नर्मदा से जितना पानी मिल रहा उतनी संग्रहण क्षमता नहीं

sanjeev dubey

Publish: Dec, 07 2017 04:56:15 (IST)

Hoshangabad, Madhya Pradesh, India
नर्मदा से जितना पानी मिल रहा उतनी संग्रहण क्षमता नहीं

पर्याप्त पानी मिलने के बावजूद कई क्षेत्रों में अभी से जलसंकट की स्थिति टंकियों और पाइपलाइन का काम अधूरा, गर्मियों में शहर में बढ़ सकता है पेयजल संकट

हरदा। वर्ष 2006 में आगामी 30 साल के लिए शहर की पेयजल व्यवस्था के मद्देनजर बनाई गई जलावर्धन योजना का काम तो पूरा हो गया, लेकिन कई क्षेत्रों में अब भी पानी की किल्लत बनी रहती है। सीमावृद्धि के बाद शामिल नई कॉलोनियों के लोग दिसंबर से ही टैंकरों के भरोसे हैं। इसका कारण है कि जितना पानी नर्मदा से मिल रहा है, नपा के पास उतने को संग्रहण क्षमता ही नहीं है। हंडिया जल संयंत्र (नए व पुराने) से शहर को नौ एमएलडी (मीलियन लीटर डेली) पानी मिल रहा है। इसके उलट नपा की आठ टंकियों में करीब ४३ लाख लीटर पानी संग्रहित हो पा रहा है। यानि उससे आधे को ही नपा फिलहाल संग्रहित कर सप्लाई कर पा रही है। जिन टंकियों का निर्माण हो चुका है उनमें पाइप लाइन बिछाने का काम छूटा हुआ है। लिहाजा इनका उपयोग भी जल्द शुरू होने की संभावना नहीं है। यह स्थिति अगले ग्रीष्मकाल में भी लोगों को जलसंकट का सामना करने के लिए तैयार रहने का इशारा कर रही है।

नए प्लांट का पूरी क्षमता से नहीं हो रहा उपयोग
जल आवर्धन योजना के तहत हंडिया में स्थापित 9 एमएलडी प्लांट का पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो पा रहा है। बताया जाता है कि साढ़े 4 एमएलडी पानी पुराने से तथा इतना ही नए संयंत्र से लिया जा रहा है। इस लिहाज से शहर को प्रतिदिन 90 लाख लीटर पानी मिल रहा है। नपा के पास इससे आधे को ही संग्रहित करने की व्यवस्था है। जितनी टंकियां बन रही है उनका काम पूरा होने के बाद तथा प्रस्तावित टंकियों के बनने के बाद भी संग्रहण क्षमता उतनी नहीं रहेगी जितना पानी हंडिया जल संयंत्र से मिल रहा है।
ट्यूबवेल व बिरजाखेड़ी से भी सप्लाई जारी
शहर के कई क्षेत्रों में ट्यूबवेल व बिरजाखेड़ी जल संयंत्र से पानी की सप्लाई की जा रही है। यह नपा की जल वितरण को लेकर सालों पहले बनाई गई कार्ययोजना की पोल खोल रही है। जल आवर्धन योजना तब अगले तीस साल की जरुरतनों को पूरा करने के लिहाज से तैयार की गई थी। यानि नर्मदा से ही शहर को इतना पानी मिलता कि ट्यूबवेल और बिरजाखेड़ी जल संयंत्र की उपयोगिता समाप्त हो जाती, लेकिन उसके उचित दोहन को लेकर सही दिशा में प्रयास नहीं किए जाने से टैंकरों से सप्लाई पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।
अभी से बढ़ी टैंकरों की सप्लाई
इस साल बारिश कम होने के कारण शहरी क्षेत्रों के अधिकतर ट्यूबवेल जवाब दे चुके हैं। कॉलोनियों में लोगों को पानी के लिए अभी से जद्दोजहद करना पड़ रही है। जानकारी के मुताबिक शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में 150 टैंकर पानी बांटा जा रहा है। इनमें नपा की टंकियों को भरना भी शामिल है।
यह है टंकियों की संग्रहण क्षमता (लीटर में)
सिविल लाइन (दो टंकी) : १५ लाख
खेड़ीपुरा : ४ लाख
फाइल वार्ड : ५० हजार
गाडरी मोहल्ला : ५० हजार
बस स्टैंड : ९ लाख
ग्वाल नगर : ९ लाख
नेहरू स्टेडियम : ४.५ लाख
इन क्षेत्रों में टंकियों का निर्माण अधूरा
सरकार कॉलोनी : ४ लाख लीटर
खेड़ीपुरा : ४ लाख लीटर
श्यामा नगर : ४ लाख लीटर
विवेकानंद कॉम्प्लेक्स : ४ लाख लीटर
सिविल लाइन में बनेगी एक और टंकी
सिविल लाइन में 10 लाख लीटर की एक टंकी का निर्माण और कराया जाएगा। इसकी कार्रवाई प्रकिया में है।
यहां हो रही ट्यूबवेल से सप्लाई
- मातोश्री नगर
- कुलहरदा
- जयशक्ति होम्स
- डबल फाटक
- खेड़ीपुरा
- श्यामा नगर
- वंशकार मोहल्ला
- चर्मकार मोहल्ला
इतने हैं नल कनेक्शन
घरेलू : ६४००
व्यवसायिक : ७६
इनका कहना है
शहर में पेयजल टंकियों का निर्माण जारी है। प्रस्तावित टंकियों को लेकर भी कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद संग्रहण क्षमता पूरी नहीं होगी। क्षेत्रवार जरुरत के अनुसार नई टंकियों के निर्माण और पाइप लाइन विस्तार के प्रस्ताव तैयार कर परिषद में रखवाए जाएंगे। ग्रीष्मकाल में पेयजल की किल्लत को दूर करने के लिए आगामी दिनों में विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर अमल में लाया जाएगा।
- दिनेश मिश्रा, सीएमओ नपा हरदा

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