वर्षो बाद भी नहीं बदले पोखरनी-खिरकिया बायपास मार्ग के हालात

sandeep nayak

Publish: Mar, 14 2018 05:40:10 PM (IST)

Hoshangabad, Madhya Pradesh, India
वर्षो बाद भी नहीं बदले पोखरनी-खिरकिया बायपास मार्ग के हालात

उबड़-खाबड़ पथरीले मार्ग पर नंगे पैर मां नर्मदा की परिक्रमा करते है श्रृद्धालु

खिरकिया. प्रदेश के मुख्यमंत्री नर्मदा क्षेत्रों का विकास व परिक्रमावासियों को सुविधा उपलब्ध कराने की बात तो कहते है, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ ओर ही है। नर्मदा परिक्रमा के लिए मार्गों की ही दशा ठीक नहीं है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में मां नर्मदा की परिक्रमा करने वाले परिक्रमावासियो का नगर से लगे मार्गो से निकलना होता है। परिक्रमा करने वाले श्रृद्धालुओं के लिए खिरकिया पोखरनी कच्चा बायपास मार्ग सबसे उपयुक्त है, लेकिन मार्ग की दुर्दशा के कारण श्रृद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई वर्ष बीत गए, लेकिन मार्ग का दुरूस्तीकरण कार्य नहीं हो पाया। ऐसे में श्रृद्धालुओं को उबड़ खाबड़ पथरीले मार्ग पर नंगे पैर होकर गुजरना पड़ता है, जो काफी कष्टदायक होता है। नगर के मुख्य चौराहे से बस स्टेंड होते हुए काष्ठ डिपो के बाजू से करीब 3 किमी का मार्ग पोखरनी गांव होते हुए स्टेट हाईवे पर मिलता है। जिसमें आधा मार्ग पोखरनी ग्राम पंचायत एवं आधा नगर परिषद के क्षेत्रांतर्गत आता है। लेकिन यह मार्ग दोनों ही विभागों से उपेक्षित है।

नंगे पैर मार्ग से गुजरना होता है कष्टप्रद-
मार्ग से प्रतिदिन दर्जनों व वर्ष भर में हजारों श्रृद्धालु नर्मदा परिक्रमा के लिए पैदल व नंगे पैर निकलते है। इस पथरीले मार्ग से निकलते समय श्रृद्धालुओं की पीड़ा काफी बढ़ जाती है। बावजूद इसके मार्ग की दशा सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। परिक्रमावासियों में अधिकांश श्रृद्धालु वृद्ध होते है। इसी मार्ग से बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्कूली बच्चें सहित नगर से खंडवा की ओर जाने वाले वाहन चालक भी आवागमन करते है। जिससे यह मार्ग आवागमन के लिए बहुत उपयोगी है।

श्रृद्धालुओं को बचता है कई किमी का फेरा -
मां नर्मदा की परिक्रमा करने के लिए खिरकिया पोखरनी बायपास मार्ग प्रमुख मार्ग है, जिससे श्रृद्धालुओं को मुख्य मार्ग से निकलने करने के बजाय इस मार्ग से जाने मेंं कई किमी का फेरा बचता है। यदि नगर के मुख्य चौराहे से छीपाबड़ होते हुए पोखरनी पहुंचा जाए तो करीब 9 किमी का सफर तय करना पड़ेगा। लेकिन इस मार्ग से यह दूरी महज 3 किमी व इससे कम में तय की जा सकती है। इस मार्ग पर बड़े बड़े पत्थर निकल आए है। यह मार्ग परिक्रमा मार्ग के नाम से भी जाना जाता है।
संत ने कहा - तीसरी बार यात्रा पर आया, तब भी वही स्थिति -
मार्ग की स्थिति वर्षो से जस की तस बनी हुई है। मार्ग के निर्माण के दौरान पत्थर व मिट्टी से कच्चा मार्ग बनाया गया था, वह भी अब लंबे समय से बदहाल हो रहा है। नुकीले पत्थर व गिट्टी मार्ग पर पसरे हुए है। परिक्रमा करने वाले कई श्रृद्धालु दूसरी तीसरी बार परिक्रमा पर आ चुके है, लेकिन उन्हें मार्ग की स्थिति जस की तस मिली। विगत दिनों श्री गोरेदाऊ आश्रम वृंदावन के संत बाल योगी संत गोविंददास महाराज मां नर्मदा की तृतीय परिक्रमा पर आए थे। उन्होंने मार्ग की दुर्दशा पर कहा था कि पहली यात्रा के समय से ही स्थिति ऐसी ही है यहां अभी तक कुछ बदलाव नहीं हुआ। खिरकिया से पोखरनी पथरीले मार्ग पर पैरों के छाले फूट जाते है। उन्होंने पहली परिक्रमा 2009 में की थी। तब से अब तक कोई सुधार नही हुआ। इस मार्ग से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह भी नर्मदा परिक्रमा के दौरान गुजरे थे, तब उन्हें भी इस बदहाल मार्ग से गुजरना पड़ा था। हाल ही में पुणे के समीप आलंदी गुरु आश्रम के मोनी महाराज ने दंडवत यात्रा की थी, उन्हें भी इस मार्ग पर पसरे कीचड़ व पानी में से गुजरना पड़ा था।

इनका कहना है-
नर्मदा परिक्रमा क्षेत्र के मार्गो के निर्माण के लिए आगामी बैठक में प्रस्ताव लिया जाएगा।
जगदीश सोलंकी, अध्यक्ष, जपं खिरकिया

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