हडताल के दौरान डाककर्मी की हालत बिगड़ी

सातवां वेतन के हिसाब से सैलरी देने की मांग के साथ डाककर्मी अनिश्चिकालीन हड़ताल पर हैं।

By: suchita mishra

Published: 24 May 2018, 02:58 PM IST

हाथरस। ग्रामीण डाक सेवकों ने सातवें वेतन के हिसाब से वेतन न मिलने से खफा होकर दूसरे दिन भी अपनी हड़ताल जारी रखी। अनशन पर बैठे डाककर्मियों ने कहा कि उनकी मांगें पूरी न होने तक वे अनशन पर बैठे रहेंगे। इस दौरान एक डाककर्मी की हालत बिगड़ गई। लेकिन साथियों द्वारा पेय पदार्थ और दवा दिलाने के बाद डाककर्मी स्वस्थ हो गया।

ये है मामला
डाक कर्मियों की सैलरी में सातवें वेतन को लागू किए जाने बाद भी ग्रामीण डाक सेवकों को सातवें वेतन के हिसाब से वेतन नहीं दिया जा रहा है। इस कारण डाककर्मियों में काफी रोष व्याप्त है। अब डाककर्मी अनिश्चित कालीन हडताल पर चले गये हैं। जीडीए के बैनर तले बैठे ग्रामीण डाक सेवकों ने बताया कि जीडीएस डाक कर्मचारियों के लिए भारत सरकार ने कमलेश चंद्रा समिति का गठन किया था। उक्त समिति ने भारत सरकार को अपनी रिपोर्ट भी दे दी। मगर केन्द्र सरकार उस रिपोर्ट को नहीं मान रही है। सासनी डाकघर परिसर में हडताल पर बैठे तमाम डाक कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारे बाजी की और मांगे पूरी न होने तक अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे रहने की चेतावनी दी। इसी बीच अनशन पर बैठे हरिओम नामक डाक कर्मी की हालत बिगड़ गई। लेकिन साथी कर्मियों द्वारा दवा और पेय पदार्थ देने के बाद हालत में सुधार आ गया।

ये हैं प्रमुख मांगें
डाकसेवकों ने तीन सूत्रीय मांगें रखी हैं। जिनमें सभी ग्रामीण डाकसेवकों को नियमित किया जाए। सातवां वेतन आयोग लागू किया जाए। उनके लिए पेंशन व्यवस्था लागू की जाए। डाक सेवकों का कहना है कि वह लंबे समय से डाकघर में काम कर रहे हैं। वेतन के नाम पर उन्हें मात्र छह हजार रूपए दिए जाते हैं।

मांग पूरी नहीं हुई तो सड़कों पर होगा आंदोलन
डाक सेवकों का कहना है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गई तो मजबूरन उन्हें सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा। सरकार डाक सेवकों के साथ उदासीन रवैया अपना रही है। हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है।

 

 

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