गर्मी में डेढ़ करोड़ से ग्रामीणों की प्यास बुझाएगा पीएचई

मुख्यमंत्री योजना अंतर्गत चार गांवों में अधूरी पड़ी पेयजल योजनाएं, ग्रामीणों को नहीं मिल रहा लाभ

By: poonam soni

Published: 01 Mar 2020, 01:35 PM IST

हरदा। फरवरी माह के अंतिम हफ्ते से जिले में गर्मी ने दस्तक दे दी है। प्रतिदिन गर्मीका पारा बढऩे से आगामी दिनों में जलसंकट गहराने के आसार बढ़ते जा रहे हैं। किंतु अभी तक लोक स्वास्थ्या यांत्रिकी विभाग द्वारा गांवों में बंद पड़ी 12 नल-जल योजनाओं को अभी तक चालू नहीं करवाया गया।

नल-जल का काम अधूरा
वहीं करोड़ों की लागत से स्थापित की जा रही मुख्यमंत्री नल-जल का काम भी अधूरा पड़ा हुआ है। लेकिन इस बार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग गर्मीमें डेढ़ करोड़ रुपए खर्चकरके ग्रामीणों की प्यास बुझाने की तैयारी कर रहा है।शासन को पत्र लिखकर बजट मांगा गया है।

मुख्यमंत्री योजना के 4 गांवों में अधूरे पड़े काम
प्रदेश सरकार ने गांवों में पेयजल की किल्लत दूर करने के लिए दो साल पहले मुख्यमंत्री ग्राम नल-जल योजना के अंतर्गत जिले के 15 गांवों में लगभग 12 करोड़ रुपए की लागत से पाइप लाइन बिछाने, ट्यूबवेल खनन, पेयजल टंकी निर्माण सहित अन्य काम शुरूकराया था। लेकिन तीन साल में भी इन योजनाओं का काम पूरा नहीं हुआ है, जिसमें ग्राम करणपुरा, धुरगाड़ा, नयागांव, रुंदलाय शामिल है। जबकि 11 गांवों में कार्यपूर्ण हुआ है, लेकिन ग्रामीणों को पेयजल का लाभ नहीं मिल रहा है।

पंचायतों की लापरवाही से बंद हुईं योजनाएं
लोक स्वास्थ्या यांत्रिकी विभाग ने हरदा, खिरकिया और टिमरनी विकासखंड के गांवों में करोड़ों रुपए की लागत से 131 नल-जल योजनाएं स्थापित की थी। इसके जरिए ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंच रहा था। लेकिन पंचायतों द्वारा योजनाओं का मेंटनेंस नहीं किया गया। इसके कारण एक-एक करके योजनाएं बंद होती जा रही हैं। पिछले दो साल से 12 गांवों की नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हुईहैं। इन गांवों के ग्रामीणों को निजी किसानों एवं हैडपंपों के सहारे रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक जिन गांवों में योजना बंद पड़ी हैं, उसमें कहीं पर पाइप लाइन क्षतिग्रस्त, विद्युत मोटरें खराब तथा बिजली समस्याओं के कारण पानी की सप्लाई बंद पड़ी हुई है। गर्मी के पूर्व विभाग को नल-जल योजनाओं को चालू करवाना चाहिए।

पानी मुहैया कराने खर्च होगा डेढ़ करोड़
हर साल अपै्रल से लेकर मईमाह तक भीषण गर्मीके दौरान जिले के गांवों के जलस्त्रोत पूर्णरूप से बंद हो जाते हैं। जहां के लोग नदियों में झिरी खोदकर प्यास बुझाते हैं। इन गांवों के लोगों को पानी मुहैया कराने के लिए पीएचई विभाग ने डेढ़ करोड़ की कार्ययोजना बनाई है। इसमें विभाग ने 50 लाख रुपए से ट्यूबवेलों का खनन, हैंडपंपों में 10 लाख से राइजर पाइप बढ़ाने, 30 लाख की सिंगल फेस मोटरें और जलस्त्रोतों के रिपेयरिंग के लिए 60 लाख रुपए खर्च करने की योजना बनाई है। गर्मीके पहले विभाग ने शासन से बजट मंागा है।

जिले के 48 गांवों में गहराता है जलसंकट
विभाग के मुताबिक जिले के तीनों ब्लाकों करीब 48 गांवों में तीन सालों से गर्मी के दिनों में जलसंकट गहराता है। इसके अलावा 193 बसाहटों के 495 हैंडपंप प्रभावित होते हैं। इसलिए उनमें राइजर पाइप बढ़ाए गए हैं। इस वर्ष भी इन गांवों को प्राथमिकता से चिन्हित किया गया है। आगामी मार्च-अपै्रल माह में जलस्तर गिरता है तो ट्यूबवेलों और हैंडपंपों में सिंगल फेस मोटर और राइजर पाइप बढ़ाया जाएगा। जिले 511 गांवों में 4140 हैंडपंप हैं। वर्तमान में 40 हैंडपंप तकनीकी खामियों के कारण बंद पड़े हुए हैं।

इन गांवों में बंद पड़ी नल-जल योजना
रेलवा, गोगिया, कानपुरा, गोपालपुरा, बेडिय़ाकला, जामन्याकला, निमाचाखुर्द, टेमरुबहार, नयापुरा, हीरापुर, भोनखेड़ी, अबगांवकलां शामिल हैं। सहित १२ गांवों में नल-जल योजना बंद पड़ी हुई है।

जिले के तीनों विकासखंडों में लगभग 12 नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हुई हैं, जिन्हें चालू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री नल-जल योजना अंतर्गत चार गांवों में कार्यहोना बाकी है। गर्मीमें जलसंकट से निबटने के लिए डेढ़ करोड़ की कार्ययोजना बनाई है। शासन से बजट मांगा गया है।
जेएस ठाकुर, एसडीओ, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, हरदा

Show More
poonam soni
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned