बसपा से निलंबित पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय का राजनीतिक सफर

रामवीर उपाध्याय को अब तक पश्चिमी यूपी में बसपा का के प्रमुख ब्राह्मण चेहरे के रूप में जाना जाता रहा है। पत्नी भी रह चुकी हैं सांसद।

By: suchita mishra

Updated: 21 May 2019, 11:40 AM IST

हाथरस। लोकसभा चुनाव 2019 में अनुशासनहीनता के आरोप में उत्तर प्रदेश के पूर्व ऊर्जा मंत्री और विधायक रामवीर उपाध्याय को बहुजन समाज पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही उन पर कई प्रतिबंध लगाते हुए पार्टी ने उन्हें मुख्य सचेतक पद से हटा दिया है। बता दें कि रामवीर उपाध्याय को पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेताओं में गिना जाता है। जानते हैं रामवीर उपाध्याय के राजनीतिक कॅरियर के बारे में।

1996 में राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत
रामवीर उपाध्याय को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अब तक बसपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरे के रूप में जाना जाता रहा है। कृषि और वकालत के पेशे से जुड़े रामवीर उपाध्याय ने अपने कॅरियर की शुरुआत बसपा से ही की थी। वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में वे बसपा के टिकट पर हाथरस जिले की सिकंदराराऊ सीट से पहली बार विधायक चुने गए। मार्च 1997 से सितंबर 1997 तक मायावती सरकार में वे परिवहन एवं ऊर्जा मंत्री के पद पर रहे। फरवरी 2002 में हुए विधानसभा के चुनाव में एक बार फिर वह बसपा से अपनी पुरानी सीट से विधायक निर्वाचित हुए। मायावती सरकार में 2002 से अगस्त 2003 तक उन्होंने ऊर्जा एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री का पद संभाला। साथ ही वे इस बीच नियम समिति के सदस्य भी रहे।

2017 में बने थे बसपा विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक
2007 में हुए विधानसभा चुनावों में वे तीसरी बार उसी सीट से विधायक चुने गए। वर्ष 2007 में मायावती सरकार बनने के बाद रामवीर सिंह 2007 से 2012 तक ऊर्जा मंत्री रहे। 2012 के विधानसभा चुनाव में वे सिकंदराराऊ सीट से चौथी बार बसपा के टिकट पर विधायक चुने गये। उस समय चुनाव में बसपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। लिहाजा पश्चिमी यूपी का मजबूत चेहरा मानते हुए मायावती ने इस हार के बाद रामवीर उपाध्याय को पश्चिमी यूपी की जिम्मेदारी सौंप दी। हार के बाद उन्हें बसपा के विधानमंडल दल का मुख्य सचेतक बनाया गया। 2012 से 2013 तक वे कार्य मंत्रणा समिति के सदस्य रहे। वर्तमान में रामवीर उपाध्याय हाथरस की सादाबाद सीट से विधायक हैं।

पत्नी रह चुकी हैं सांसद
1 अगस्त 1957 को हाथरस के बामौली में जन्मे रामवीर ने मेरठ विश्वविद्यालय से एमए-एलएलबी की शिक्षा ग्रहण की। शुरुआत में वे कृषि और वकालत से ही जुड़े रहे। वकालत के दौरान ही उनका ध्यान राजनीति की ओर आकर्षित हुआ और धीरे धीरे वे बसपा में सक्रिय होने लगे। 1996 में उन्होंने बसपा से ही राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की। रामवीर की पत्नी सीमा उपाध्याय भी 2009 के लोकसभा चुनाव में यूपी की फतेहपुर सीकरी सीट से सांसद रह चुकी हैं।

 

 

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