प्रतिबंध के बाद भी बन चुकी हैं हजारों पीओपी की गणेश प्रतिमाएं

प्रतिबंध के बाद भी बन चुकी हैं हजारों पीओपी की गणेश प्रतिमाएं

Sanjeev Dubey | Publish: Sep, 04 2018 12:18:35 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

- इन मूर्तियों के नदियों, तालाबों में विसर्जन किए जाने से पानी में फैलता है प्रदूषण, जीव-जंतुओं की जान पर भी खतरा

हरदा. प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों से नदियों, तालाबों में फैलने वाले प्रदूषण को देखते हुए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा पीओपी की बनी मूर्तियों पर रोक लगाईजा चुकी है, किंतु प्रशासन की इस अनदेखी के कारण बाजार में ये प्रतिमाएं बिकने के लिए आने वाली हैं। कलाकार मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। गणेश चतुर्थी के बाद में नवरात्रि के लिए भी प्लास्टर ऑफ पेरिस की दुर्गा प्रतिमाएं तैयार होने लगेंगी। इन प्रतिमाओं के निर्माण पर पर प्रतिबंध के बावजूद प्रशासन समय से पहले मूर्तिकारों को आगाह नहीं करता है। यही कारण है कि शहर में विभिन्न जगहों पर कलाकारों ने हजारों प्रतिमाएं तैयार कर ली हैं, जिन्हें शहर व गांवों में बेचा जाएगा। इधर, खेड़ीपुरा में मूर्तिकार हेमलता बघेल द्वारा गुजरात की मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं।उनके पास हरदा के अलावा खिरकिया, टिमरनी, सिराली, खातेगांव तक मूर्तियां देने का आर्डर हैं। लगभग मूर्तियां बन चुकी हैं, जिन्हें केवल रंग-रोगन किया जाना बाकी है।

हजारों तैयार हो चुकी पीओपी की प्रतिमाएं
उल्लेखनीय है कि शहर में जहां मिट्टी की प्रतिमाएं बन चुकी हैं।वहीं दूसरी तरफ प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियां भी हजारों की संख्या में तैयार की गईहैं। शहर के खेड़ीपुरा में दो तथा बैरागढ़ क्षेत्र में पीओपी की प्रतिमाओं का जोरशोर से निर्माण किया गया है। कलाकार दिन-रात इन मूर्तियों ेेके रंग-रोगन में जुटे हुए हैं। गणेश चतुर्थी से पहले बाजार में ये प्रतिमाएं बिकने की तैयारी में हैं।

नदी, तालाबों में पीओपी से बनता है एसिड
जिला प्रशासन को भी अच्छे से मालूम है कि पीओपी से बनी प्रतिमाएं न सिर्फ जलीय जीव-जंतुओं के लिए खतरा हैं बल्कि वातावरण भी दूषित करती हैं। इसके कारण नदी व तालाबों का पानी भी दूषित होता है। किंतु इसके बाद भी प्रशासन इन मूर्तियों को रोकने में गंभीरता नहीं दिखाता आया है। जानकारों के अनुसार पीओपी मूर्तियों में जिप्सम, सल्फर, फॉस्फोरस और मैग्नेशियम होता है। वहीं मूर्तियों में लगने वाले रंगों में मरकरी, लेड, कैडियम और कार्बन होते हैं। इन तत्वों के कारण पानी में एसिड बनता है। इस पानी का उपयोग करने से लोगों को त्वचा संबंधी रोग होते हैं। साथ ही जलाशयों में रहने वाले जीव व आसपास के पेड़, पौधों को भी नुकसान पहुंचता है।

एक घंटे में बन जाती हैं मूर्तियां
मिट्टी की मूर्तियों की अपेक्षा पीओपी की मूर्तियां महज एक घंटे में बन जाती हैं। कलाकारों ने बताया कि मूर्ति बनाने के लिए इसका खाका 16 दिन में तैयार हो चुका है। इसमें प्लास्टर ऑफ पेरिस का घोल डालकर एक घंटे में मूर्ति तैयार हो जाती है। दो-तीन दिन इसे सूखने में लगते हैं। इसके बाद रंग-रोगन किया जाता है। छोटे से लेकर बड़े आकार की मूर्तियों को हजारों रुपए में बेचा जाता है।

रोक लगाने से प्रभावित हो रहा रोजगार
जिला प्रशासन द्वारा पीओपी की मूर्तियां न बनाने देने को मूर्तिकार गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह प्रतिबंध लगाने के कारण उनका रोजगार प्रभावित हो रहा है। शहर में ऐसे कई परिवार ऐसे हैं। प्रतिमाएं बनाना उनका पुश्तैनी धंधा है। मूर्तिकार सुनील ने बताया कि मिट्टी की मूर्ति बनाना काफी जटिल काम है। कई बार मूर्ति के सूखने के दौरान उसमें क्रेक आ जाता है, जिसेे ठीक करना मुश्किल होता है। इसलिए पीओपी की मूर्तियां आसानी बन जाती हैं, जो दिखने में भी आकर्षक होती हैं।

इनका कहना है
प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएं बनाने पर पूर्णत: प्रतिबंध है। नदियों, तालाबों में इनके विसर्जन से पानी में प्रदूषण फैलता है। ऐसी मूर्तियों को बाजार में बेचने पर भी रोक है। पीओपी की मूर्तियां बाजार में बिकती पाईगईं तो संबंधित दुकानदार पर कार्रवाईकी जाएगी।
जीपी सैयाम, एसडीएम हरदा
-------------------------------------------------------
अजनाल नदी किनारे इस बार भी कुंड बनाकर प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाएगा। पीओपी की मूर्तियों के प्रतिबंध को लेकर हमारे को कोईनिर्देश नहीं मिले हैं।
दिनेश मिश्रा, सीएमओ, नगर पालिका, हरदा

MP/CG लाइव टीवी

Ad Block is Banned