अचानक सूखकर खराब हो गई सोयाबीन फसल, किसानों ने की सर्वे कराकर राहत एवं बीमा राशि देने की मांग

किसानों एवं संगठनों ने शासन से लगाई मदद की गुहार

By: gurudatt rajvaidya

Published: 25 Aug 2020, 08:02 AM IST

खिरकिया. क्षेत्र के किसानों के खेतों में लगी फसलें अचानक नष्ट हो रही हंै। प्राकृतिक बीमारियों से जूझ रही फसलों से किसानों को अब कोई आस नहीं है। किसानों का कहना है कि अब लागत निकलना तो दूर इसे कटाना भी महंगा पड़ेगा। ऐसे में अब किसान मदद की उम्मीद शासन से लगा रहे है। इससे उन्हें फसलों की क्षतिपूर्ति और फसल बीमा का लाभ मिलने से नुकसान की भरपाई हो सके। किसान प्रशासन से फसलों का सर्वे कराने की मांग कर रहे हैं। किसानों की मांगों को लेकर राजनैतिक व किसान संगठन भी आगे आ रहे हैं। पिछले दो तीन दिन से फसल खराब होने के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैंं। सोमवार को भारतीय किसान संघ, भाजपा एवं कांग्रेस के पदाधिकारियों ने किसानों के साथ तहसील कार्यालय पहुंचकर सर्वे कराकर फसल बीमा का लाभ दिलाए जाने की मांग की है।
भाकिसं ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीदार को सौंपा ज्ञापन-
भारतीय किसान संघ की तहसील कार्यकारिणी ने तहसीलदार अलका एक्का को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया कि पिछले 3 से 4 दिन से तहसील के सभी ग्रामों में सोयाबीन की फसल अचानक प्राकृपिक आपदा के कारण पूरी तरह सूखकर खराब हो रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। संघ ने मांग की है कि शासन प्रशासन एवं संबंधित विभाग के अधिकारी खराब हुई सोयाबीन, उड़द, मूंग सहित अन्य खरीफ की फसलों का तुरंत सर्वे कराएं। किसानों को राहत एवं बीमा राशि का लाभ दिया जाए। इसके अलावा चारूवा सब स्टेशन से जुड़ी घरेलू बिजली में बार बार हो रही ट्रिपिंग को दुरूस्त कराया जाए। आागामी रबी के लिए डीएपी एवं यूरिया खाद की पर्याप्त व्यवस्था कराई जाए। 2019-20 सोयाबीन फसल की 75 प्रतिशत राहत राशि तथा बीमा राषि एक सप्ताह के अंदर किसानों के खातों में जमा कराई जाए। इस दौरान तहसील मंत्री रूपसिंह राजपूत सहित अन्य किसान मौजूद थे।
कांग्रेस ने कहा - किसानों के सामने खड़ा हो गया आर्थिक संकट
किसानों की फसल खराब होने को लेकर कांग्रेस द्वारा भी अनुविभागीय अधिकारी के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें बताया कि खिरकिया एवं सिराली क्षेत्र के सभी गांव में सोयाबीन फसल पीला मोजक जैसी बीमारी के कारण एक दो दिन में सूख गई हंै। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों को गांव में भेजकर बची हुई फसल की बीमारी की रोकथम को लेकर उपचार किसानो को बताएं जाएं। जो फसल खराब हो गई है, उसका सर्वे कर किसानों को राहत राशि दी जाए। यदि किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता है, तो किसानों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष शंकरसिंह सोलंकी, असलम खान, दशरथ पटेल, भूपेन्द्र राजपूत सहित कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे।
खेतों में कराया जाए सर्वे, विभाग किसानों को दे जानकारी
इस संबंध में भाजपा मंडल अध्यक्ष गोलू राजपूत ने कार्यकर्ताओं के साथ तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है। इसमें उन्होंने बताया कि किसानों के समस्या को ध्यान में रखे हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों को उचित सलाह दी जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि खराब हुई फसलों का सर्वे कराकर किसानों को राहत दिलाई जाए।

