पीला मोजक से खराब हुई सोयाबीन फसल बारिश बंद होने पर धूप खिलते ही मुरझाई

- कुछ देर में आए इस बदलाव से किसान चिंतित हुए, लागत के बराबर भी उत्पादन नहीं मिलने से होगा आर्थिक नुकसान

By: gurudatt rajvaidya

Published: 24 Aug 2020, 08:03 AM IST

हरदा। जिले में खरीफ की मुख्य फसल सोयाबीन पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पहले बारिश नहीं होने से खराब हो रही फसल अब पर्याप्त पानी मिलने के बाद खिली धूप से बर्बादी की कगार पर है। जिले के दर्जनों गांवों में फसल पर रविवार को बड़ा बदलाव देखा गया। पीला मोजेक का प्रभाव सह चुकी फसल धूप मिलते ही मुरझा गई। देहाती बोली में इसे झुलसा रोग कहा जा रहा है। हालांकि कृषि वैज्ञानिक स्पष्ट रूप से फिलहाल कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। उनके मुताबिक फसल का निरीक्षण करने के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है। ज्ञात हो कि जिले में इस वर्ष करीब 1 लाख 65 हजार हेक्टेयर रकबे में खरीफ की मुख्य फसल सोयाबीन की बुवाई हुई है।
फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंची
बालागांव। पीला मोजेक से खराब हुई फसल को किसानों ने जैसे-तैसे संभाला तो उसके सूखने की समस्या सामने आ गई। मगरधा, झाड़पा, रैसलपुर सहित वनांचल के दर्जनों गांव में हरि फसल सूखने लगी है। मुरझाए पौधे में फूल भी नहीं आ सके हैं। कई कृषकों की खेतों में यह बीमारी फैल गई और फसल नष्ट होने की कगार पर है। बीते दो दिन से पौधों के सूखने की समस्या सामने आ रही है। पौधा मुरझाने लगा है। वहीं नदी-नालों की बाढ़ ने भी फसल को खासा नुकसान पहुंचाया है। सैकड़ों एकड़ की फसल बर्बाद हो चुकी है। कृषि विज्ञान केंद्र हरदा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार वंकोलिया ने बताया कि यदि पत्तियों पर असामान्य पनीले धब्बे दिखाई देते हंै, जो की बाद की अवस्था में भूरे या काले रंग में परिवर्तन हो जाते हैं, संपूर्ण पत्ति झुलसी एवं कुछ अधिक नमी की उपस्थिति में पत्तियां ऐसे प्रतीत होती हैं जैसे पानी में उबाली गई हो, तो यह एरियल ब्लाइट बीमारी हो सकती है। इसका निरीक्षण कर ही सही जानकारी बताई जा सकती है।
धूप खिलते ही अचानक सूख गई सोयाबीन की फसल
मसनगांव. कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जिस खेत में टेबुकोनाझोल तथा सल्फर का स्प्रे करने की सलाह दी थी उसमें कृषक रामनिवास पटेल द्वारा तुरंत दवाई लाकर खेत में स्प्रे किया गया, लेकिन दूसरे दिन पूरे खेत में फसल सूख गई। यही हालत अन्य खेतों की बनी हुई है। जहां पर रविवार को कुछ देर धूप खिलते हरे पौधे अचानक सूख गए। गांव के किसान राजा भायरे, राकेश पाटिल, श्रीराम पटल्या, उमेश छलोत्रे, बाजुलाल छलोत्रे आदि ने बताया की सुबह फसल का जो रूप था वह दोपहर में धूप खिलने के बाद बदल गया। फसल सूखने लगी है। किसानों का कहना है कि इस प्रकार की बीमारी पहली बार देखने को मिली। जिसमें कुछ घंटों में ही फसल की स्थिति बदल गई। बारिश के दौरान तो कहीं-कहीं हरी फसल का रंग भद्दा होकर टांके में पीली होकर सूखने लगी थी, लेकिन धूप निकलने के बाद अचानक पूरी फसल सूख गई। पास के गांव डोमनमऊ, सालाबैड़ी, गांगला कमताड़ा, पलासनेर, केलनपुर, बीड़ में भी फसल की यही स्थिति बताई जा रही है। डोमनमऊ के किसान मुकेश पटेल ने बताया कि अभी तक पौधों में कहीं-कहीं पीलापन दिखता था, रविवार सुबह धूप खिलने के बाद पौधे मुरझाने लगे हैं। यह स्थिति सभी किस्मों की सोयाबीन में है।
