टीकाकरण करने पहुंची टीम से ग्रामीणों ने कहा -तुम कोरोना फैला रहे हो, ये तुम्हारी साजिश है

एएनएम व आशा से ग्रामीणी ने अभद्रता कर दी धमकी, टीकाकरण कराने से किया इंकार

By: gurudatt rajvaidya

Published: 23 Aug 2020, 08:01 AM IST

खिरकिया. ग्राम सांवलखेड़ा में 6 वर्षीय बालिका के कोरोना संक्रमित मिलने के बाद ग्रामीणों ने स्वास्थ्य दल पर कोरोना फैलाने का आरोप लगाते हुए टीकाकरण कराने से इंकार कर दिया। गांव में टीकाकरण करने पहुंची एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं से ग्रामीणों ने न सिर्फ अभद्रता की बल्कि कोरोना फैलाने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पूर्व सांवलखेड़ा निवासी बालिका का सैंपल लेने के बाद 15 अगस्त को रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इसके बाद बालिका को कोविड केयर सेंटर लाकर उपचार किया गया, लेकिन ग्रामीण इससे खासे नाराज है। बालिका को किसी भी प्रकार बीमारी नहीं होने की बात कहते हुए ग्रामीण टीकाकरण दल पर भड़क गए। अभद्रता कर व गाली गलौच भी कर दी। ग्रामीणों ने कहा कि बालिका का बेवजह सैंपल लिया गया और उसे कोरोना बता दिया, जबकि उसमें कोरोना के कोई भी लक्षण नहीं थे। इसे स्वास्थ्य विभाग की साजिश बताते हुए उल्टा कर्मचारियों पर ही कोरोना फैलाने का आरोप लगा दिया। उपस्वास्थ्य केन्द्र कड़ोला राघो की एएनएम निशा बेलवंशी ने इसकी शिकायत बीएमओ डा. आर ओनकर को की है। जिसमें उन्होंने बताया कि 21 अगस्त को गांव में टीकाकरण करने गई थी। जहां उनके साथ आशा कार्यकर्ता व अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें टीकाकरण नहीं करने दिया गया। भ्रमण के दौरान ग्रामवासियों ने अपशब्दों का प्रयोग कर गांव में न आने की धमकियां दी।
टीकाकरण कराने कोई भी नहीं पहुंचा
कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए अधिकारी कर्मचारियों द्वारा जान जोखिम में डालकर घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही है। ऐसे में भी उन्हें इस प्रकार की घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। घटना के बाद से एएनएम डरी हुई हंै। एएनएम ने बताया कि शुक्रवार को एएनसी 8 एवं 13 बच्चों का टीकाकरण किया जाना था, लेकिन उसमें से कोई भी टीकाकरण स्थल पर नहीं पहुंचा। इससे टीकाकरण का सत्र भी पिछड़ गया। ऐसे में बच्चंों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। एएनएम एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा समूचा मामला तहसीलदार एवं थाना टीआई के संज्ञान में भी लाया गया। गौरतलब है कि बालिका के उपचार के बाद स्वस्थ होने पर विभाग द्वारा उसकी कोविड केयर सेंटर से छुट्टी की जा चुकी है। वह घर में ही होम क्वॉरंटीन है। फिलहाल कंटेनमेंट एरिया बना हुआ है। जहां दल भी तैनात है।
चाचुंए के लिए भी जाना जाता रहा है गांव
सांवलखेड़ा आदिवासी अंचल का गांव है। जहां पर इस प्रकार की घटना स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता की कमी प्रदर्शित करती है। ग्रामीणों में अंधविश्वास अब भी बना हुआ है। इसके चलते उन्होंने कोरोना से बचाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों का पर ही इसको फैलाने का आरोप लगा दिया। ग्रामीणों की जागरूकता में कमी का यह पहला मामला नहीं है। इसके पूर्व भी यहां चचुआं (गर्म सरिए या चुडिय़ों से शरीर के अंगों पर दागना) पद्धति से उपचार होता रहा है। यह मामला पत्रिका द्वारा उठाने के बाद चचुआं प्रथा यहां से खत्म हुई है।
इनका कहना है-
इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नही हुई है। यदि ऐसा है, तो यह गलत है। तहसीलदार से मामले के संबंध में जानकारी ली जाएगी।
श्यामेन्द्र जायसवाल, एसडीएम, खिरकिया

gurudatt rajvaidya Bureau Incharge
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