मुलायम सिंह से गहरी दोस्ती निभाने वाले सपा के बड़े नेता ने दिया जोरदार झटका.. भाजपा के लिए करेंगे प्रचार

इतिहास में पहली बार चुनाव प्रचार में होगा खिलाफ

By: Ruchi Sharma

Published: 03 Mar 2019, 01:22 PM IST

नवनीत द्विवेदी

हरदोई. समाजवादी पार्टी की स्थापना के पूर्व से ही पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के खासे करीबी और दोस्त रहे सीनियर लीडर डॉ अशोक बाजपेई पिछले वर्ष सपा से नाता तोड़कर भाजपा में अपनी सियासी पारी शुरुआत कर चुके हैं। सपा से भाजपा में आने के बाद डॉ. अशोक बाजपेई के लिए यह पहला मौका है और शायद ये पहला चुनाव होगा जब वह समाजवादी पार्टी के खिलाफ पहली बार न केवल भाजपा के पक्ष में माहौल बनाते नजर आएंगे बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए वह अपने अनुभवों और सियासी पकड़ का प्रयोग भी करते नजर आएंगे।

आपको बता दें कि खांटी समाजवादी माने जाने वाले डॉ. अशोक बाजपेई और मुलायम सिंह यादव की दोस्ती समाजवादी पार्टी की स्थापना के पहले से चली आ रही थी और समाजवादी पार्टी की स्थापना के बाद से लगातार डॉ. अशोक बाजपेई मुलायम सिंह यादव के अच्छे दोस्त माने जाते रहे। मुलायम सिंह से उनको काफी नजदीक माना जाता था। कई बार मंत्री और विधायक रहे अशोक बाजपेई विधानसभा चुनाव 2012 में समाजवादी पार्टी के बागी हुए जिलाध्यक्ष पदमराग की वजह से सवायजपुर सीट से चुनाव हार गए थे और उसके बाद से सपा पार्टी में उनकी उपेक्षा शुरू हो गई थी।

ऐसा कहने वाले बताते है कि यूपी में 2012 में सपा की सरकार बनने के बाद उन्हें कोई खास तवज्जों नहीं मिली और काफी जद्दोजहद के बाद उन्हें एमएलसी तो बना दिया गया मगर सपा की सत्ता में हाशिए पर ही नजर आए। ऐसा मानने वाले उनके करीबी कार्यकर्ता मनीष कहते हैं 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उनके करीबियों को सपा में तरजीह नहीं मिली जिसके कारण यूपी में भाजपा की सरकार बनने के करीब एक साल के भीतर ही डॉ. अशोक बाजपेई ने समाजवादी पार्टी से किनारा करना ही उचित समझा हालांकि इसके पीछे समाजवादी पार्टी में मचे चाचा भतीजे के सियासी घमासान से भी आहत हुए अशोक बाजपेई के लिए सपा से किनारा करने का कारण माना गया था ।

मुलायम सिंह यादव से पुरानी दोस्ती के नाते माना जा रहा था कि काफी बुजुर्ग हो चुके डाक्टर अशोक बाजपेई सपा में ही रहेंगे लेकिन उन्होंने पिछले साल अचानक सभी को तब चौंका दिया था जब एमएलसी पद और सपा से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। भारतीय जनता पार्टी ने भी उन्हें रिटर्न गिफ्ट देते हुए राज्यसभा सांसद बना दिया तब से भारतीय जनता पार्टी के लिए कार्य कर रहे सांसद अशोक बाजपेयी की भारतीय जनता पार्टी में सियासी पारी चल रही है।


उनके करीबी लोगों की माने तो डॉ अशोक बाजपेई के और समाजवादी पार्टी के जीवन में यह पहला मौका होगा जब डॉ अशोक बाजपेई समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की मुखालफत करते हुए नजर आएंगे और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को जिताने के लिए जनसभाओं से लेकर के विभिन्न कार्यक्रम करते नजर आएंगे। डॉ अशोक बाजपेई का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बुद्धिजीवी वर्ग से लेकर के हर वर्ग में प्रचार-प्रसार करने से लेकर पूरी ताकत के साथ जुटना काफी अहम माना जा रहा है । देखने वाली बात यह होगी कि लोकसभा चुनाव में डॉ. अशोक बाजपेई का असर किन किन स्थानों पर दिखेगा क्योंकि हरदोई नहीं आसपास के कई जनपदों में डॉ अशोक बाजपेई को प्रभावशाली नेता माना जाता है । हरदोई की सियासत में वह सबसे सीनियर लीडर है ।

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