अब 18 टन की जगह 22 टन का वजन झेल पाएंगी पटरियां, रेलवे कर रहा ट्रेक में बदलाव

-9 करोड़ की मशीन से लगाई जा रही गुणवत्तापूर्ण पटरी, 1३५ सेकंड में जुड़ती हैं पटरियां

-रेलवे स्टेशन क्षेत्र में लग रही नई पटरियां
-भुसावल से आयी अत्याधुनिक मशीन

खिरकिया। कई वर्षों से रेल यातयात और परिवहन का बोझ उठा रही पटरियों को रेलवे द्वारा बदला जा रहा है। पुरानी पटरियों को निकालकर नई व उच्च गुणवत्ता की पटरियां लगाने 9 करोड़ की अत्याधुनिक मशीन बुलाई गई है जिससे स्टेशन क्षेत्र में ब्लॉक लेकर पटरियां जोडऩे का काम किया जा रहा है।
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अप/डाउन लाइन पर फोकस
रेलवे स्टेशन की दोनों लूप लाइन यानी अप एवं डाउन की पटरियां बदली जा रही हंै। अभी अप लाइन ओर कार्य किया जा रहा है। यहां वर्षों पुरानी पटरियों को निकाला जा रहा है। उनके स्थान पर नई पटरियां लगायी जा रही हैं। पुरानी पटरी होने से कुछ जमीन में धंस रही हैं तो कुछ क्षतिग्रस्त हो रही हंै। सुरक्षा व्यवस्था के चलते यह कार्य कराया जा रहा है।
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पटरियों की बढ़ायी गुणवत्ता, उठा सकेंगी अधिक भार
रेल परिवहन का मुख्य आधार ही पटरी है, ऐसे में पटरियों की सुरक्षा के लिए उसकी गुणवत्ता में सुधार किया गया है। पूर्व में जहां 52 किलो की पटरियों के टुकड़े लगाए जाते थे वहीं अब इसकी क्षमता में वृद्धि करते हुए 60 किलो कर दिया गया है। पूर्व में पटरियों के भार उठाने की क्षमता 18 टन से कुछ अधिक होती थी वहीं अब पटरियों की क्षमता 22 टन की जा रही है।
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9 करोड़ की मशीन बुलाई
रेलवे द्वारा 13-13 मीटर की पटरियों को टुकड़ों में लगाया जा रहा है। दो टुकड़ों को जोडऩे के लिए उसमें वेल्डिंग करायी जा रही है। इसके लिए 9 करोड़ की प्लस वेल्डिंग मशीन का उपयोग किया जा रहा है। पटरियों पर चलने वाली यह मशीन टुकड़ों में वेल्डिंग करके आगे बढ़ जाती है। एक ज्वाइंट को वेल्डिंग करने में 135 सेकंड ही लगते हैं। पहले यह कार्य रेलकर्मी करते थे जिसमें काफी समय लगता था।
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काम करने रेलवे ने लिया ब्लॉक
पटरियों को बदलने के लिए रेलवे ने ब्लॉक लिया है। अभी तीन से चार दिन और कार्य चलेगा। वहीं सोमवार को ब्लॉक लेकर कार्य किया गया। ब्लॉक के कारण ट्रेनों का आवागमन बंद कर दिया जाता है।
इनका कहना है
वर्षों पुरानी पटरियों को बदलने का कार्य किया जा रहा है। उच्च गुणवत्ता वाली पटरियां लगायी जा रही है जिसकी क्षमता पूर्व की पटरियों से अधिक है। वेल्डिंग कराने आधुनिक मशीन उपयोग में लायी जा रही है। आगामी 3 से 4 दिनो में कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
वीरेश यादव, पीडब्ल्यूआई खिरकिया

Rahul Saran Reporting
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