इनका कहना है-
विभिन्न संगठनों एवं किसानों सेे फसल खराब होने की शिकायतें मिली हैं। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराकर मार्गदर्शन अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अलका एक्का, तहसीलदार, खिरकिया
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देखते ही देखते तीन दिन पूरी तरह खराब हो गई सोयाबीन फसल
रहटगांव. 3 दिन में सैकड़ों एकड़ में लगी सोयाबीन की फसल बीमारी से ग्रसित होकर सूखने लगी है। फसल में फूलों के बाद फलियां आने से किसान इस वर्ष बंपर पैदावार होने की अनुमान लगा रहे थे। लेकिन अचानक फसलें मुरझाकर सूख गई हैं। ऐसे में अब किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल हो जाएगी। अब किसान शासन प्रशासन से ही उम्मीद लगाए है कि शीघ्र ही सर्वे कर मुआवजा मिलेगा। ग्राम नजरपुरा, कालपी, गाढ़ामोड़, फुलड़ी, खमगांव, कासरनी, उमरदा, धनगांव, पांडरमाटी, रहटगांव सहित तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांव में सोयाबीन की फसल खराब होने से किसान परेशान है। कृषक राकेश गौर, अरुण गौर, संतोष मालवीया ने बताया कि इस प्रकार की फसलों का खराब होना पहली बार देख रहे हैंं। फसल तो दूर की बात घरों के आंगन में लगी लौकी और गिलकी के बेला तक मुरझाकर सूख गई हंै। कृषकों ने बताया कि हजारों रुपए की लागत लगाकर फसल की बोनी बखरनी कर अच्छी पैदावार की उम्मीद लगा रखी थी। देखते ही देखते ३ दिन में पूरी फसल खराब हो गई। कृषि विभाग, राजस्व विभाग को फसलों का निरीक्षण व सर्वे कर किसानों को उचित सलाह देना चाहिए।
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सोयाबीन के साथ ही खराब हुई सब्जी की बेल
मसनगांव. क्षेत्र के अधिकांश खेतों में लगी सोयाबीन की फसल खराब हो गई है। रविवार सुबह जिन खेतों में सोयाबीन फसल अच्छी दिखाई दे रही थी वह दोपहर में धूप निकलने के बाद मुरझाकर सूख गई। गांव के अलावा डोमनमऊ, सालाबेड़ी, गांगला, कमताड़ा, पलासनेर, केलनपुर व बीड़ के खेतों में भी यही स्थिति बनी हुई है। डोमनमऊ के किसान मुकेश पटेल ने वताया कि पहले खेतों में कहीं कहीं पीले टांके दिखाई दे रहे थे लेकिन रविवार को सुबह धूप निकलने के पश्चात पौधे मुरझा गए सोयाबीन के अलावा बगीचों में लगी सब्जी के बेेल व पौधे तथा कई खेतों में लगी तिल्ली के पौधे भी मुरझा कर खराब हो गए। किसानों ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जिस दवा के स्प्रे की सलाह दी जा रही है उसका स्प्रे करने के बावजूद उसका असर फसलों में नहीं दिखाई दे रहा है ऐसे में लागत में वृद्धि हो रही है। पहले से ही फसलों में पांच स्प्रे हो चुके है। किसानों ने शासन से फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा तथा बीमा राशि देने की मांग की है।
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कृषि विभाग की टीम ने खेतों में पहुंचकर देखी फसलों की स्थिति
बालागांव . विगत 2 सप्ताह में सोयाबीन फसल प्राकृतिक प्रकोप के कारण बर्बाद होती नजर आ रही है । सोमबार को कृषि विस्तार अधिकारी एके यादव व टीम ने ग्राम नकवाड़ा में खेतों के भ्रमण कर फसलों की स्थिति देखी। कृषकों को समझाइश दी गई। कृषकों का कहना है कि प्रति सप्ताह एक नए प्राकृतिक प्रकोप के कारण फसल की स्थिति सुधारना नामुमकिन सा नजर आ रहा है। कृषकों ने शासन एवं प्रशासन से मांग की है कि फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाया जाए। इस दौरान नकवाड़ा के उपसरपंच अरुण राजपूत, कृषक राजू सिन्दा, संतोष, जमना प्रसाद छापरे, आनन्द चाबड़ा पटवारी सहित अन्य कृषक उपस्थित थे।
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बारिश के बीच धूप निकलने से सूखने लगी फसल
कांकरिया. गांव सहित आसपास के दर्जनों गांव में लगी सोयाबीन फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे है। पिछले 2 दिन में रुक रुककर बारिश होने व बीच में धूप निकलते ही फसलें सूखने लगी है। पीला मोजक से सोयाबीन के पौधे मुरझाकर सूखने लगे है। ऐसे में इस वर्ष किसानों को लागत निकलना मुश्किल होगा। महंगी दवा का छिड़काव करने के बावजूद कारगर साबित नहीं हो रही है। कांकरिया, बांरगी, बारंगा, बम्हनगांव, धनवाड़ा , खमलाय, हरपालिया, बडऩगर, काल्याखेड़ी, बाबर ,भागपुरा सहित अन्य गांवों में फसलें खराब हो रही हैं।
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महंगी दवाओं के स्प्रे के बाद भी बीमारियों पर नहीं लगा अंकुश
आलमपुर. क्षेत्र में किसानों की सोयाबीन की फसल खराब हो गई है। तेज बारिश होने से पौधे में लगे फल गिरने के साथ ही फसल सडऩे लगी है। आलमपुर, दूधकच्छ कला, पानतलाई, छिदगांव तमोली, बहरागांव, आदि गांवों में सोयाबीन की फसल बीमारियों की चपेट में आ गई हैं। पीला मोजक के कारण पौधे पीले पड़कर सूखने लगे हैं। आलमपुर के रामकृष्ण चौधरी, विष्णु प्रसाद चाचरे, दूधकच्छ कला के शेरसिंह राजपूत, मंगलसिंह राजपूत, बेहरागांव, पानतलाई छिदगांव तमोली के किसान भागवतसिंह राजपूत, सत्यनारायण राजपूत, गणेश गुर्जर आदि ने बताया कि किसानों द्वारा महंगी दवाओं का स्प्रे करने के बाद बीमारियों पर अंकुश लग सका। इससे अब सोयाबीन की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। किसानों ने फसल का सर्वे कराकर मुआवजा एवं फसल बीमा का लाभ दिलाने की मांग की है।

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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