अभी तक विभाग निर्धारित नहीं कर पाया खरीदी करने वाली समितियां

समर्थन मूल्य खरीदी को लेकर नहीं दिख रही तैयारियां
लेटलतीफी की भेंट चढ़ सकता है उपार्जन कार्य

By: बृजेश चौकसे

Published: 19 Mar 2020, 12:28 PM IST

खिरकिया. इन दिनों रबी फसल की कटाई कार्य किसानों द्वारा तेजी से किया जा रहा है, लेकिन समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीदी को लेकर शासन स्तर से तैयारी फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि विभाग द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर प्रारंभिक तैयारी तो की जा रही है। जिसमें भी लेटलतीफी हो रही है। सहकारिता विभाग द्वारा 25 मार्च से समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रारंभ होने की बात कही जा रही है, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए निर्धारित तिथि से समर्थन मूल्य की खरीदी होना मुश्किल में दिखाई दे रहा है। अभी तक खरीदी कार्य करने वाली समितियां ही निर्धारित नहीं है। समितियों द्वारा विगत वर्षो में की गई अनियमितताओं के चलते उन पर संशय बना हुआ है। विभाग द्वारा समितियों को हटाकर नए केन्द्र बनाए जाने पर भी विचार कर रही है।
अपात्र हुई चौकड़ी एवं धनवाड़ा समिति-
समर्थन मूल्य पर खरीदी करने वाले सेवा सहकारी समिति चौकड़ी एवं धनवाड़ा तहसील के प्रमुख समितियों मेें शामिल है, लेकिन शासन द्वारा इन समितियों को खरीदी के लिए अपात्र कर दिया गया है। गत वर्ष समितियों द्वारा गेहूं उपार्जन के साथ चने का उपार्जन भी समर्थन मूल्य पर किया गया था। लेकिन चने उपार्जन में अधिक घटत दिए जाने के कारण विभाग द्वारा समितियों को अपात्र कर दिया गया। पूर्व में तहसील के अंतर्गत आने वाले अन्य समितियों को भी अपात्र कर दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हे पंजीयन व खरीदी की अनुमति दे दी गई। जिससे किसानो की चिंताएं कुछ हद तक कम हुई है , लेकिन अब इन समितियों के बंद होने पर इनसे संबद्ध ग्रामों के किसान चिंतित है।
नए उपार्जन केन्द्र बनाने की हो रही तैयारी-
चौकड़ी एवं धनवाड़ा समिति केन्द्रों को अपात्र किए जाने पर अब इनके स्थान पर नए केन्द्र बनाए जाने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि चौकड़ी समिति के स्थान पर पाहनपाट को केन्द्र बनाया जा सकता है। जिसके लिए जिला उपभोक्ता भंडार का प्रस्ताव बनाकर भी विभाग द्वारा भेज दिया गया है। जहां से स्वीकृति मिलने पर खरीदी केन्द्र बनाया जाएगा। एक अन्य केन्द्र बनाए जाने की योजना है, जो धनवाड़ा समिति की कमी को पूरी करेगी। फिलहाल इसको लेकर निर्णय होता नहीं दिख रहा है। इससे किसान भी असमंजस की स्थिति में है कि कौन से केन्द्र पर उनकी उपज की खरीदी होगी।
लेटलतीफी के चलते कम दाम पर बिक जाएगी उपज-
किसानों द्वारा तेजी से कटाई कार्य किया जा रहा है। कटाई होने के बाद किसान ग्रीष्मकालीन फसलो की तैयारियों में जुट गए है। ऐसे में उन्हें लागत लगाने के लिए राशि का आवश्यकता है। समर्थन मूलय खरीदी में यदि लेटलतीफी होती है, तो इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ेगा। किसानों द्वारा मंडी में अपनी उपज को कम दामो पर विक्रय किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कई किसानो की उपज समर्थन मूल्य खरीदी प्रारंभ होने के पहले ही बिक जाएगी।
४२ हजार से अधिक रकबे में बोई है गेहूं की फसल
अच्छी बारिश होने से इस वर्ष रबी के रकबे में वृद्धि हुई है। अभी तक फसल किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा से प्रभावित नहीं हुई है। जिससे रिकार्ड उत्पादन होने की संभावना है। कृषि विभाग के अनुसार कुल 55 हजार 360 हेक्टेयर में रबी की विभिन्न फसलों की बोवनी की गई है। जिसमें गेहूं की फसल का सबसे अधिक रकबा 42 हजार 337 हेक्टेयर है। इसके अलावा दूसरे प्रमुख फसल चना 10 हजार 873 हेक्टेयर में बोयी गई है। दोनों ही प्रमुख उपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर होना है। मसूर 57 हेक्टेयर, सरसो ़60 हेक्टेयर, मटर 253 हेक्टेयर, अलसी 41 हेक्टेयर, गन्ना 49 हेक्टेयर, मक्का 627 हेक्टेयर एवं सब्जी व अन्य 1061 हेक्टेयर में बोयी गई है।
इनका कहना है-
तहसील में चौकड़ी एवं धनवाड़ा के स्थान पर दो नए केन्द्र बनाए जा रहे है, जबकि शेष समिति गत वर्ष के अनुसार की खरीदी कार्य करेगी। 25 मार्च से समर्थन मूल्य पर खरीदी कार्य प्रारंभ होगा। इसके लिए विभागीय तैयारियां चल रही है।
अखिलेश चौहान, सह आयुक्त, सहकारिता विभाग

बृजेश चौकसे
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned