प्रशासन रीअलाइमेंट की बात कह रहा, एनएचएआइ ने प्रक्रिया से इनकार किया

फोरलेन निर्माण : भारत माला परियोजना के तहत बनना है सड़क, रुका हुआ है हरदा-बैतूल खंड के
तहत बनने वाले बायपास की अवार्ड राशि का वितरण

By: rakesh malviya

Published: 24 Nov 2020, 12:17 AM IST

हरदा. भारत माला परियोजना के तहत इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग को दो भाग में बांटकर बन रहे हरदा-बैतूल हाइवे (एनएच ४७) के बायपास निर्माण का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है। इसका शुरुआती स्थान बदलने को लेकर जिला प्रशासन और एनएचएआइ (नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया) अलग-अलग बात कह रहे हैं। प्रशासन जहां शुरुआती स्थल के रीअलाइमेंट संबंधी बात पर अडिग है, वहीं एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ऐसी किसी भी कार्रवाई से इंकार कर रहे हैं। दरअसल जिला प्रशासन बायपास के शुरुआती स्थल को नगरीय सीमा क्षेत्र में आने की बात कहते हुए भविष्य में टै्रफिक समस्या को बदलाव का कारण बता रहा। सड़क की लंबाई कम कर करीब 100 करोड़ रुपए की बचत का तर्क भी दिया जा रहा है। कलेक्टर संजय गुप्ता का कहना है कि बायपास की शुरुआत नगरीय सीमा से बाहर होने पर यातायात की समस्या नहीं रहेगी। इसकी कार्रवाई शासन स्तर पर जारी है। जब उनसे यह पूछा गया कि एनएचएआइ के स्थानीय अधिकारी ऐसी किसी भी कार्रवाई से इनकार कर रहे है, तो उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर इसका परीक्षण हो रहा है। इस संबंध में पत्राचार जारी है। दूसरी ओर एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विपिन मंगला का कहना है कि जिला प्रशासन की अगुवाई वाली बैठक में ही तय हुआ था कि बायपास किस स्थान से शुरू होगा। उनकी ओर से रीअलाइमेंट कराने को लेकर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है। निर्माण कंपनी का यह डव्हलपमेंट पीरियड है। टिमरनी की ओर जमीन अधिग्रहण शुरू हो चुका है। बिजली खंभे हटाने का काम जारी है। यहां (छोटी हरदा व उड़ा में) प्रशासन की ओर से अवार्ड राशि वितरण नहीं होनेे से कार्य रुका है।

छोटी हरदा के स्टैंड के पास से होना है शुरुआत
उल्लेखनीय है कि छोटी हरदा, उड़ा, अबगांव खुर्द व भाट परेटिया से होकर निकलने वाले बायपास का शुरुआती स्थल छोटी हरदा गांव के बस स्टैंड पर नर्मदा मंदिर के पास से तय हुआ है। इसकी अवार्ड राशि प्रशासन को मिल चुकी है, लेकिन इसका वितरण यह कहते हुए नहीं किया जा रहा कि रीअलाइमेंट की प्रक्रिया विचाराधीन है। यानि ऐसा होता है तो मौजूदा प्रोजेक्ट के तहत जिन किसानों का अवार्ड (मुआवजा) पारित हुआ है उसके वितरण में पेंच फंस सकता है। खबर है कि री अलाइमेंट के तहत बायपास का शुरुआती स्थल छोटी हरदा से हटाकर अतरसमा बस स्टैंड के पहले किया जा सकता है।

किसानों को जल्द दी जाए अवार्ड की राशि
इधर, कांग्रेस ने उन किसानों को अवार्ड की राशि जल्द देने की मांग की है जिनकी जमीन इंदौर-बैतूल फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित की जा रही है। हंडिया ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष महेश पटेल ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि इस संबंध में संपूर्ण प्रक्रिया हो चुकी है। अवार्ड राशि भी प्रशासन के पास आ चुकी। इसके बावजूद किसानों को वितरण नहीं किया जा रहा। भुगतान नहीं होने से निर्माण कार्य रुका हुआ है। यह देरी क्यों की जा रही इसकी उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए। ऐसा न होने पर कांग्रेस किसानोंके साथ आंदोलन करेगी। सोमवार को किसानों के साथ इस मामले में पूर्व विधायक डॉ. आरके दोगने से भी चर्चा की गई। डॉ. दोगने ने कहा कि प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि निर्माण में देरी क्यों हो रही है। जब समस्त औपचारिकताएं पूर्ण हो चुकी हैं तो किसके निर्देश पर रीअलाइमेंट की कार्रवाई की जा रही है। रीअलाइमेंट होता है तो दो वर्ष लगेंगे। इस देरी का जवाबदार कौन रहेगा। इस संबंध में प्रशासन से चर्चा की जाएगी।

हरदा-बैतूल फोरलेन एक नजर में
एनएचएआइ के अनुसार 30 किमी लंबाई के हरदा-बैतूल फोरलेन के निर्माण पर ५५० करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसका 24 किमी हिस्सा ग्रीन फील्ड में रहेगा। यानि खेतों से होते हुए यह सड़क पूरी तरह नई बनेगी। इसके लिए १५० करोड़ रुपए की अवार्ड राशि देकर १७५ हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। फोरलेन पर 1 रेल ओवरब्रिज सहित 20 पुल बनेंगे। इनमें से 6 पुलों का निर्माण नदियों पर तथा 13 का निर्माण अन्य सड़कों के ट्रैफिक को क्रॉस कराने के लिए होगा।

rakesh malviya Desk
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