एक हाथ से फास्ट बॉलिंग करने वाला मोहित बैटिंग में भी छुड़ाता है छक्के

टिमरनी तहसील के रायबोर की क्रिकेट टीम से खेल रहा जन्मजात नि:शक्त खिलाड़ी है क्रिकेट का ऑलराउंडर

हरदा. कहते हैं प्रतिभा किसी की भी मोहताज नहीं होती। वह उभरकर सामने आ ही जाती है। ऐसा ही एक क्रिकेट खिलाड़ी है मोहित। जन्मजात नि:शक्त होने के बावजूद उसकी खेल प्रतिभा उभरकर सभी के सामने आ ही गई। शहर के इंदौर रोड स्थित मैदान पर कमल फैंस क्लब द्वारा आयोजित क्रिकेट स्पर्धा में मैच खेलने आया टिमरनी तहसील के रायबोर का खिलाड़ी मोहित एक हाथ से फास्ट बॉलिंग करने के साथ ही धुआंधार बैटिंग कर प्रतिद्वंद्वी टीम के छक्के छुड़ा देता है। फिल्डिंग के दौरान गेंद को लपककर बेट्समैन को आउट कराना भी उसके लिए बेहद आसान है। जबलपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में सेेकंड ईयर का छात्र मोहित मेहरा पिता तेजराम मेहरा में क्रिकेट खेलने का जुनून 7 साल की उम्र से ही था। वह बताता है कि 11 वर्ष की उम्र होने तक गांव के ही आनंद व अरुण मेहरा के साथ प्रेक्टिस करने लगा। उन्होंने खेल के गुर बताए तो वह इस क्षेत्र में आगे बढ़ता गया। बकौल मोहित इंजीनियरिंग कॉलेज जबलपुर के फस्र्ट ईयर में किसी भी छात्र को क्रिकेट टीम में शामिल नहीं किया जाता, लेकिन उसकी खेल प्रतिभा देख वहां भी अवसर मिल ही गया। कॉलेज की टीम में वह ग्वालियर में मैच खेल चुका है। मोहित जबलपुर गोकलपुर क्रिकेट एकेडमी की ओर से भी मैच टूर्नामेंट खेलता है।

अपंगता को नहीं होने दिया खुद पर हावी
उन्नीस वर्षीय मोहित बताता है कि उसका बायां हाथ जन्म से ही आधा है। कोहनी से नीचे का हिस्सा नहीं है। इसके चलते पढ़ाई सहित अन्य कामकाज में परेशानी तो आती है, लेकिन उसने इस कमी को अपने पर हावी नहीं होने दिया। सकारात्मक सोच रखते हुए हमेशा आगे बढ़ा और सफलता पाता गया। किसान पिता और गृहिणी मां ने उसे हरकदम पर संबल प्रदान किया।

rakesh malviya
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