विद्यालयों में नहीं हुई शिक्षकों की नियुक्तियां, कैसे होगी गुरु की वंदना

विद्यालयों में नहीं हुई शिक्षकों की नियुक्तियां, कैसे होगी गुरु की वंदना

sanjeev dubey | Publish: Sep, 05 2018 02:12:52 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

शिक्षकों की कमी से जूझ रही विकासखंड की शालाएं

खिरकिया. सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोडऩे के लिए गांवों में विद्यालय रूपी शिक्षा के मंदिर तो खोल दिए गए है, लेकिन इनमें शिक्षक रूपी भगवान की स्थापना नहीं की गई है। विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए स्कूलों में बच्चों की संख्या में आधार पर शिक्षक की नियुक्ति करने के मापदंड तय किए गए है। लेकिन विकासखंड में स्थिति कुछ उलट ही है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यालयों में शिक्षक सम्मान के साथ गुरूवंदना की जाएगी। लेकिन किुछ विद्यालय के बच्चों का दुर्भाग्य है, कि उनकी शाला में गुरूवंदना के लिए गुरू ही नहीं है। शिक्षक दिवस पर पत्रिका द्वारा शासकीय शालाओं की स्थिति की पड़ताल की गई, जिसमें विद्यालयों में शैक्षणिक अव्यवस्थाओं और शासन के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार विकासखंड में 18 9 प्राथमिक, 97 माध्यमिक शाला सहित दो दर्जन हाइस्कूल व हायर सेकंडरी शालाएं संचालित हो रही है। लेकिन स्वीकृति पदों की अपेक्षा शिक्षकों की कमी है।

शिक्षक विहीन है 25 विद्यालय-
विकासखंड के 21 माध्यमिक एवं 4 प्राथमिक शालाओं में वर्तमान में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं है। यह विद्यालय शिक्षक विहीन है, जिसकी पूर्ति जैसे तैसे की जा रही है, कई बार तो इन विद्यालयों के ताले भी नहीं खुल पाते है। ऐसे में पालक अपने बच्चों को शासकीय विद्यालयों मेंं भेजने से भी कतराते है।

विद्यार्थियो की दर्ज संख्या पर खरा नहीं उतरता मापदंड
शासकीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या में आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति के मापदंड तय किए गए है। जिसमें प्राथमिक शालाओं में 33 बच्चों पर एवं माध्यमिक शालाओं में 40 बच्चो पर एक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए। लेकिन विकासखंड में विद्यार्थियों की दर्ज संख्या के मुताबिक यह मापदंड खरा नहीं उतरता है। कुछ विद्यालयों में तो बच्चों की संख्या इतनी अधिक है कि वर्तमान में नियुक्त शिक्षकों एक साथ विभिन्न कक्षाओं में अध्ययन कराना पड़ता है। वर्तमान में 18 9 प्राथमिक शालाओं में 513 एवं 97 माध्यमिक शालाओं में 16 3 शिक्षक पदस्थ है। जो कि बच्चो की दर्ज संख्या से कम है। वर्तमान में प्राथमिक शालाओं में 11 हजार 49 एवं माध्यमिक शाला में 718 2 विद्यार्थी है। माध्यमिक शालाओं में वर्तमान में नियुक्ति शिक्षक संख्या के आधार पर औसतन 74 बच्चों पर एक शिक्षक है, जो कि शासन के निर्धारित मापदंड से 34 अधिक है।

एक शिक्षक पर कई कक्षाओं का भार -
शिक्षकों की कमी के चलते एक शिक्षक पर कई कक्षाओं का भार है। विकासखंड में 46 ऐसे विद्यालय है, जहां पर सिर्फ एक शिक्षक ही है। यदि प्राथमिक शाला में एक शिक्षक है, तो उसके जिम्मे 5 कक्षाओं 1 से 5 तक के बच्चों का बोझ होता है। वहीं माध्यमिक शाला में एक शिक्षक के भरासे 3 कक्षाएं संचालित होती है। इसके अलावा विद्यालयों के कई अन्य कार्य शिक्षकों को ही करना पड़ता है। यहां तक ही एक शिक्षक वाले विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी निर्वाचन कार्यो में भी लगा दी जाती है।

हाइस्कूल व हायर सेकंडरी शालाओं में नहीं है विषय विशेेषज्ञ शिक्षक -
विकासखंड में करीब दो दर्जन हाइस्कूल व हायरसेकंडरी में करीब आधा सैकड़ा से अधिक शिक्षकों की कमी है। यहां तक कि इन स्कूलों में विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक ही नहीं है। तहसील मुख्यालय पर ही कई विशेषज्ञ शिक्षक नहीं है। जीव विज्ञान, गणित, वाणिज्य विषयों की बात तो दूर हिन्दी एवं अंग्रेजी जैसी सामान्य विषयों के शिक्षकों की भी नियुक्ति इन शालाओं में नहीं है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियो को निजी स्कूलों के शिक्षकों के पास कोचिंग जाना पड़ता है।

फैक्ट फाइल
विद्यालय - 18 9 प्राथमिक, 97 माध्यमिक
शिक्षक - 513 प्राथमिक, 16 3 माध्यमिक
बच्चों की दर्ज संख्या - 11049 प्राथमिक, 718 2 माध्यमिक

इनका कहना है-
शिक्षकों की नियुक्ति शासन स्तर से होना है। अतिशेष शिक्षकों के माध्यम से सभी विद्यालयों में व्यवस्था बनाई जाती है। शासन द्वारा नियुक्त शिक्षकों एवं मौजूदा संशाधनों के माध्यम से बेहतर शिक्षा विद्यालयों में दिए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
उमाकांत वर्मा, बीआरसी, खिरकिया

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