श्रावण सोमवार - चमत्कारी घटनाओं के लिए प्रसिद्ध है जिजगांव खुर्द का श्री शंकर पार्वती मंदिर

एक ही स्थान पर विराजित है प्रतिमाएं एवं समाधि स्थल

By: gurudatt rajvaidya

Published: 20 Jul 2020, 08:03 AM IST

दीनबंधु गौर/ बालागांव . जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूर दिनकरपुरा जिजगांव खुर्द में मटकुल नदी किनारे स्थित प्राचीन श्री शंकर पार्वती मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। इसकी स्थापना शंकरानंद महाराज ने की थी। वे वर्ष 1991 में नजदीकी ग्राम सिन्धखेड़ा में भोजन के लिए गए थे, तभी वे ब्रम्हलीन हो गए। इसके बाद ग्रामीणों द्वारा गंगादशमी पर शंकर पार्वती मंदिर के प्रांगण में समाधि दी गई। इनके बाद इस मंदिर में गोविंदानंद महाराज आए। जो 3 वर्ष तक रहे। फिर विजय चेतन महाराज आए जो लगभग 10 वर्ष तक रहे। इस दौरान शंकर पार्वती मंदिर में बहुत से आयोजन होते रहे। वर्तमान में यहां स्वामी रत्नानंद गिरि महाराज हंै।
एक ही स्थान पर विराजित है प्रतिमाएं एवं समाधि स्थल.
इस प्राचीन मंदिर में चारों तरफ आम के पेड़ है। यहां दुर्गा देवी, शंकर पार्वती, दो दक्षिण मुखी हनुमान की प्रतिमाएं विराजित है। गौशाला बनी है। शंकरानंद महाराज का समाधि स्थल है। यहां की मटकुल नदी सदैव प्रवाहित रहती है।
श्रावण एवं शिवरात्रि पर लगता है मेला.
क्षेत्र का सबसे प्राचीन मंदिर होने के कारण यहां श्रावण माह में प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण शंकर पार्वती के दर्शन करने आते हैं। जलाभिषेक एवं दुग्ध अभिषेक कर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करते हैं। शिवरात्रि पर यहां पर मेला लगता है। वर्षभर धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं
यहां की रोचक एवं चमत्कारी घटनाएं
गांव के बुजुर्ग मांगीलाल शर्मा, नर्मदा प्रसाद राठौर ,रामदयाल शर्मा ने बताया कि शंकरानंद के पास प्रसाद का एक पात्र हुआ करता था। इसमें कभी भी प्रसाद खत्म नहीं होता था चाहे कितने भी श्रद्धालु एक साथ प्रसाद लेने आ जाएं। उन्होंने बताया कि एक बार कन्या भोजन चल रहा था। इस दौरान कढ़ाई में तेल खत्म हो गया, तब महाराज ने नदी में से पानी लाकर उसमें पुरी निकलने की आज्ञा दी। ग्रामीणों ने कढ़ाई में पानी लाकर डाल दिया गया। आसानी से कढ़ाई में से पुरी निकाली गई और कन्या भोजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके दूसरे दिन बाबा ने दो डिब्बे तेल नदी में प्रभावित करवाएं।
२००६ में हुआ था श्री राम नाम जप यज्ञ-
यहां जिले का सबसे बड़ा श्री राम नाम जप यज्ञ 2006 में नेपाली बाबा द्वारा किया गया था। इसमे विभिन्न प्रदेश के भक्त भी शामिल हुए थे। इस यज्ञ में 11 मंजिल की यज्ञशाला बनाई गई थी। इसमें 101 कुंडों में 1100 जोडों़े आहुति दी थी। साथ ही 1100 शिवलिंग का निर्माण कराया गया था। वर्तमान में रजत शर्मा, दिलीप शर्मा, गौतम शर्मा,अभिषेक शर्मा, सुनील रायखेरे सहित अन्य ग्रामीण सेवा देते है।

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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