ की बोवनी हुई है। सबसे ज्यादा रकबे में सोयाबीन की बुवाई हुई है। बोवनी के बाद बारिश नहीं होने से फसलों पर संकट के बादल मंडराए थे। बारिश हुई तो फसलें पीला मोजेक की चपेट में आ गई थी। इसके बाद अन्य कीट व्याधि लगी। हाल ही में अतिवृष्टि से आई बाढ़ के कारण फसल का दम ही निकल गया।
फसल खराबी का रकबा रोज बढ़ रहा
किसानों के अनुसार सोयाबीन, मक्का और उड़द की फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है। जिन किसानों ने शुरुआती दौर में वैज्ञानिक सलाह के आधार पर इसे बचाने का प्रयास शुरू भी किया, लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं आया। फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है।
फसल पर एरियल ब्लाइट का था प्रकोप
कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने लगातार खेतों का भ्रमण किया था। उनके मुताबिक फसलों में राजयोटोनिया ब्लाइट, एरियल ब्लाइट एवं उड़द की टी-9 प्रजाति में तना मक्खी एवं रायजोटोनिया ब्लाइट का प्रकोप देखने में आया था। कृषि वैज्ञानिकों का कहना था कि किसानों ने चलन से बाहर हुई किस्म के सोयाबीन का बीज बोया था। इससे ज्यादा नुकसान हुआ। हालांकि किसान इस बात से इंकार करते हैं। उनके मुताबिक बीज वहीं लिया गया था जो चलन में रहते हुए बाजार में बिका।
कई किसान फसल को कर चुके मवेशियों के हवाले
उल्लेखनीय है कि खरीफ फसल से उत्पादन की आस पूरी तरह खत्म होने के बाद किसानों को इसकी कटाई महंगी पड़ती दिखने लगी। लिहाजा उन्होंने इसे मवेशियों के हवाले करना शुरू कर दिया था। भुवनखेड़ी और हरदा में ऐसे मामले सामने आए थे। कुकरावद गांव के किसानों ने इसे उखाडऩा शुरू कर दिया था, ताकि अगली फसल के लिए खेत समय पर तैयार किया जा सके।
इतने रकबे में लगी हैं खरीफ की मुख्य फसलें
फसल रकबा बीते साल
सोयाबीन 1 लाख 67 हजार 1 लाख 64 हजार
मक्का 12 हजार 13 हजार
उड़द 6 हजार 500 7 हजार 850
इधर, प्रशासन द्वारा शुरू नहीं किया गया सर्वे
जिले में खरीफ की फसलें पूरी तरह नष्ट होने के बावजूद प्रशासन द्वारा सर्वे शुरू नहीं कराया गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि मंत्री कई मौकों पर यह घोषणा कर चुके हैं कि जल्द ही सर्वे शुरू कराके किसानों के नुकसान की भरवाई की जाएगी। तब से ही किसान राह ताक रहे हैं कि सर्वे टीम उनके खेतों पर पहुंचकर नुकसानी का आंकलन करे, ताकि उन्हें समय पर राहत राशि मिल सके। लेकिन अब तक ऐसा हो नहीं सका है।

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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