सूरज की चमक से बिगड़ी फसल की स्थिति
महेन्द्रगांव। लगातार बारिश के बाद जब रविवार को खिली धूप ने सोयाबीन फसल को चौपट कर दिया। कृषक सत्यनारायण गौर, आलोक गौर, राजनारायण गौर आदि ने बताया कि बारिश थमी तो सोयाबीन की फसल में झुलसा नामक बीमारी का प्रकोप दिखाई दिया। इससे फसल मुरझाने लगी है। कहीं-कहीं फसल सूखने भी लगी हैं। सोयाबीन के पत्ते मुरझाकर गिरने लगे हैं। बीमारी का प्रकोप तीव्र होने के कारण इस पर नियंत्रण करना भी मुश्किल है। किसानों ने बताया कि यदि इस बीमारी पर नियंत्रण नहीं हुआ तो उत्पादन पर असर पड़ेगा। महेन्द्रगांव के अलावा दुलिया, मोहनपुर, दीपगांव खुर्द, धनकार, चौकड़ी, खुटवाल आदि गांवों में भी सोयाबीन फसल की ऐसी ही स्थिति बताई जा रही है।
दर्जनों गांवों में सूखने लगी सोयाबीन फसल
हटगांव. तहसील दर्जनों ग्रामों में के सैकड़ों एकड़ रकबे में हरी-भरी और फलियों से लदी सोयाबीन फसल अचानक बीमारी से ग्रसित होकर सूखने लगी है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं। लगातार बारिश के बाद रविवार को धूप की खिली तो किसान फसल के हाल जानने खेतों पर पहुंचे, लेकिन उनका सिर तब ठनक गया जब फसल सूखी दिखी। सोयाबीन की फसल मुरझा गई है। सोयाबीन की 9560 सहित अन्य किस्म इस रोग से सबसे ज्यादा ग्रसित हंै। कृषक मदन गौर, राजा राठौर, निलेश गौर ने बताया कि हजारों रुपए खर्च कर फसल तैयार की जा रही थी, लेकिन एक के बाद एक बीमारियां आने से फसल चौपट होते नजर आ रही है। सोयाबीन फसल में लगी फली अपने आप गिर रही हैं। वहीं बारिश के दौरान तेज हवा चलने से मक्का फसल खेतों में बिछ गई है। इससे भी किसानों को नुकसान का अंदेशा है।
कहीं पीला मोजक से गिर रही फलियां, कहीं अचानक सूख रही फसल
खिरकिया. फसलों में कई प्रकार की बीमारियां लग रही हंै। कहीं पर पीला मोजक तो कहीं पर इल्ली और मच्छरों के प्रकोप से किसान परेशान हैं। अब खेतों में फसल पीली पड़कर फलियां टूटकर गिर रही हैं। अचानक एक-दो दिन में फसल सूखकर खराब हो रही है। गांव जटपुरा माल, सारसूद, रुनझुन, छुरीखाल, मोरगड़ी, मुक्तापुर गोपालपुरा, प्रतापपुरा में पीला मोजक जैसी बीमारी से सोयाबीन फसल के पत्ते सूख रहे हैं। सोयाबीन पीली हो रही है। किसान शंकरसिंह सोलंकी, हरेराम राजपूत, भगवान राजपूत, गोलू राजपूत, पूनम मिस्त्री, रामविलास मुकाती, हुकम सोलंकी, पर्वतसिंह तोमर, मुकेशसिंह तोमर आदि ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों को गांव में जाकर किसानों की समस्या दूर करना चाहिए। छीपावड़ के किसान विजयंत गौर ने बताया कि पड़वा अतरालिया में स्थित खेत में लगी सोयाबीन दो दिनों से अचानक सूखने लगी है।
इनका कहना है
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से हुई चर्चा के अनुसार यह एरियल ब्लाइट रोग है, जो फफूंद लगने से होता है। कृषि विभाग के अधिकारी एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की संयुक्त डायग्नोस्टिक टीम सोमवार को अलग-अलग क्षेत्रों का निरीक्षण कर फसलों को बचाने के लिए किसानों को उचित सलाह देगी।
- एमपीएस चंद्रावत, उप संचालक, कृषि, हरदा।

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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