scriptBJP rejects WHO's death toll from covid 19 | क्या भारत में कोविड से 47 लाख मौतें हुईं? BJP ने चार तर्कों से खारिज किया WHO का दावा | Patrika News

क्या भारत में कोविड से 47 लाख मौतें हुईं? BJP ने चार तर्कों से खारिज किया WHO का दावा

विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) की ओर से भारत में कोविड 19 से 47 लाख लोगों की मौत के आंकड़े को भारतीय जनता पार्टी ने जानिए किन चार तर्कों के आधार पर खारिज किया है?

नई दिल्ली

Published: May 07, 2022 09:11:16 pm

पत्रिका ब्यूरो,नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) की ओर से भारत में कोविड 19 से 47 लाख लोगों की मौत के आंकड़े को भारतीय जनता पार्टी ने चार तर्कों के आधार पर खारिज किया है। भाजपा ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट को काल्पनिक करार देते हुए कहा कि यह कोविड के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ते हिंदुस्तान को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश है। भाजपा ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर मौतों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।
covid-19
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भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने पार्टी मुख्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि भारत में कोरोना वायरस महामारी से हुई मौतों के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन से जारी आंकड़े पूरी तरह से गलत हैं। भारत सरकार ने इस संबंध में डब्ल्यूएचओ के समक्ष अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी को नीचा दिखाने के लिए लगातार भारत को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं
पात्रा ने गिनाए चार तर्क
संबित पात्रा ने कहा कि चार ऐसे तथ्य हैं, जिसके आधार पर हमें पता चलता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का भारत में कोरोना से हुई मौतों का डेटा गलत है। पहला यह कि इस आंकड़े के लिए पूरी प्रक्रिया में डब्ल्यूएचओ ने जिस प्रकार के तरीकों को अपनाया है, वही गलत है। दूसरा, डेटा के स्रोत में एक्यूरेसी होनी चाहिए, जबकि डब्ल्यूएचओ ने स्वयं माना है कि स्रोत वैरिफाइड नहीं हैं। तीसरा, किस मानदंड के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत को टियर-2 देश में रखा है, ये भी सटीक रूप से पता नहीं चलता। चौथा यह कि डब्ल्यूएचओ ने काल्पनिक तरीके से डेटा का विश्लेषण किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में कोविड से होने वाली मौतों का जो आंकड़ा पेश किया है, वह भारत के आधिकारिक आंकड़ों से करीब 10 गुना ज़्यादा है। पात्रा ने कहा कि भारत में पहले से ही जन्म-मृत्यु के आंकड़े दर्ज करने का व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीका है। साथ ही, जब पहले से ही भारत के पास कोरोना से हुईं मौतों का आंकड़ा मौजूद है, ऐसी स्थिति में उस मॉडल को तवज्जो नहीं दी जा सकती जहां पर सिर्फ अनुमान के मुताबिक आंकड़े जारी किए गए हों।

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