खरीदी में 1 करोड़ 36 लाख के चने की हेराफेरी, जोड़तोड़ से घटत कम की जा रही

जोड़तोड़ से घटत कम की जा रही
- शुरुआती जांच में 3611 क्विंटल की गड़बड़ी सामने आई थी, गलत बिल बनने को कारण बताकर घटत का आंकड़ा कागजों पर अब २८०४ क्विंटल पर पहुंचा
- कलेक्टर ने सहकारी समिति चौकड़ी का पूरा स्टॉक जमा कराने के लिए दी है एक सप्ताह की मोहलत

By: gurudatt rajvaidya

Published: 26 Jun 2020, 08:04 AM IST

पत्रिका लगातार

हरदा। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा खिरकिया से संबद्ध सहकारी समिति चौकड़ी द्वारा की गई चना खरीदी में 1 करोड़ 36 लाख ६९ हजार ५०० रुपए कीमत के 2804 क्विंटल की हेराफेरी सामने आई है। शुरुआती जांच में यह आंकड़ा ३६११ क्विंटल निकला था। गलत बिल बनने को कारण बताकर जोड़तोड़ से अब इस गड़बड़ी में सुधार किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि जिले के 22 हजार हेक्टेयर रकबे में बीते रबी सीजन में चना की बुवाई हुई थी। समर्थन मूल्य 4875 रुपए प्रति क्विंटल के भाव चना बेचने के लिए ९३३९ किसानों ने पंजीयन कराया था। जिले के 15 खरीदी केंद्रों पर 15 जून तक इनमें से ८१८६ किसानों से नागरिक आपूर्ति निगम के लिए ३३३१५.८३ मीट्रिक टन चना खरीदा गया। इसमें से ३३३१२.४३ मीट्रिक टन चना निगम के गोदामों में पहुंचा। यानि 3.4 मीट्रिक टन चना जमा नहीं हुआ। इसके एवज में किसानों को १२ करोड़ १६ लाख का भुगतान हो चुका। गोदाम में जमा होने से बची उपज को लेकर अधिकारियों ने पड़ताल की तो सामने आया कि सहकारी समिति चौकड़ी द्वारा बड़ी मात्रा में चना गोदाम में जमा नहीं कराया गया। सहकारी बैंक के सुपरवाइजर की रिपोर्ट पर मुख्यालय से जांच के आदेश जारी होने के बाद नोडल अधिकारी सतीष सिटोके ने 20 जून को इस मामले की शुरुआती जांच की थी। तब समिति के स्टाक में प्रथम दृष्टया 3611 क्विंटल की कमी सामने आई थी। यानि यह उपज खरीदी तो गई, लेकिन गोदाम में जमा नहीं हुई। हालांकि उस दिन सिटोके ने पत्रिका को बताया था कि स्टाक में 4845 क्विंटल उपज बताई गई है। उन्हें इतनी उपज मौके पर नहीं मिली थी।
अब गड़बड़ी को सुधारा जा रहा
सूत्रों के अनुसार सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी सिटोके द्वारा जांच का अंतरिम प्रतिवेदन सहकारिता विभाग को दिया जा चुका है। इसमें बताया गया है कि २८०४ क्विंटल चना की घटत है। बिल गलत बनने को इसका कारण बताया जा रहा है। अब इस गड़बड़ी को सुधारा जा रहा है। इसके बावजूद भी बड़ी मात्रा में घटत आने की आशंका है।
मामला पता लगते ही रोका गया भुगतान
सहायक पंजीयक सहकारिता (एआरसीएस) अखिलेश चौहान ने पत्रिका को बताया कि सहकारी समिति चौकड़ी द्वारा ८५३ किसानों से करीब ३७००० क्विंटल चना खरीदा गया था। इसमें से २८९४४ क्विंटल जमा हुआ था। 12 जून को खरीदी प्रक्रिया पर संशय हुआ था। तब तक ८०५६ क्विंटल परिवहन शेष था। इसके बाद भुगतान पर रोक लगा दी थी। है। समिति में २६ मई तक चना बेचने वाले किसानों को करीब ४ करोड़ ९५ लाख का भुगतान हो चुका है। उन्होंने बताया कि इस गड़बड़ी का असर किसानों के भुगतान पर नहीं होगा। जांच पूरी होते ही बचे भुगतान आदेश जारी किए जाएंगे।
बीते साल का भुगतान कुछ दिन पहले हुआ
ज्ञात हो कि बीते साल भी इस समिति ने चना बेचने वाले कई किसानों को भुगतान नहीं किया था। गोदाम में उपज जमा न होने से यह स्थिति बनी थी। कई बार शिकायत करने के बाद कुछ दिन पहले ही 41 किसानों को 22 लाख का भुगतान किया गया था।
पंजीयन में गड़बड़ी से होता है फर्जीवाड़ा
सूत्र बताते हैं कि कई किसानों द्वारा गेहूं व चना दोनों का समर्थन मूल्य खरीदी का पंजीयन कराया जाता है। यानि जिन किसानों ने केवल गेहूं की बुवाई की होती है वे चना का पंजीयन भी करा लेते हैं। इनकी सूक्ष्म जांच न होने से ऐसे पंजीयन पर चना खरीदी दर्शा दी जाती है। दूसरी ओर जिन किसानों की उपज वास्तव में खरीदी जाती है उसे जमा कराके नागरिक आपूर्ति निगम से भुगतान जारी करा लिया जाता है। खरीदी के अंतिम चरण में बाजार से कम कीमत पर चना खरीदकर वास्तविक खपत के स्टाक को बराबर किया जाता है। बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर के लाखों रुपए की बंदरबांट होती है। यह घाटा सरकार के खाते में जाता है। उल्लेखनीय है कि हर बार की तरह इस वर्ष भी समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होते ही दूसरे राज्यों से चना लाने के मामले सामने आने लगे थे। पिछले सालों में मूंग व चना खरीदी से जुड़े ऐसे मामलों को राजनीतिक रसूख से दबा दिया गया।
और इधर, 15 किसानों का गेहूं का भुगतान अटका
जिले में इस वर्ष 155 खरीदी केंद्रों पर ४०६८७ किसानों से ४ लाख ९६ हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। इसमें से ४०६७२ किसानों को ९ अरब ५२ करोड़ रुपए का भुगतान हो चुका। सहायक आपूर्ति अधिकारी बीएस डुडवे ने बताया कि १५ किसानों का भुगतान रुका है। इसके लिए खाद्य विभाग के संचालक को पत्र लिखा गया है।

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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